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गांधीवादियों का दर्द ना जाने कोय: नेताओं ने गांधी का नाम अपनाया, विचारों को भूले

lok sabha election 2019  pain of gandhian in bhagalpur

लोकसभा चुनाव के बिगुल बजने के साथ ही एक बार फिर से राजनीतिक पार्टियों के लिए गांधी ब्रांड बने हुए है। गांधी टोपी और खादी कपड़े पहनकर गांधी के आदर्शो की बात करने वाले नेता भी दिख जायेंगे।

 गरीब, किसान, मजदूर की बात होगी। मगर सवाल है कि क्या गांधी भारतीय राजनीति में सिर्फ ब्रांड भर हैं या फिर गांधी का आदर्श भी दिखता है। गांधी विचारकों का मानना है कि गांधी के आदर्शों से नेता डरते हैं। गांधी के आदर्श और विचार क्रांति और विकल्प के रास्ते पर ले जाते हैं। 

राजनीति में सिर्फ गांधी के नाम का इस्तेमाल किया जाता है
गांधी विचार विभाग के प्राध्यापक और गांधीवादी विचारक विजय कुमार बताते हैं कि राजनीति में सिर्फ गांधी के नाम का इस्तेमाल किया जाता है। राजनीतिक पार्टियां ब्रांड के रूप में इस्तेमाल कर चुनाव के बाद फिर भूल जाती हैं। जबकि उनके आदर्शो का एक प्रतिशत भी अगर लागू किया जाये तो समाजिक और राजनीतिक स्तर पर बड़ा बदलाव दिखेगा। 1983 से गांधी का किरदार निभाने वाले कलाकार व समाजसेवी विजय झा गांधी बताते हैं कि पंचायत से लेकर संसद तक गांधी तो दिखते हैं मगर उनके आदर्श नहीं दिखते। खादी और गांधी का इस्तेमाल राजनीतिक रोटी सेंकने में होता है। उन्हें वोटर यानि जनता की ताकत का पता था। उन्होंने कहा था कि देश की जनता जितनी सजग होगी। देश का विकास उतना ही अधिक होगा। 

गांधी का नाम लिये बिना राजनीति नहीं
तिलकामांझी भागलपुर यूनिवर्सिटी के अंतर्गत 37 सालों से चल रहे स्नातकोत्तर गांधी विचार विभाग के संस्थापक अध्यक्ष, गांधी विचारक और पूर्व सांसद प्रो. डॉ. रामजी सिंह ने कहा कि गांधीजी का नाम लिये बिना राजनीति नहीं हो सकती है। युवाओं को गांधी को समझने की जरूरत है। तभी सामाजिक और राजनीति बदलाव की बात की जा सकती है।

क्या है खादी 
खादी सिर्फ कपड़ा या तकनीक का बहिष्कार नहीं था। बल्कि देश की महिलाओं और युवाओं को स्वावलंबन की तरफ ले जाने की योजना थी। इसे राजनीतिक चश्मे से देखते-देखते लोगों ने खादी और उसके व्यवसाय को पूरी तरह से बर्बाद कर दिया। 

देश को जानने की जरूरत 
गांधी विचार विभाग के एचओडी परमानंद सिंह बताते हैं कि गांधीजी ने कहा था कि देश सेवा से पहले देश को जानें। गांव जाकर लोगों की समस्या सुने तभी  विकास का रास्ता निकल पायेगा। मगर अब ऐसा नहीं दिखता है। 

किसान और युवाओं की समस्या गौण
विजय झा गांधी बताते हैं कि देश की तरक्की के लिए किसान व युवा की समस्या का निदान होना चाहिए। मगर अभी देश में यह बड़ी समस्या है। बेरोजगारी और किसानों के आत्महत्या करने का सिलसिला थम नहीं रहा है। 

बुनियादी शिक्षा नहीं सुधरी
विजय कुमार बताते हैं कि गांधी जी ने हमेशा बुनियादी शिक्षा पर जोर दिया था। उन्होंने लर्निंग वाय डूइंग का उदाहरण दिया था। मगर वर्तमान स्थिति में बुनियादी शिक्षा की दिशा में काफी गिरावट आयी है। 

नैतिकता में आयी गिरावट
गांधी विचार विभाग से पढ़े उमेश प्रसाद नीरज बताते है कि गांधी की राजनीति नैतिकता की बात करती है। जबकि राजनीति में सबसे पहले नैतिकता में ही गिरावट आयी है। सारी ताकत स्वराज पर निर्भर की गांधी ने बात की है। 

इन किताबों को पढ़ना है जरूरी 
’  हिंद स्वराज ’  सत्य के साथ मेरे प्रयोग 
’  दक्षिण अफ्रीका के सत्याग्रह का इतिहास  
 

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  • Web Title:Gandhians Pain: Leaders adopted Gandhis name but forgot his thoughts