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भगवान की पूजा में भाव का महत्व है : चिन्मयानंद

प्रखंड कार्यालय के मैदान में श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में हरिद्वार से आए राष्ट्रीय संत स्वामी चिन्मयानंद बापू ने लगातार मंगलवार की रात में कथा का वाचन करते हुए कहा कि भगवान की पूजा में भाव का बड़ा महत्व है। भगवान भक्तों के भाव को देखते हैं,आडंबर को नहीं। बिना भाव के भक्ति और पूजा नहीं होती है।

स्वामी जी ने कहा कि जिस समय कृष्ण ने गोपिकाओं के वस्त्र को कदंब के पेड़ पर छुपा दिया था,उस समय उनकी उम्र मात्र साढ़े छ:साल की थी। अध्यात्म की दृष्टि से कृष्ण परमात्मा के अवतार हैं ओर संसार के स्त्री और पुरूष सभी उनकी संतान के समान हैं।

कृष्ण के वस्त्र चुराने और फिर दे देने का अर्थ कुछ और है। गोपिकाओं की अविद्या ले ली गई और विद्या दी गई। फिर बापू ने कालिया नाग और गोवर्द्घन पर्वत के प्रसंगों की मार्मिक प्रस्तुति की। बचपन में कृष्ण अपने ग्वाल -बाल सखा के साथ खेल रहे थे और गेंद एक तालाब में चला गया था। वहां विशाल काय कालिया नाग था। कृष्ण वहां तैर कर चले गए तो सखा,माता यशोदा और सारे ब्रज वासी चितिंत हो गए। मगर कालिया को उन्होंने मार दिया। इसका अर्थ हुआ कि लोहा लोहे को काटता है और जहर से जहर मिटती है। कृष्ण ने इन्द्र के द्वारा गोवर्द्घन पर्वत ओर ब्रज वासी के घोर यमुना के बाढ़ में डूबने को ले कर अपनी एक उंगली पर पर्वत को उठा लिया था। अंत में इंद्र को अपनी भूल मालूम पड़ी। कृष्ण ही पहले पर्यावरण वादी थे,जिन्होंने जगलों के काटे जाने तथा पर्वतों के नहीं तोड़े जाने का संदेश दिया था। पर्वत और वनों के कारण ही वर्षा होती है और सृष्टि में जीवों के जीवन की सुरक्षा होती है। गिटार पर मुन्ना, वायलिन पर रामशरण, पैड पर अजय कुमार, बैंजो पर वकील, नाल गणेश एवं हारमोनियम पर अभिराम ने इन भजनो व कथा को और मधुर बना दिया था।

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  • Web Title:God has the importance of expressions in worship: Chinmayananda