
फ्लोराइड की अधिकता से मुंगेर में रहस्यमय बीमारी से हुई थी मौतें
टेटिया बंबर की गंगटा पंचायत के दूधपनिया गांव में हो रही थी मौतें हर
भागलपुर, मुख्य संवाददाता। मुंगेर के दूधपनिया गांव में रहस्यमय बीमारी से हो रही मौतों के कारणों का पता लग गया है। टेटिया बंबर प्रखंड की गंगटा पंचायत के इस गांव के पानी में फ्लोराइड की अधिकता के कारण ही लोग कम उम्र में अपंग हो रहे थे और 40-50 साल की उम्र आते-आते मौत के शिकार हो रहे थे। मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (पीएचईडी) के वरिष्ठ अभियंताओं की जांच में पाया गया कि गांव के दूषित पानी को साफ करने के लिए जिस एजेंसी को काम दिया गया था। उसकी मशीन खराब थी। पीएचईडी भागलपुर के क्षेत्रीय मुख्य अभियंता ने दूधपनिया गांव की रिपोर्ट विभाग को दी।
जिसके आधार पर विभाग ने एजेंसी को ब्लैक लिस्ट कर दिया है। अभियंताओं की टीम ने जांच में पाया कि हर घर नल का जल योजना का पानी बगैर जांच के सप्लाई हो रहा था। दूधपनिया गांव नक्सल प्रभावित है। यहां आदिवासियों की संख्या अधिक है। वर्षों से पानी के सेवन से कई बच्चे जवानी चढ़ते-चढ़ते अपंग हो जाते हैं और यहां पुरुष जवानी में बूढ़े जैसे दिखने लगते हैं। अभियंताओं की टीम ने जब बीमार लोगों से बात की तो पता चला कि हड्डियों और मांसपेशियों से जुड़ीं समस्याएं उनलोगों को परेशान कर रही है। मुख्य अभियंता प्रसून कुमार ने बताया कि लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण अंचल, मुंगेर के अधीक्षण अभियंता द्वारा की गई जांच में संवेदक के स्तर से बरती गई लापरवाही तथा एकरारनामा एवं विभागीय निर्देश के उल्लंघन से संबंधित तथ्य परिलक्षित होने के बाद एजेंसी को बिहार ठेकेदारी निबंधन नियमावली- 2007 के तहत काली सूची में दर्ज करने के लिए विभाग से अनुशंसा की गई थी। विभाग ने एजेंसी से इस मामले में स्पष्टीकरण मांगा तो एजेंसी ने जवाब दिया कि एकरारनामा में निहित शर्तों एवं प्रावधानों के अनुरूप ही योजना के रख-रखाव संबंधी कार्य किया जा रहा है। अधीक्षण अभियंता की रिपोर्ट में बताया गया कि योजना के रॉ वाटर एवं ट्रीटेड वाटर के सैंपल की जांच जिला जांच प्रयोगशाला में कराने पर यह पाया गया कि फ्लोराइड लेवल की मात्रा पेयजल के अनुमान्य सीमा से अत्यधिक है। इससे स्पष्ट हो गया कि एजेंसी द्वारा हर घर नल का जल के तहत एकरारनामा के अनुरूप योजना के परिचालन एवं रख-रखाव में लापरवाही बरती गई है। विभाग ने एजेंसी के स्पष्टीकरण को स्वीकार्य योग्य नहीं माना और तीन साल के लिए एजेंसी को कालबाधित कर दिया है। क्या है मामला दूधपनिया गांव की आबादी 200 के करीब है। यहां के लोग पैर और कमर से लाचार हैं। कई लोग जवानी में ही लाठी के सहारे चलते हैं। मीडिया कर्मियों को यहां के लोगों ने बताया था कि बीमारी की शुरुआत 30 साल से शुरू होती है। पहले पैरों में दर्द फिर कमर में दर्द फिर क्रियाविधि धीरे-धीरे सबकी बंद हो जाती है। कुछ लोग तो इलाज के लिए पटना तक चले जाते हैं। बीते एक साल में में फुलमनी देवी (40), रमेश मुर्मू (30), मालती देवी (48), सलमा देवी (45), रंगलाल मरांडी (55) और नंदू मुर्मू (50) की मौत इसी बीमारी की वजह से हुई है। लोगों का कहना था कि पहले वे पहाड़ी झरने व कुएं का पानी पीते थे। उस दौरान समस्या कम थी लेकिन करीब 15 साल से जब सप्लाई का पानी मिलने लगा तब से कम उम्र में लोगों की मौतें होने लगी हैं। लखनऊ में होगी कटिहार के पानी की जांच कटिहार। पीएचईडी कटिहार के भूमिगत जल का सैंपल संग्रह कर जांच के लिए लखनऊ भेजेगा। कटिहार की एक शोध में पाया गया कि यहां स्तनपान कराने वाली माताओं के दूध में यूरेनियम मिला है। कटिहार के सिविल सर्जन डॉ. जितेंद्र नाथ सिंह ने बताया कि अगर किसी के शोध में हेल्थ हैजार्ड की बात सामने आयी है तो इस पर ध्यान देने की जरूरत है। सरकारी रिसर्च के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। स्वास्थ्य विभाग कटिहार में भी अपने स्तर पर भी यूरेनियम होने के कारणों का पता लगाएगा।

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