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हड्डी रोग विशेषज्ञ डा. मनोज चौधरी पर इलाज में लापरवाही का केस

हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. मनोज चौधरी के खिलाफ नौ साल के बच्चे के इलाज में लापरवाही के आरोप में गुरुवार को इशाकचक थाने में एफआईआर दर्ज की गई। अक्टूबर 2014 में हाथ टूटने के बाद डॉ. चौधरी ने बच्चे का इलाज किया था। आरोप है कि गलत तरीके से इलाज करने के कारण उसके हाथ में मवाद बनने लगा और आखिरकार हाथ काटना पड़ गया। डॉक्टर ने इलाज का चिट्ठा भी रख लिया था। गोराडीह प्रखंड के घीया गांव के निरंजन मंडल ने मंगलवार को डीआईजी से मिलकर डॉक्टर की शिकायत की थी और डीआईजी विकास वैभव के निर्देश पर जांच के बाद मामला दर्ज किया गया। इसके साथ ही अब एक मेडिकल बोर्ड भी जांच करेगी कि इलाज में किस तरह की लापरवाही बरती गई है?हालांकि, डा. मनोज चौधरी ने इशाकचक पुलिस पर एकतरफा कार्रवाई का आरोप लगाया है। कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार इस मामले में डॉक्टर का पक्ष लेना जरूरी था। डीआईजी को सुनाई थी यह व्यथा बच्चे के पिता निरंजन मंडल ने मंगलवार को डीआईजी को बताया था कि 15 अक्टूबर 2014 को स्कूल में चापानल पर पानी पीने के दौरान गिरने से बेटे आकाश का हाथ टूट गया था। वह बाहर मजदूरी पर था, इसलिए पत्नी बुलो देवी ने कचहरी रोड स्थित डा. मनोज चौधरी से इलाज कराया। 2500 रुपये लेकर प्लास्टर कर दिया और आठ दिन बाद बुलाया। 24 अक्टूबर को चेकअप के बाद 15 दिन बाद बुलाया। उस दिन भी 3500 रुपये फीस ली थी। इसी बीच आकाश के हाथ में मवाद भर गया। कंपाउंडर अजित और चंदन ने इन्फेक्शन के कारण हाथ काटने की बात कही और हंगामा होने पर पुलिस भी पहुंची थी। बच्चे की हालत बिगड़ने पर डॉक्टर ने हाथ काट दिया। डॉक्टर ने कहा, ढाई साल बाद गलत आरोप लगा रहा परिवार डॉक्टर मनोज चौधरी ने कहा कि ढाई साल बाद परिवार वाले गलत आरोप लगा रहे हैं। हाथ में इंन्फेक्शन होने पर सही समय पर चेकअप नहीं कराया गया। पुलिस ने भी बिना जांच के ही एफआईआर दर्ज कर ली। वहीं, इशाकचक इंस्पेक्टर राम इकबाल यादव ने बताया कि डाक्टर के खिलाफ धारा 287, 338, 308/ 34 के तहत रिपोर्ट दर्ज की गई है और दारोगा जयप्रकाश यादव को जांचकर्ता बनाया गया है।

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  • Web Title:FIR against Dr. Manoj Chaudhary for negligence in treatment