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बाढ़ की त्रासदी में सबकुछ गंवा कर सुकून की तलाश में भटक रहे पीड़ित, एक रिपोर्ट

यहां के लोग अभी भी परिजनों के आने के इंतजार में है
यहां के लोग अभी भी परिजनों के आने के इंतजार में है

यहां बाढ़ की त्रासदी ने लोगों को अपनों से दूर कर दिया है। सब कुछ गंवाने वाले पीड़ित अब सुकून की तलाश में दर-दर भटक रहे हैं। एक शव ही है जिसके मिलने का अंतहीन सिलसिला जारी है। जैसे-जैसे समय और पानी निकलता जा रहा है

तबाही की दास्तां बढ़ती जा रही है। ये हाल है अररिया जिले के फारबिसगंज और जोगबनी का। कोई खेलने गया था तो कोई ससुराल और कोई परिजनों के लिए सामान लाने मगर आज तक वे लोग वापस लौट कर नहीं आए।

जोगबनी में अभी तक 22 लाशों की आधिकारिक पुष्टि हो पाई है मगर समय के साथ यह आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है। जोगबनी के 9 वर्षीया प्राची और 12 वर्षीया प्रिया सिंह की किलकारी से अब उपेंद्र सिंह का घर कभी नही गूंजेगा। 13 वर्षीया गुलजारी खातून से ना केवल उनका घर बल्कि पूरे मोहल्ले में रौनक होती थी, मगर अब मोहल्ले में वीरानगी छाई हुई है।

जोगबनी नेपाल सीमा पर अवस्थित है और यहां तो बेटी-रोटी का संबंध है। यहां के लोग अभी भी परिजनों के आने के इंतजार में है। फारबिसगंज की स्थिति भी उस चिड़ियाँ के समान है जो गा तो सकती है मगर गाती नही है। सरकारी फाइलों में अबतक 07 लाशें चिन्हित है मगर दर्जनों ऐसे लोग हैं जो परिजनों के सामने पानी में बह गए मगर फिलहाल यह आंकड़ा सरकारी फाइलों से अलग है।
 

 सिर्फ कुशमाहा ऐसा गांव है जहां के सात लोग रेत भरे पानी में बह गए
 सिर्फ कुशमाहा ऐसा गांव है जहां के सात लोग रेत भरे पानी में बह गए

 सिर्फ कुशमाहा ऐसा गांव है जहां के सात लोग रेत भरे पानी में बह गए और परिजन नही बचा पाए। पीपरा के शमशुल मियां, छंगूरी मंडल और कदम लाल सादा लोगों के सामने पानी की तेज धार में समा गए मगर ये नाम भी सरकारी फाइलों से दूर है।  

सहबाजपुर के अयोधि राय, बघवा बारातपुर देव् सुंदरी देवी, सहबाजपुर की सुशील कुमारी और बथनाहा की जुलेखा अब लौट कर नही आएगी। परिजनों के सामने ये पानी की तेज धार में विलीन हो चुके हैं। उनकी लाश की पहचान हो चुकी है। जिस घर से एक मौत या इससे ज्यादा हुई है वह बचे हुए सदस्यों में सकून ढूंढ रहा है।

पूरे फारबिसगंज प्रखंड में प्रशासनिक स्तर पर 30 मौत की पुष्टि हुई है मगर अपनों को खोने की संख्या अगर दुगुनी भी पार कर जाय तो कम है। जैसे-जैसे पानी कम हो रहा है रिश्तेदारों का आना भी शुरू हो गया है। ये रिश्तेदार पीडि़त परिजनों के जख्म पर महलम लगाने का प्रयास कर रहे हैं। आवागमन संकट से जूझ रहे लोग जुगाड़ टेक्नोलॉजी के सहारे सड़क पार कर परिजनों से मिलने जा रहे हैं। कहीं बांस के चेचरी तो कहीं बांस के बल्ले पर चढ़ कर लोग कर रहे है सड़क पार।
 

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  • Web Title:havoc of flood in araria: victims lost everything, now Wandering for relief