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मछुआरों के जाल में फंसी 'गंगा की गाय' डॉल्फिन को प्रयासों के बावजूद नहीं बचाया जा सका

Gangas cow Dolphin trapped in trap of fishermen could not be saved despite efforts

राष्ट्रीय संरक्षित जलीय जीव डॉल्फिन बुधवार की अहले सुबह बाढ़ के पानी में भटकते हुए लखीसराय के किऊल नदी में पहुंच गई। चानन प्रखंड के बंशीपुर घाट किनारे जाल में मिली इस डॉल्फिन को पहले समुद्री मछली समझ ग्रामीण गांव ले आए, लेकिन बाद में पर्यावरणविद् और विशेषज्ञों से गाइडेंस मिलने के बाद वन विभाग की टीम ने रेस्क्यू करते हुए उसे किऊल नदी में छोड़ा। हालांकि इन कोशिशों के बावजूद डॉल्फिन को बचाया नहीं जा सका। शाम को लखीसराय के सूर्यनारायण घाट पर वह मछुआरों को मृत अवस्था में मिली। फिलहाल मृत डॉल्फिन को नगर थाने में रखा गया है।
 
दलअसल बुधवार की सुबह बंशीपुर नदी घाट में मछुआरों द्वारा लगाए गए जाल में डॉल्फिन फंस गई। उसे खुटूकपार के सरपंच रामचंद्र यादव व ग्रामीणों के सहयोग से बंशीपुर में गड्ढा खोदकर पानी भरकर करीब दो घंटे तक सुरक्षित रखा गया। डीएम एसके चौधरी तक सूचना पहुंचने के बाद सुबह 10:30 बंशीपुर नदी घाट पर पहुंचे वन क्षेत्र पदाधिकारी संजीव कुमार, वनपाल एस के सोरेन को ग्रामीणों ने डॉल्फिन को सौंप दिया।

डॉल्फिन मिले, तो हिंसक बर्ताव न करें: विशेषज्ञ
डॉल्फिन से अंजान लोग अमूमन इसे विशालकाय मछली या समुद्री मछली समझ लेते हैं, जबकि यह उनसे अलग एक स्तनपायी जलीय जीव है। यह किसी को हानि नहीं पहुंचाती और इसे पवित्र भी माना जाता है। डॉल्फिन संरक्षण पर काम कर चुके पटना निवासी साइंटिस्ट गोपाल शर्मा ने बताया कि डॉल्फिन के साथ हिंसक व्यवहार नहीं करना चाहिए। वह पानी से बाहर 10-12 घंटे भी जीवित रह सकती है, लेकिन शरीर के ताप नियंत्रण के लिए उसपर लगातार पानी के छींटे मारते रहना चाहिए। यहां लोगों ने डॉल्फिन के मुंह को बांध दिया था। श्री शर्मा ने ऐसा करने से मना किया। इधर, मंदार नेचर क्लब के अरविंद मिश्रा ने कहा कि कानून के मुताबिक डॉल्फिन मारना उसका मांस या तेल रखना या इस्तेमाल करना प्रतिबंधित है और इस अपराध के लिए कम से कम छह हजार जुर्माना और छह वर्ष तक की सजा हो सकती है।

वन क्षेत्र पदाधिकारी ने बताया कि बंशीपुर नदी घाट से ट्रैक्टर पर लादकर तीन किलोमीटर दूर किऊल नदी के खैरी घाट में तेज धार में डॉल्फिन को छोड़ा गया। उन्होंने बताया कि किऊल नदी का गंगा से जुड़ाव है, इसलिए डॉल्फिन ज्यादा पानी के बहाव से पहुंच गई होगी।

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