परिवार और समाज को भी छात्राएं रोगों को लेकर करें जागरूक : प्रॉक्टर
फोटो है : होम साइंस विभाग द्वारा आयोजित हुई एक दिवसीय कार्यशाला पीसीओडी और

भागलपुर, वरीय संवाददाता। कई बीमारियां ऐसी हैं, जो सिर्फ जागरूकता के अभाव में होती हैं। यदि सही तरीके से समाज में उस समस्या को लेकर जागरूकता होगी तो समस्या जड़ से समाप्त हो सकती है। छात्राओं की जिम्मेवारी है कि स्वास्थ्य कार्यशाला में एक्सपर्ट की जो जानकारी हो, वे अपने परिवार से लेकर समाज के बीच ले जाएं, ताकि उन्हें भी समस्या से निजात मिल सके। यह बातें एसएम कॉलेज के जीएफ हॉल में टीएमबीयू के प्रॉक्टर डॉ. मुकेश कुमार सिंह ने मंगलवार को बतौर मुख्य अतिथि कही। वे होम साइंस विभाग द्वारा वर्ल्ड हेल्थ डे पर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।
इसका विषय ‘एनीमिया एंड पीसीओडी फॉर हेल्थ अवेयरनेस’ रखा गया था।कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत मुख्य अतिथि के अलावा स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. दीप्ति सिन्हा, फिजिशियन डॉ. विनय कुमार झा, पीजी होम साइंस की हेड डॉ. शेफाली, कॉलेज होम साइंस विभाग की हेड और कार्यक्रम संयोजक डॉ. लक्ष्मी पांडेय ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलन कर किया। पीजी संगीत विभाग की छात्राओं ने कुलगीत और स्वागत गान की प्रस्तुति दी। अतिथियों का स्वागत करते हुए संयोजक डॉ. लक्ष्मी ने कार्यक्रम के विषय पर प्रकाश डाला। आयोजन सचिव डॉ. कुसुम भारती ने कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं में जागरूकता लाना था। मंच संचालन डॉ. गीता ने किया। प्राचार्य डॉ. निशा झ ने अपने संदेश में विभाग को आयोजन के लिए शुभकामनाएं दी।डॉ. दीप्ति सिन्हा ने पीसीओडी पर छात्राओं को उसके लक्षण और रोकथाम के उपाय से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि मोटापा की स्थिति में प्रोटीन ज्यादा लेकर कार्बोहाइड्रेट वाले खानपान पर नियंत्रण करें। फास्टफूड को पूरी तरह से छोड़ दें, खाने में मोटे अनाज को शामिल करने की जरूरत है। पीसीओडी की समस्या से जूझ रही लड़कियों को व्यायाम को दिनचर्या का हिस्सा बनाने की जरूरत है। डॉ. विनय कुमार झा ने एनीमिया पर बोलते हुए बताया कि वह हीमोग्लोबिन की कमी से होता है। उन्होंने तीन तरह के स्टेज के बारे में बताया। एनीमिया की स्थिति में थकावट, खून की कमी, शरीर उजला-पीला पड़ना आदि लक्षणों के बारे में बताया। साथ ही कि वे लोग नियमित रूप से हरी सब्जियों को आहार में शामिल करें। पीजी होम साइंस की हेड डॉ. शेफाली ने कहा कि सबसे जरूरी स्वच्छता है, इसके माध्यम से ही हम खुद स्वस्थ रह सकते हैं।कार्यक्रम के अंत में एनीमिया से जूझ रही महिला की कहानी को लेकर महत्वपूर्ण नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया गया। इसमें जूली, आयुषी सिंह, आर्या झा, मरियम, माधुरी, प्रीति, मोनिका, मीठी, आकृति परमार, मुनमुन, चांदनी, अमीशा, स्नेहा शामिल थी। खुशबू और अनीशा ने छात्राओं बीएमआई मापा। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. प्रकाश ने किया। इस मौके पर डॉ. अमृता प्रियंवदा, डॉ. रेणु रानी जायसवाल, डॉ. शिल्पा कौशल, डॉ. साधना, डॉ. दीपक कुमार दिनकर, डॉ. चैतन्या सी दामू, डॉ. हिमांशु, डॉ. सांत्वना, डॉ. प्रेमलता, डॉ. लक्ष्मी, जूही जास्मिन सहित अन्य शिक्षक मौजूद रहे।
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