बोले पूर्णिया : बढ़ती महंगाई की कसक के बाद भी लोगों पर चढ़ा होली का रंग गहरा
-प्रस्तुति : अमित कुमार रजनीश होली पर्व को लेकर पूर्णिया में शहर से लेकर

-प्रस्तुति : अमित कुमार रजनीश
होली पर्व को लेकर पूर्णिया में शहर से लेकर ग्रामीण बाजार पूरी तरह सज चुके हैं। मधुबनी बाजार, भट्ठा बाजार, खुश्कीबाग, गुलाबबाग जैसे प्रमुख बाजारों से लेकर धमदाहा, मीरगंज, बनमनखी, रूपौली, भवानीपुर, सरसी, चंपावती, बैसा, अमौर, रौटा, बायसी, डगरूआ, हरदा, केनगर, चंपानगर, कसबा, गढ़बनैली और जलालगढ़ के बाजार गुलजार हैं। महंगाई की मार के बावजूद रमजान और होली के साथ शादी के सीजन के कारण बाजारों में रौनक हैं। सुबह से देर शाम तक खरीददारी हो रही है। मंहगाई की मार के बावजूद लोगों के उत्साह में किसी प्रकार की कमी नहीं दिख रही है। पुआ-पकवान बनाने के लिए उपयोग में आने वाले मैदा, चीनी, रिफाइन तेल और ड्राई फ्रूट्स के दाम बढ़ने के बाद भी लोग जमकर खरीदारी कर रहे हैं। वहीं रंग, अबीर-गुलाल, पिचकारी, मुखौटा, कार्टून चरित्र वाले मास्क और विभिन्न डिजाइनों की टोपियों की दुकानों पर भीड़ उमड़ रही है। युवाओं और बच्चों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। हालांकि, लोगों के मन में महंगाई की कसक तो है लेकिन रंगों के पर्व का उत्साह और उमंग ही कुछ ऐसा है कि लोग सब कुछ भूलकर खरीददारी में व्यस्त हैं। सुबह से लेकर शाम तक बाजारों में भीड़ नजर आ रही है। उस पर लगन का मौसम भी चल रहा है। कुल मिलाकर बाजारों में रौनक है। खरीददार महंगाई की मार की जिक्र करते हुए भी परिजनों की खुशियों में कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाह रहे हैं। होली को लेकर मिठाई की दुकानों पर खाजा, गुजिया, पुआ, दही-बड़ा और अन्य पारंपरिक व्यंजनों की तैयारी जोरों पर है। दुकानदारों का कहना है कि इस बार कच्चे माल की कीमतों में 10 से 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है, लेकिन त्योहार की खुशी के आगे लोग बजट की परवाह कम कर रहे हैं। कई परिवारों ने खर्च सीमित रखते हुए भी परंपरागत पकवान बनाने की तैयारी कर ली है। रंग-अबीर की दुकानों में हर्बल और प्राकृतिक रंगों की मांग बढ़ी है। हालांकि इनके दाम सामान्य रंगों से अधिक हैं, फिर भी स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए लोग इन्हें प्राथमिकता दे रहे हैं। बच्चों के लिए आकर्षक डिजाइन की पिचकारियां टैंक वाली, कार्टून आकृति वाली और प्रेशर गन मॉडल खूब बिक रही हैं। युवाओं में रंग-बिरंगी टोपी, फंकी चश्मे और फेस मास्क का क्रेज बढ़ा है। मुखौटा और कार्टून आधारित खिलौनों की दुकानों पर भी अच्छी बिक्री हो रही है। सुपरहीरो, फिल्मी पात्र और एनिमेशन किरदारों के मुखौटे बच्चों को लुभा रहे हैं। दुकानदारों के अनुसार, इस बार नई डिजाइनों की टोपियों और थीम आधारित एक्सेसरीज की मांग अधिक है। महिलाएं घर-गृहस्थी के सामान और सजावटी वस्तुओं की खरीदारी में व्यस्त हैं। कई स्थानों पर स्वयं सहायता समूहों द्वारा बनाए गए घरेलू पापड़, बड़ी और मिठाइयों की बिक्री भी हो रही है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार को बढ़ावा मिल रहा है। मंहगाई के कारण कुछ लोगों ने खरीदारी सीमित रखी है, लेकिन त्योहार की परंपरा निभाने में कोई पीछे नहीं हटना चाहता। बाजार समिति के अनुसार, त्योहार के मद्देनजर सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था भी मजबूत की गई है। पुलिस बल की तैनाती और सीसीटीवी निगरानी की व्यवस्था की गई है ताकि खरीदारी के दौरान किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो। ग्रामीण क्षेत्रों से भी लोग शहर के बाजारों में पहुंच रहे हैं। बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन पर बाहर से आने वाले लोगों की भीड़ देखी जा रही है।
