किशनगंज: विद्यालयों में शुरू हुआ टीएएस-1 सर्वेक्षण अभियान
किशनगंज में फाइलेरिया उन्मूलन के लिए टीएएस-1 अभियान शुरू किया गया है। यह अभियान कक्षा 1 और 2 के बच्चों की फाइलेरिया संक्रमण की स्थिति का वैज्ञानिक आकलन करने के लिए है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें विद्यालयों में बच्चों के नमूनों की जांच कर रही हैं। जिला पदाधिकारी ने जनसहभागिता पर जोर दिया है।

किशनगंज से राकेश कुमार की रिपोर्ट फाइलेरिया एक ऐसा गंभीर मच्छरजनित रोग है, जो व्यक्ति को जीवनभर शारीरिक पीड़ा एवं सामाजिक कठिनाइयों का सामना करने के लिए विवश कर देता है। इस बीमारी के कारण शरीर के अंगों में असामान्य सूजन उत्पन्न हो जाती है, जिसे सामान्य भाषा में हाथीपाँव रोग भी कहा जाता है। वर्षों से चलाए जा रहे सामूहिक दवा सेवन अभियान के बाद अब किशनगंज जिला फाइलेरिया उन्मूलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश कर चुका है। इसी क्रम में जिले में टीएएस-1 अभियान प्रारंभ किया गया है। यह सर्वेक्षण इस बात का वैज्ञानिक आकलन करने के लिए किया जाता है कि जिले में फाइलेरिया संक्रमण का स्तर कितना कम हुआ है तथा बीमारी के प्रसार की श्रृंखला टूट रही है अथवा नहीं। विशेष रूप से कक्षा 1 एवं 2 के बच्चों की जाँच इसलिए की जाती है क्योंकि यह आयु वर्ग हालिया संक्रमण की वास्तविक स्थिति को दर्शाता है। यदि बच्चों में संक्रमण नहीं अथवा अत्यंत कम पाया जाता है, तो यह जिले के लिए फाइलेरिया उन्मूलन की दिशा में बड़ी उपलब्धि मानी जाएगी।
ठाकुरगंज को छोड़कर जिले के सभी प्रखंडों में शुरू हुआ टीएएस-1 अभियान
जिले में ठाकुरगंज प्रखंड को छोड़कर सभी प्रखंडों में टीएएस-1 अभियान प्रारंभ कर दिया गया है। अभियान के अंतर्गत चयनित सरकारी एवं निजी विद्यालयों में स्वास्थ्य विभाग की टीमों द्वारा कक्षा 1 एवं 2 के बच्चों की फाइलेरिया संक्रमण संबंधी जांच की जा रही है। प्रत्येक प्रखंड में गठित टीमों द्वारा विद्यालयों में पहुँचकर बच्चों के नमूने लिए जा रहे हैं। यह प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित एवं वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप संपन्न की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा निर्धारित लक्ष्य के अनुसार प्रत्येक मूल्यांकन इकाई (एव) में लगभग 1600 से 1800 बच्चों की जाँच की जाएगी।
विद्यालयों में पहुँची स्वास्थ्य टीम, बच्चों के नमूनों की हो रही वैज्ञानिक जांच
टीएएस-1 अभियान के तहत विद्यालय आधारित सर्वेक्षण के माध्यम से कम समय में अधिक बच्चों की जांच सुनिश्चित की जा रही है। प्रत्येक टीम प्रतिदिन एक विद्यालय में लगभग 40 बच्चों की जांच कर रही है। जांच के दौरान बच्चों के नमूने लेकर यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि उनके शरीर में फाइलेरिया संक्रमण के कोई संकेत मौजूद हैं अथवा नहीं। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि यह सर्वेक्षण भविष्य की स्वास्थ्य रणनीति तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। विद्यालयों में अभियान को लेकर बच्चों एवं शिक्षकों के बीच जागरूकता भी बढ़ाई जा रही है, ताकि अभिभावकों के बीच किसी प्रकार की भ्रांति उत्पन्न न हो तथा सभी बच्चे जांच में शामिल हो सकें।
प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों ने किया अभियान का निरीक्षण, गुणवत्ता पूर्ण जाँच का दिया निर्देश
अभियान के सफल संचालन को लेकर संबंधित प्रखंडों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों द्वारा विद्यालयों का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान जाँच प्रक्रिया, नमूना संग्रहण, बच्चों की उपस्थिति एवं अभिलेख संधारण की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने स्वास्थ्य टीमों को निर्देश दिया कि जाँच कार्य पूरी पारदर्शिता, गुणवत्ता एवं समयबद्धता के साथ संपन्न किया जाए। साथ ही विद्यालय प्रबंधन को अभियान में पूर्ण सहयोग देने तथा बच्चों की उपस्थिति सुनिश्चित करने को कहा गया।
“फाइलेरिया उन्मूलन जनसहभागिता से ही संभव” जिला पदाधिकारी विशाल राज
जिला पदाधिकारी विशाल राज ने जिलेवासियों से अपील करते हुए कहा कि फाइलेरिया उन्मूलन केवल स्वास्थ्य विभाग का दायित्व नहीं, बल्कि यह समाज से जुड़ा व्यापक जनस्वास्थ्य अभियान है। उन्होंने कहा कि बच्चों की जाँच पूरी तरह सुरक्षित प्रक्रिया है, इसलिए अभिभावक इसमें सहयोग करें तथा बच्चों को विद्यालय भेजना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि टीएएस-1 अभियान के माध्यम से जिले में संक्रमण की वास्तविक स्थिति का वैज्ञानिक आकलन संभव होगा, जिससे भविष्य में फाइलेरिया उन्मूलन की दिशा और अधिक मजबूत होगी। जिला पदाधिकारी ने स्वास्थ्य एवं शिक्षा विभाग को समन्वय के साथ अभियान को सफल बनाने का निर्देश दिया।
संक्रमण की श्रृंखला तोड़ने में टीएएस की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने कहा कि फाइलेरिया एक उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग है, जिसे सामूहिक प्रयासों एवं नियमित दवा सेवन से समाप्त किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि टीएएस-1 गतिविधि यह सुनिश्चित करने के लिए की जा रही है कि पूर्व में चलाए गए दवा सेवन अभियान का प्रभाव समुदाय में कितना पड़ा है। उन्होंने कहा कि यदि बच्चों में संक्रमण का स्तर अत्यंत कम पाया जाता है, तो यह किशनगंज जिले के लिए बड़ी उपलब्धि होगी।
“भविष्य की पीढ़ी को फाइलेरिया मुक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल”
वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. मंजर आलम ने कहा कि विद्यालय आधारित सर्वेक्षण के माध्यम से वैज्ञानिक ढंग से संक्रमण की स्थिति का आकलन किया जा रहा है। उन्होंने बताया सभी टीमों को आवश्यक प्रशिक्षण एवं दिशा-निर्देश प्रदान किए गए हैं, ताकि जाँच कार्य पूरी गुणवत्ता एवं पारदर्शिता के साथ संपन्न हो सके।उन्होंने कहा कि यह अभियान आने वाली पीढ़ी को फाइलेरिया मुक्त बनाने की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा। अभियान के सफलता के लिए सभी को प्रशिक्षित किया गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।


