
बिहपुर के घटोरा वेटलैंड में ग्रेलैग गूज प्रवासी पक्षी को जीपीएस-जीएसएम टैग लगा
फोटो प्रवासी पक्षियों के आने-जाने का रूट और लोकेशन की मिलेगी जानकारी बॉम्बे
भागलपुर, वरीय संवाददाता। बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (बीएनएमएस) व वन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में बिहपुर के घटोरा वेटलैंड में शुक्रवार को ग्रेलैग गूज प्रवासी पक्षी को जीपीएस-जीएसएम टैग लगाया गया। सोसाइटी ने बिहार में प्रवासी पक्षियों की गतिविधि के अध्ययन के लिए इस डिवाइस को जलपक्षियों में लगाने की प्रक्रिया शुरू की है। बीएनएमएस के उप निदेशक डॉ. पी. सत्यसेल्वम व टीम के सदस्य परियोजना सहयोगी खुशबू रानी, वरिष्ठ शोधकर्ता वर्तिका पटेल और शोधकर्ता अभिलाष के साथ मिलकर यह टैगिंग की। टीम के अनुसार लोकेशन को जानने के लिए पक्षियों की पीठ पर उपकरण को फिट किया गया। इस उपकरण के माध्यम से पक्षियों के लोकेशन का आसानी से पता चलता है।

साथ ही इनके देश में आने व जाने के रूट की जानकारी मिलती है। इस वर्ष फरवरी माह में भी दो हेडेड गूज को जीपीएस-जीएसएम टैग किया गया था। इनमें से एक पक्षी का लोकेशन जमुई के नागी जलाशय में मिला है। जून में यह तिब्बत के आसपास था। यह उपकरण सोलर पैनल से जुड़ा रहता है। इसमें एक बैट्री भी रहती है। जीपीएस-जीएसएम टैग एक उन्नत उपकरण है। ग्रेलैग गूज के व्यवहार को समझा जाएगा टीम के सदस्यों ने बताया कि पक्षियों के अनुसंधान को आगे बढ़ाने और आर्द्रभूमि संरक्षण की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। इस पहल का उद्देश्य इस क्षेत्र में आने वाले प्रमुख शीतकालीन प्रवासी पक्षी ग्रेलैग गूज की वास्तविक समय की गतिविधियों और प्रवासन पैटर्न की निगरानी करना है। यह रूस, मंगोलिया, चीन व तिब्बत का मूल निवासी है। इस उपकरण के माध्यम से उत्पन्न उच्च-रिजॉल्यूशन ट्रैकिंग डेटा इस प्रजाति के व्यवहार, आवास उपयोग और मौसमी गतिविधियों की समझ में योगदान देगा। ऐसी जानकारियों से घटोरा वेटलैंड और अन्य महत्वपूर्ण जलपक्षी आवासों के सूचित संरक्षण योजना और बेहतर प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की उम्मीद है। बीएनएचएस की ओर से वेटलैंड के ईकोसिस्टम और उन पर निर्भर विविध प्रजातियों के संरक्षण के लिए बिहार वन विभाग के साथ मिलकर काम जारी है। ठंड में प्रवासी पक्षियों का जमावड़ा प्रवासी पक्षी हिमालय क्षेत्र को पारकर बिहार समेत उत्तरी भारत के राज्यों में आते हैं। पक्षियों के मूल स्थान पर इस समय बर्फबारी शुरू हो गई है। वहां पर पक्षियों को भोजन, पानी व आवास की समस्या होने लगती है। इस समस्या से बचने के लिए हर साल लाखों प्रवासी पक्षी धरती के इक्वेटर यानी मध्य भाग की ओर पलायन करने लगते हैं। हिमालय पार करते ही बिहार में प्रवासी पक्षी अच्छी संख्या में उतरते हैं। खासकर भागलपुर, बांका, कटिहार, जमुई समेत आसपास के कई जिलों के जलाशयों के आसपास अप्रैल तक प्रवास करते हैं। भागलपुर में गंगानदी स्थित विक्रमशिला गंगेटिक डॉल्फिन सेंचुरी, कोसी नदी के आसपास व नवगछिया अनुमंडल के कई झीलों में रुकते हैं।

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