परदेश से घर आने वालों से बढ़ी बाजारों की रंगत
परदेश में काम करने वाले लोग अपने घर लौटकर होली की खरीदारी कर रहे हैं, जिससे बाजार की चहल-पहल और बढ़ गई है। दुकानदारों का कहना है कि मंहगाई के बावजूद बिक्री में संतोषजनक वृद्धि हुई है। त्योहार के कारण लोगों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ है। होली के पारंपरिक गीतों और ढोल-नगाड़ों की धुन के बीच बाजार में रंगों की बहार देखने को मिल रही है। समाज के विभिन्न वर्गों के लोग अपनी क्षमता अनुसार खरीदारी कर रहे हैं। कोई सादगी से त्योहार मनाने की तैयारी में है तो कोई धूमधाम से। कुल मिलाकर मंहगाई की मार के बावजूद होली का उत्साह बाजारों में साफ दिखाई दे रहा है। रंग, उमंग और परंपरा का यह संगम लोगों के चेहरों पर मुस्कान ला रहा है।
शिकायत
1. बाजारों में त्योहार के दौरान अत्यधिक भीड़ से जाम की समस्या बढ़ गई है। पार्किंग व्यवस्था नहीं होने से ग्राहकोंव दुकानदारों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
2. महंगाई के कारण आवश्यक खाद्य सामग्री जैसे मैदा, तेल, चीनी और सूखे मेवों के दाम बढ़ गए हैं, जिससे मध्यमवर्गीय परिवारों का बजट प्रभावित हो रहा है।
3. कई जगहों पर अस्थायी दुकानों के कारण सड़कें संकरी हो गई हैं। पैदल चलने वालों और वाहनों के बीच टकराव की स्थिति बन रही है। प्रशासन को ध्यान देना चाहिए।
4. कुछ बाजारों में साफ-सफाई की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। कचरे के ढेर और नालियों की गंदगी से दुर्गंध फैल रही है, जिससे लोगों को परेशानी हो रही है।
5. त्योहार में नकली रंग और मिलावटी मिठाइयों की आशंका बनी रहती है। गुणवत्ता जांच की कमी से ग्राहकों में असुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी चिंता बढ़ रही है।
सुझाव
1. त्योहार के दौरान विशेष ट्रैफिक प्लान लागू किया जाए। पार्किंग स्थल चिह्नित कर यातायात को व्यवस्थित किया जाए, ताकि भीड़ व जाम की समस्या कम हो सके।
2. खाद्य सामग्री और मिठाइयों की नियमित जांच कर मिलावट पर सख्त कार्रवाई की जाए। प्रशासनिक टीम बाजारों में निरीक्षण अभियान तेज करे।
3. बाजार क्षेत्रों में अतिरिक्त सफाईकर्मी तैनात किए जाएं। कचरा उठाव की नियमित व्यवस्था कर स्वच्छ वातावरण सुनिश्चित किया जाए। इससे राहत मिलेगी।
4. ग्राहकों को जागरूक करने के लिए हर्बल व सुरक्षित रंगों के उपयोग का प्रचार किया जाए। स्कूलों और मोहल्लों में स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता अभियान चलाया जाए।
5. स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए स्टॉल उपलब्ध कराए जाएं, जिससे स्थानीय रोजगार बढ़े व ग्राहकों को उचित दाम पर सामान मिले।
हमारी भी सुनें
मंहगाई के बावजूद होली को लेकर लोगों में उत्साह कम नहीं हुआ है। लोग क्षमता के अनुसार खरीदारी कर रहे हैं और पारंपरिक पकवान बनाने की तैयारी कर रहे हैं।
