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शुभ संयोगों के बीच महिलाएं आज अखंड सौभाग्य की खातिर करेंगी हरितालिका तीज

ganga snan on eve of hartalika teej at bhagalpur

1 / 2हरतालिका तीज के मौके पर गंगा नहाने पहुंची महिला श्रद्धालु।

ganga snan on eve of hartalika teej at bhagalpur

2 / 2गंगा नहाने के बाद पूजा करतीं महिला श्रद्धालु

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भाद्र शुक्ल पक्ष तृतीया बुधवार को हरितालिका तीज की धूमधाम होगी। महिलाएं अपने अखंड सौभाग्य की खातिर निर्जला व्रत रखकर शिव-पार्वती की पूरे विधि -विधान से पूजा करेंगी। तीज को लेकर बाजार की रौनक बढ़ गई है। पूजन की सामग्रियों से बाजार पटने लगे हैं। मंगलवार को खरीदारी के लिए बाजारों में भीड़ रही। ज्योतिषाचार्य भूपेश मिश्रा के अनुसार व्रती मंगलवार को गंगा स्नान करने के बाद भोजन ग्रहण किया। 

तीज पर गुरु और शुक्र का बढ़िया संयोग
हरितालिका तीज पर इस बार गुरु धारा योग का संयोग बन रहा है। ज्योतिषी भूपेश मिश्रा के अनुसार सूर्य के अलावा दूसरे ग्रह दूसरे और बारहवें घर में चंद्रमा के साथ विराजमान हों तो इस योग की उत्पत्ति होती है। यह योग वैवाहिक जीवन एवं धन बढ़ोतरी के लिए उपयोगी है। शुक्र भाग्य भाव का मालिक है एवं स्वयं धन भाव का स्वामी होकर खुद की राशि में बैठा है। अर्थात यह काफी अच्छा योग है। गुरु और शुक्र अकूत संपत्ति योग का सूचक है

शिव के लिए पार्वती ने रखा था व्रत
ज्योतिषाचार्य भूपेश मिश्रा के अनुसार त्रेता युग से ही भादव शुक्ल तृतीया को हरितालिका तीज का व्रत रखा जाता है। मां पार्वती ने भी भगवान शंकर से विवाह के लिए जंगलों में रहकर कठोर तपस्या की थी। भाद्र शुक्ल तृतीया-चतुर्थी के दिन ही भोलेनाथ ने प्रसन्न होकर मां पार्वती को वरदान दिया था। इस तिथि को जो भी सुहागिन अपने पति के दीघार्यु की कामना के साथ पूजन व व्रत रखेंगी उनकी मुरादें पूरी होंगी। 

त्रेता युग से तीज व्रत की परंपरा
हरतालिका तीज व्रत की परंपरा त्रेता युग से चली आ रही है। मां पार्वती ने पहली बार बालू से भगवान महादेव व पार्वती की मूर्ति बनाकर पूजा की थी। आज भी महिलाएं मिट्टी से महादेव व पार्वती की मूर्ति बनाकर उनकी पूजा करती हैं। दिनभर निराहार या फलाहार रहकर शाम में विधि-विधान से पूजा करती हैं। 

जागरण की भी परंपरा है
आचार्य भूपेश मिश्रा के मुताबिक तीज पूजा में महिलाएं आठों पहर पूजन करती हैं। इस वजह से उन्हें पूरी रात जागना पड़ता है। रात काटने के लिए व्रती महिलाएं माता के भजन गाती रहती हैं।  तीज में महिलाओं के मायके से भी साड़ी, श्रृंगार-प्रसाधन की वस्तुएं व मिठाई आदि उपहार स्वरूप आते हैं। पति व सास से भी व्रतियों को साड़ी आदि के उपहार मिलते हैं। 

हरतालिका व्रत की कथा
पर्वतराज की पुत्री पार्वती भगवान शंकर से विवाह करना चाहती थीं पर पिता राजी नहीं थे। इससे दुखी होकर पार्वती आत्महत्या करने जा रही थीं कि सखियों ने टोका और एक योजना बनायी। इसके बाद पार्वती का सखियों ने हरण कर लिया व वन में ले गईं। वहां पर एक गुफा में रहकर पार्वती ने कठोर तपस्या की। तपस्या के आखिरी दिनों में वे केवल हवा पर रहीं। उनकी इस तपस्या से भगवान शिव प्रसन्न हुए। पार्वती के समक्ष प्रकट हुए और वरदान मांगने को कहा। पार्वती ने उनसे विवाह का वर मांगा तो भगवान ने कहा तथास्तु।

मुहूर्त : तीज पूजन के लिए सिद्धियोग शाम 5.35 बजे से 6.40 बजे तक है। वहीं सर्वार्थ सिद्धि योग शाम 6.50 से रात 8.10 बजे तक है। 

पूजन सामग्री: अक्षत, फूल, चंदन, धूप-दीप
चढ़ावा के सामान : साड़ी, टिकली-बिंदी, ऐनक, कंघी, क्रीम, पाउडर, सेंट, नेल पॉलिस सहित अन्य शृंगार प्रसाधन के सामान
प्रसाद : पिरुकिया, ठेकुआ, हलवा, पुड़ी 

पूजन सामग्री व फलों की खरीदारी की
तीज पर्व मनाने के लिए महिलाओं ने मंगलवार को पूजन-सामग्री व फलों की खरीदारी की। वेरायटी चौक के पास मेहंदी लगाने के लिए भी महिलाओं की भीड़ अधिक थी। जनता चूड़ी भंडार के अंकित ने बताया कि तीज को लेकर महिलाओं ने मेहंदी, चूड़ी, सिंदूर, अलटा, गोल रबर, सेंट आदि की खरीदारी की। 

ऐसे करें पूजन
प्रात: उठकर स्नान करने के बाद चौकी पर रंगीन वस्त्रों का आसन बिछाकर शिव व पार्वती की मूर्तियों को स्थापित करें। शुरुआत गणेश जी की पूजा से करनी चाहिए। इसके बाद शिव-पार्वती का आवाहन, आसन, स्नान, वस्त्र, गंध, चंदन, दीप, नैवेद्य, तांबूल आदि से पूजन करें।

पूजन विधि
दूध, दही, चीनी, शहद और घी से पंचामृत बनायें 
सुहाग की सामग्री को अच्छी तरह सजाकर मां पार्वती को अर्पित करें
शिवजी को नए वस्त्र पहनायें
हरतालिका व्रत की कथा सुनें
व्रत अगले दिन सूर्योदय के बाद माता पार्वती को सिंदूर चढ़ाने के बाद तोड़ें
 

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  • Web Title:Hartalika Teej today:know inside story and rule of vrata