
प्रवासी भारतीय और भारत का आर्थिक विकास विषय पर परिचर्चा
जमुई में प्रवासी भारतीय दिवस की पूर्व संध्या पर 'प्रवासी भारतीय और भारत का आर्थिक विकास' विषय पर परिचर्चा आयोजित की गई। डॉ. गौरी शंकर पासवान ने कहा कि प्रवासी भारतीय देश की अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं और उनका योगदान सराहनीय है। उन्होंने रेमिटेंस के महत्व और प्रवासी भारतीयों की भूमिका पर भी प्रकाश डाला।
जमुई। प्रवासी भारतीय दिवस की पूर्व संध्या पर "प्रवासी भारतीय और भारत का आर्थिक विकास" विषय पर नगर परिषद स्थित आनंद विहार कॉलोनी श्रीचंद नवादा में एक परिचर्चा आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता अर्थशास्त्र के वरीय सहायक प्राचार्य डॉ. गौरी शंकर पासवान ने की। प्रो.पासवान ने अपने अध्यक्षीय प्रबोधन में कहा कि प्रवासी भारतीय भारत की सभ्यता और संस्कृति के राजदूत हैं। ये भारतीय अर्थव्यवस्था के अदृश्य स्तंभ, आर्थिक विकास विकास के सहभागी हैं। प्रवासी भारतीयों का देश के आर्थिक विकास में बहुआयामी योगदान है। उन्होंने कहा कि प्रवासी भारतीय दिवस मनाने ने की शुरुआत भूतपूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई ने की थी, जिसका उद्देश्य भारत में प्रवासी भारतीयों के योगदानों को सम्मान देना तथा विविध सुविधाऐं प्रदान करना है।
दूर विदेश में रहकर भी जिसका दिल देश के लिए धड़कता है, वही सच्चा प्रवासी भारतीय है। उन्होंने कहा कि प्रवासी भारतीयों द्वारा भेजी जाने वाली विदेशी रेमिटेंस अर्थात धनराशि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। विश्व बैंक के अनुसार भारत विश्व में सबसे अधिक रेमिटेंस प्राप्त करने वाला देश है। प्रवासी भारतीययों ने वित्तीय वर्ष 2024 में 135.46 बिलियन डॉलर (11,20, 000 करोड़) से अधिक रेमिटेंस भेजी है, जो एक रिकॉर्ड है.प्रवासी भारतीय वैश्विक मंच पर भारत की सशक्त पहचान का प्रतीक है। केंद्र सरकार को राष्ट्रीय प्रवासी भारतीय आयोग का गठन करना कर उनकी समस्याओं का समाधान और विविध सुविधाऐं प्रदान करने आवश्यकता है। डॉ.निरंजन कुमार दुबे ने कहा कि प्रवासी भारतीय दुनिया में भारत की सकारात्मक छवि को मजबूती देते हैं। प्रवासी भारतीय दिवस का प्रथम आयोजन 9 जनवरी 2003 में की गई थी। यह दिवस 9 जनवरी 1915 को महात्मा गांधी द्वारा दक्षिण अफ्रीका से भारत आगमन के परिप्रेक्ष्य और सम्मान में हर वर्ष 9 जनवरी को मनाया जाता है। डॉ.डीके गोयल ने कहा कि प्रवासी भारतीयों का देश के विकास में काफी योगदान है। प्राकृतिक आपदा काल में प्रवासी भारतीयों ने हमेशा भारत के प्रति अपना दायित्व निभाया है। कॉविड 19 के समय में भी उन्होंने भारत को काफी सहायता की है। प्रो. संजीव कुमार सिंह ने कहा कि प्रवासी भारतीय अतीत की जड़ों, वर्तमान की जिम्मेदारियों और भविष्य की संभावनाओं के बीच एक मजबूत सेतु का काम करते हैं। प्रवासी भारतीय देश को सबसे ज्यादा विदेशी धनराशि देश में भेजते हैं। अधिवक्ता रामचंद्र रवि ने कहा कि प्रवासी भारतीय दिवस हमें स्मरण करता है कि भारत केवल एक भूखंड नहीं, बल्कि एक वैश्विक भावना है जिसे प्रवासी भारतीय अपने कर्म, चरित्र और योगदान से निरंतर सशक्त बना रहे हैं। प्रो. सरदार राय ने कहा कि प्रवासी भारतीय के तीन पूंजी हैं- ज्ञान ,श्रम और संस्कार जिसके बल पर विदेश में देश का नाम रोशन कर रहे हैं। विश्व में प्रवासी भारतीयों की संख्या लगभग 35.42 मिलियन यानी 3.5 करोड़ से अधिक है। प्रवासी भारतीयों द्वारा धनप्रेषण भारत के विकास में सहायक सिद्ध हो रहा है। निवेश, विदेशी मुद्रा, कौशल, वैश्विक प्रतिनिधित्व और रेमिटेंस के रूप में उनका योगदान सराहनीय है। प्रो.अमोद प्रबोधी उर्फ अमोद सिंह ने कहा कि प्रवासी भारतीय संस्कृति और सभ्यता के सबसे बड़े प्रचारक हैं। यह दुनिया के कोने कोने में भारतीय भाषा, योग, आयुर्वेद, संगीत और त्योहारों को जीवंत बनाए रखते हैं। विदेशी धरती भारतीय संस्कार, यही है एनआरआई का संसार।

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