किशनगंज: क्लबफुट से पीड़ित दो बच्ची को मिला नया जीवन अवसर

किशनगंज: क्लबफुट से पीड़ित दो बच्ची को मिला नया जीवन अवसर

संक्षेप:

किशनगंज में दो बच्चियों को क्लबफुट के उपचार के लिए भागलपुर मेडिकल कॉलेज भेजा गया है। आरबीएसके टीम ने जन्मजात विकृति की पहचान की और मुफ्त इलाज का प्रबंध किया। माता-पिता ने डॉक्टरों और सरकार के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया, जिससे उन्हें उम्मीद है कि उनकी बच्चियां सामान्य जीवन जी सकेंगी।

Nov 05, 2025 05:16 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, भागलपुर
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किशनगंज । एक प्रतिनिधि क्लबफुट से पीड़ित दो बच्चियों को विशेषज्ञ इलाज के लिए बुधवार को सदर अस्पताल से जेएलएनएमसीएच भागलपुर रवाना किया गया। दोनों बच्चियों के माता-पिता ने कहा उन्हें उम्मीद है उनकी बेटियां अब सामान्य जीवन जी सकेंगी। सिविल सर्जन डॉ.राजकुमार चौधरी ने कहा आरबीएसके के तहत जन्मजात विकृतियों से जूझ रहे बच्चों को नया जीवन देने की दिशा में किशनगंज जिले में एक और सराहनीय पहल हुई है।उन्होंने कहा आरबीएसके टीम द्वारा नियमित स्वास्थ्य जांच के दौरान दोनों बच्चियों में क्लबफुट (जन्मजात पैर विकृति) की पहचान की गई थी। जांच के बाद उनके परिवारों को परामर्श दिया गया और इलाज के लिए भागलपुर मेडिकल कॉलेज भेजने की प्रक्रिया पूरी की गई।आरबीएसके

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टीम के एक सदस्य ने बताया कि प्रारंभिक अवस्था में इलाज से यह विकृति पूरी तरह ठीक की जा सकती है।आरबीएसके टीम ने कहा कि हमारा उद्देश्य है कि किसी भी बच्चे को जन्मजात विकृति के कारण जीवनभर परेशानी न झेलनी पड़े। हम हर ऐसे मामले की पहचान कर विशेषज्ञ इलाज सुनिश्चित करते हैं।उन्होंने कहा क्लबफुट एक जन्मजात विकृति है जिसमें बच्चे का पैर अंदर की ओर मुड़ जाता है और चलने में कठिनाई होती है। समय रहते इलाज मिलने पर यह स्थिति पूर्ण रूप से सुधर सकती है।सिविल सर्जन ने बताया कि आरबीएसके कार्यक्रम के अंतर्गत जन्मजात विकृतियों से ग्रसित बच्चों की शीघ्र पहचान और उपचार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। ऐसे मामलों में जल्दी उपचार से बच्चे पूरी तरह सामान्य जीवन जी सकते हैं। हमारी टीम हर प्रखंड में स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों पर जाकर बच्चों की स्वास्थ्य जांच कर रही है।उन्होंने आगे कहा कि साक्षी और परी जैसी बच्चियां आने वाले समय में स्वस्थ होकर समाज में प्रेरणा बनेंगी। माता-पिता की उम्मीदों को मिला सहारा पीड़ित दोनों बच्ची ही आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से हैं। उनके माता-पिता ने बताया कि वे इलाज को लेकर काफी चिंतित थे, परंतु आरबीएसके टीम ने घर जाकर उन्हें पूरी प्रक्रिया समझाई और निःशुल्क इलाज के लिए भागलपुर भेजने की व्यवस्था की।पीड़िता की मां ने कहा, सरकार और डॉक्टरों के इस सहयोग से हमें उम्मीद की किरण दिखी है। अब हमारी बच्ची भी बाकी बच्चों की तरह चल सकेगी। जिला स्वास्थ्य समिति के डीपीएम डॉ. मुनाजिम ने कहा कि आरबीएसके के तहत जिले में चार डीईआईसी टीम सक्रिय हैं, जो शिशुओं और स्कूली बच्चों में जन्मजात विकृतियों, रोगों व विकलांगताओं की जांच कर उनका उपचार सुनिश्चित करती हैं।जिला कार्यक्रम प्रबंधक डॉ मुनजिम ने कहा कि किशनगंज जिले में अब तक कई बच्चों का सफल उपचार आरबीएसके के माध्यम से कराया गया है। यह कार्यक्रम बच्चों के स्वस्थ बचपन के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच है। हम हर सप्ताह रिपोर्ट की समीक्षा करते हैं और आवश्यकतानुसार मरीजों को रेफर करते हैं।