-प्रशांत कुमार झा
पुआ-पकवान के लिए मैदा, चीनी व रिफाइन तेल के दाम बढ़े हैं, फिर भी महिलाएं घरों में तैयारी में जुटी हैं। ड्राई फ्रूट्स की मात्रा में थोड़ी कमी आई है, लेकिन स्वाद से समझौता नहीं।
-ब्रज किशोर भारती
रंग व अबीर-गुलाल के दाम बढ़ने के बावजूद युवाओं और बच्चों में खरीदारी का उत्साह चरम पर है। हर्बल रंगों की मांग अधिक देखी जा रही है, लोगों में जागरूकता भी बढ़ी है।
-राजेश कुमार यादव
पिचकारी की नई-नई डिजाइनों ने बच्चों को आकर्षित किया है। टैंक व गन मॉडल की ज्यादा बिक रही हैं। अभिभावक कीमत अधिक होने के बाद भी बच्चों की खुशी के लिए खरीदारी कर रहे हैं। -आलोक लोहिया
मुखौटा और कार्टून चरित्रों वाले मास्क की बिक्री बढ़ी है। बच्चेे पसंदीदा किरदारों का मुखौटा पहन होली खेलने को उत्साहित हैं। दुकानदारों के अनुसार, यह ट्रेंड हर साल बढ़ रहा है। -मनीष रंजन
युवाओं में फंकी चश्मे व रंगीन टोपियों का क्रेज बढ़ा है। सोशल मीडिया पर फोटो व वीडियो साझा करने के लिए युवा विशेष तैयारी कर रहे हैं। त्योहार अब पारंपरिक के साथ आधुनिक रंग भी ले रहा है।-रितिक रसाल
मिठाई दुकानों पर गुजिया और दही-बड़ा की मांग बढ़ी है। मंहगाई के बावजूद ग्राहकों की भीड़ बनी हुई है। दुकानदारों ने पहले से अधिक स्टॉक मंगाया है।
-अजय कांत झा
ग्रामीण क्षेत्रों से शहर के बाजारों में लोगों की आवाजाही बढ़ी है। बस स्टैंड और स्टेशन पर भीड़ नजर आ रही है। परदेस से लौटे लोग अपने परिवार के साथ खरीदारी में जुटे हैं।
-सानु जायसवाल
स्वयं सहायता समूहों द्वारा बनाए गए घरेलू उत्पादों की बिक्री में भी तेजी आई है। इससे स्थानीय महिलाओं को आर्थिक लाभ मिल रहा है और त्योहार में स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा मिल रहा है। -केशव कुमार
मंहगाई के कारण कुछ परिवारों ने सीमित बजट में त्योहार मनाने का निर्णय लिया है। सादगी के साथ रंग-अबीर से होली खेलने की तैयारी की जा रही है।
-पंकज कुमार सिंह
बाजारों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है। पुलिस बल की तैनाती और सीसीटीवी निगरानी से खरीदारी करने वाले लोग खुद को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
-राजेश अग्रवाल
दुकानदारों का कहना है कि लागत बढ़ने के बावजूद बिक्री संतोषजनक है। त्योहार के कारण व्यापार में नई ऊर्जा आई है। महंगाई का असर तो है लेकिन इससे अधिक लोगों की खुशियां हैं।-पवन कुमार राय
महिलाओं में सजावटी वस्तुओं और रसोई सामग्री की खरीदारी को लेकर खास उत्साह देखा जा रहा है। घरों की साफ-सफाई व सजावट का काम भी जोरों पर है।-ललित चौरसिया
कुल मिलाकर मंहगाई की मार के बाद भी होली का रंग फीका नहीं पड़ा है। बाजारों की रौनक साबित कर रही है कि त्योहार लोगों के जीवन में नई उमंग लेकर आता है।-विजयकांत
बोले जिम्मेदार
रोजाना बाजार भाव पर नजर रखी जाती है। किसी को भी खाद्य सामग्री स्टॉक करने की अनुमति नहीं है। न ही बाजार मूल्य से अधिक कीमत पर बेचने की अनुमति है। रोज मॉनीटरिंग की जाती है। ताकि उपभोक्ताओं को किसी तरह की परेशानी न हो। होली पर्व को लेकर लोगों में काफी उत्साह है। बाजारों में चहल-पहल है। लोग इच्छा के मुताबिक खरीददारी कर रहे हैं।
-रविशंकर, जिला आपूर्ति पदाधिकारी
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