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हाईकोर्ट ने लाजपत पार्क में जलमीनार के निर्माण पर जिला प्रशासन से मांगी रिपोर्ट

high court sought reports from district administration on construction of water tank at lajpat park

भागलपुर  के लाजपत पार्क में जलमीनार का निर्माण कराए जाने पर हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन से रिपोर्ट मांगी है। डीएम के निर्देश पर डीडीसी सुनील कुमार और एडीएम राजेश झा राजा ने सोमवार को लाजपत पार्क जाकर जलमीनार निर्माण कार्य की जांच की। दोनों अधिकारी डीएम को रिपोर्ट सौंपेंगे। इसके बाद  प्रशासन हाईकोर्ट को रिपोर्ट सौंपेगा।

एडीएम ने बताया कि पार्क में जलमीनार की स्थिति और पार्क के आसपास एक किमी तक दूसरी जमीन की उपलब्धता की जांच की गई। पार्क के अंदर जाकर निर्माणाधीन जलमीनार को देखा। इसके अलावा जलमीनार के लिए आसपास कितनी जमीन उपलब्ध है इसका जायजा लिया। जल्द ही हाईकोर्ट को जांच प्रतिवेदन भेज दिया जाएगा। दोनों अधिकारियों ने जांच के दौरान यह भी देखा कि जलमीनार से पार्क को नुकसान हो रहा है कि नहीं। एडीएम ने बताया कि प्रतिवेदन में विस्तृत जानकारी दी जाएगी।
 
एनजीटी भी कर रहा जांच, हो सकती है कार्रवाई
लाजपत पार्क में जलमीनार निर्माण और उस दौरान लगभग 100 हरे पेड़ काट दिये जाने के मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) भी जांच कर रहा है। हिन्दुस्तान अखबार में हरे पेड़ काट दिए जाने की खबर की कटिंग लगाकर आरटीआई कार्यकर्ता अजीत कुमार सिंह ने ग्रीन ट्रिब्यूनल को लिखा था। एनजीटी ने आवेदन को स्वीकार कर लिया है और उसपर जांच किए जाने की बात कही है। पेड़ काटने में जिस तरह नियमों की अनदेखी की गई है, उसे देखते हुए एनजीटी द्वारा कार्रवाई की जा सकती है। हरे पेड़ काटे जाने से पहले वन विभाग से अनुमति नहीं ली गई थी। वन विभाग को पता ही नहीं था कि वहां पेड़ काटे गए हैं। हिन्दुस्तान में खबर छपने के बाद वन विभाग के अधिकारी जांच के लिए लाजपत पार्क पहुंचे थे। मुख्य न्यायाधीश के कोर्ट में इस जनहित याचिका की अगली सुनवाई 18 जून को होनी है। 

हिन्दुस्तान ने चलाया था अभियान
लाजपत पार्क में जलमीनार निर्माण के दौरान हरे पेड़ काट दिए जाने और लोगों के टहलने के लिए बने वॉकिंग ट्रैक को तोड़ दिए जाने को लेकर हिन्दुस्तान ने पिछले साल नवंबर-दिसंबर में अभियान चलाया था। हिन्दुस्तान के अभियान से शहर के लोग जुड़ते चले गए। हिन्दुस्तान अखबार की कटिंग लगाकर ही आरटीआई कार्यकर्ता ने हाईकोर्ट में आवेदन भेजा था। इसे कोर्ट ने जनहित याचिका के रूप में स्वीकार किया और संज्ञान लेते हुए नगर निगम से जवाब दाखिल करने को कहा था। 
 

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