High-Risk Pregnancy Concerns in Bihar Health Department to Monitor Pregnant Women मां बनने जा रही हर छठी महिला की सेहत खतरे में, Bhagalpur Hindi News - Hindustan
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मां बनने जा रही हर छठी महिला की सेहत खतरे में

स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी पीएम सुरक्षित मातृत्व अभियान की हालिया रिपोर्ट से हुआ खुलासा सूबे

Newswrap हिन्दुस्तान, भागलपुरSat, 6 Sep 2025 04:06 AM
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मां बनने जा रही हर छठी महिला की सेहत खतरे में

भागलपुर, वरीय संवाददाता जिले में मां बनने जा रही हर छठी महिला की जान खतरे में है। ऐसी महिलाओं का न केवल बीपी हाई है तो रगों में शुगर बढ़ा हुआ है। वहीं बड़ी संख्या में शादीशुदा महिलाएं कच्ची उम्र या फिर अधिक उम्र में मां बनने जा रही हैं। अब ऐसी गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य विभाग विशेष निगरानी रखने जा रहा है। दौरान इन्हें न केवल तीन बार प्रसव पूर्व जांच और इलाज कराया जाएगा बल्कि आशा कार्यकर्ताओं की उपलब्धता इन्हें प्रसव न होने तक उपलब्ध कराई जाएगी। अगस्त माह में बिहार के 38 जिले में चला पीएमएसएमए और ई–पीएमएसएमए गर्भवती महिलाओं के लिए हरेक माह दो बार पीएमएसएमए यानी प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान चलाया जाता है।

इसके अलाावा ई-पीएमएसएमए चलाया जाता है। इस अभियान के तहत गर्भवती महिलाओं की विशेष जांच की जाती है, ताकि समय रहते उनका इलाज करते हुए सुरक्षित प्रसव हो सके। इसी के तहत अगस्त माह में पीएमएसएमए व ई-पीएमएसएमए चलाया गया। इसके तहत सूबे की कुल 38 जिलों में 73844 गर्भवती महिलाओं का महिला चिकित्सकों द्वारा विशेष जांच की गई। इनमें से 5350 यानी 7.2 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं हाई रिस्क प्रेग्नेंसी जोन में पाई गई। टॉप 10 हाई रिस्क प्रेग्नेंसी जिलों में पूर्वी बिहार, कोसी-सीमांचल के तीन और जिले आंकड़ों के अनुसार, सूबे के सभी 38 जिलों में से भागलपुर जिले में हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की जद में सर्वाधिक गर्भवती महिलाएं हैं। भागलपुर जिले में अगस्त माह में पीएमएसएमए व ई-पीएमएसएमए के तहत 1996 गर्भवती महिलाओं की जांच की गई। इनमें से 364 गर्भवती महिलाएं हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की जद में मिली, जो कि कुल गर्भवती महिलाओं का 18.2 प्रतिशत है, जो कि पूरे बिहार में सर्वाधिक है। वहीं अगर हम बिहार के टॉप 10 हाई प्रेग्नेंसी वाले जिलों की बात करें तो इस सूची में पूर्वी बिहार, कोसी-सीमांचल के तीन और जिले हैं। नंबर एक स्थान पर जहां भागलपुर है तो वहीं जमुई नंबर चार, सहरसा नंबर पांच तो पूर्णिया जिला नंबर आठ पर है। जमुई जिले की कुल 607 गर्भवती महिलाओं से 106 यानी 16.3 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की जद में मिलीं। जबकि सहरसा जिले में 1754 में से 218 यानी 12.4 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं तो पूर्णिया जिले में 2435 में से 273 यानी 11.2 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की जद में मिली। वहीं नंबर नौ पर सूबे की राजधानी पटना व नंबर दस पर मुजफ्फरपुर जिला है। पटना जिले में हुए 3986 गर्भवती महिलाओं की हुई जांच में से 408 यानी 10.2 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की शिकार मिली। वहीं मुजफ्फरपुर जिले में 3249 गर्भवती महिलाओं की जांच हुई। इनमें से 256 यानी 7.9 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं हाई रिस्क प्रेग्नेंसी जोन में मिली। इन-इन चीजों ने गर्भवती महिलाओं को ला दिया हाई रिस्क प्रेग्नेंसी जोन में सदर अस्पताल की स्त्री एवं प्रसव रोग विशेषज्ञ डॉ. ज्योति कुमारी बताती हैं कि प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान में ऐसी बीमारियों या फिर कारणों को ढूंढा जाता है, जो गर्भवती महिलाओं को उच्च जोखिम वाले श्रेणी में डाल देता है और प्रसव के दौरान जच्चा-बच्चा की जान को खतरा हो जाता है। अभियान के दौरान ऐसी गर्भवती महिलाएं जो कि 17 साल से कम उम्र या फिर 35 साल से ज्यादा उम्र में गर्भधारण करने जा रही हैं, बड़ी संख्या में मिली। इसके अलावा जिन गर्भवती महिलाओं में शुगर, हाई बीपी, हृदय रोग, थायराइड रोग, किडनी की बीमारी, डिप्रेशन, कम वजन या फिर मोटापा, गर्भ में जुड़वा बच्चा होना, प्री एक्लेम्पसिया या जेस्टेशनल मधुमेह पाया गया, उन्हें हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की श्रेणी में रखा गया। ऐसी महिलाओं को विशेष निगरानी व देखभाल की जरूरत होती है। बिहार में सबसे ज्यादा बांका जिले में हुई गर्भवती महिलाओं की जांच जिला जांच हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की संख्या रैंक भागलपुर 1996 364 01 जमुई 344 56 04 सहरसा 1754 218 06 पूर्णिया 2435 273 08 अररिया 1297 93 13 सुपौल 2442 169 14 बांका 4478 307 15 लखीसराय 565 36 19 मधेपुरा 911 56 21 किशनगंज 578 29 26 कटिहार 1314 61 27 मुंगेर 1717 43 34 खगड़िया 771 04 38

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