
कोरोना के खौफ के बीच धीरे-धीरे बढ़ रहा मच्छरों से होने वाली बीमारियों का खतरा
मच्छरों का प्रकोप पारा 30 डिग्री सेल्सियस पर आते ही बढ़ गया है। शाम ढलते ही आसपास मच्छर मंडराने लगते हैं। चिकित्सक बताते हैं कि अगर मच्छरों के प्रकोप पर नियंत्रण नहीं किया गया तो मच्छरजनित बीमारियों...
मच्छरों का प्रकोप पारा 30 डिग्री सेल्सियस पर आते ही बढ़ गया है। शाम ढलते ही आसपास मच्छर मंडराने लगते हैं। चिकित्सक बताते हैं कि अगर मच्छरों के प्रकोप पर नियंत्रण नहीं किया गया तो मच्छरजनित बीमारियों के लोग शिकार हो सकते हैं। भागलपुर के जेएलएनएमसीएच के इमरजेंसी में तीन दिनों में मलेरिया के पांच मरीज इलाज के लिए आ चुके हैं।
मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. राजकमल चौधरी बताते हैं कि मच्छरों के काटने से सबसे ज्यादा मलेरिया व डेंगू की बीमारी होती है। डेंगू अक्सर बरसात के दिनों में होता है, लेकिन मलेरिया होने का समय अप्रैल से सितंबर है। इसके अलावा चिकनगुनिया भी मच्छरों से होने वाली बीमारियों में से एक है। इसमें पीड़ित व्यक्ति के सभी अंगों में तेज दर्द होने लगता है और ठीक होने के बाद भी वह सही तरह से नहीं चल पाता है। अगर चिकनगुनिया किसी को एक बार हो जाए तो इसे ठीक होने में काफी समय लगता है। इस बीमारी का लक्षण सिरदर्द, चक्कर और उल्टी आना है।
अभी फैला तो मरीजों का इलाज हो जायेगा मुश्किल
अभी जेएलएनएमसीएच को कोरोना मरीजों के इलाज के लिए सुरक्षित रख लिया गया है। सिर्फ इमरजेंसी को खुला रखा गया है। जबकि सदर अस्पताल सिर्फ प्रसव कराने व साधारण इमरजेंसी चलाने में हांफ रहा है। ऐसे में अगर बीते साल की तरह डेंगू ने पांव पसार दिये तो इसके मरीजों का जांच व इलाज करना मुश्किल हो जायेगा।
मच्छरों के काटने से इन-इन बीमारियों के हो सकते हैं शिकार
डॉ. चौधरी बताते हैं कि क्यूलेक्स नामक मच्छर के काटने से वेस्ट नाइल बीमारी होती है। इस बीमारी का लक्षण आमतौर पर दिखता नहीं है, फिर भी कई बार बुखार, डायरिया, जोड़ों में दर्द, मितली जैसे लक्षण दिख जाते हैं। इस बीमारी के बढ़ने से बच्चे मेनेन्जाइटिस व इंस्फ्लाइटिस जैसे ब्रेन इंफेक्शन के शिकार हो जाते हैं। मच्छरों के काटने से जीका बीमारी भी होती है। इनमें बीमारी का लक्षण आंखों का लाल होना, बुखार व जोड़ों में दर्द होना है। जीका वायरस शरीर में प्रवेश कर जाने पर न केवल गर्भवती महिला, बल्कि उसका गर्भस्थ शिशु भी इस बीमारी से संक्रमित हो सकता है। ला क्रॉस इंसेफेलाइटिस एक वायरस डिजीज होती है। इस वायरस का मच्छर आमतौर पर दिन के समय ही काटता है। इस बीमारी में कोई लक्षण नहीं दिखते हैं, लेकिन गंभीर होने पर बीमार कोमा में चला जाता है या फिर लकवा का शिकार हो जाता है। येलो फीवर बीमारी भी मच्छरों के काटने से होता है। कमर दर्द, उल्टी, सिर दर्द इस बीमारी के लक्षण हैं।
मच्छरजनित बीमारियों से बचने को ये करें उपाय
वरीय फिजिशियन डॉ. हेमशंकर शर्मा ने कहा कि मच्छरजनित बीमारियों से बचाव के लिए मच्छरदानी का इस्तेमाल करें। घर के आसपास गंदगी, कचरा व जलजमाव न होने दें। डेंगू के लार्वा न पनपे इसके लिए जलजमाव वाले स्थान पर केरोसिन के तेल की कुछ बूंदें डालें। इसके अलावा नगर निगम को भी शहर की नालियों की सफाई, नियमित कचरा उठाव, फागिंग व जलजमाव वाले क्षेत्रों में दवा का छिड़काव कराना चाहिए।

लेखक के बारे में
Sunil Abhimanyuसुनील अभिमन्यु
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