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भागलपुर

नैनो तकनीक से तैयार खाद से बचेगा पानी, लहलहाएगी फसल

हिन्दुस्तान टीम,भागलपुरPublished By: Newswrap
Tue, 26 Jan 2021 03:27 AM
नैनो तकनीक से तैयार खाद से बचेगा पानी, लहलहाएगी फसल

भागलपुर। कार्यालय संवाददाता

खेतों में नैनो तकनीक से तैयार खाद न सिर्फ फसल की गुणवत्ता को बढ़ाएगी बल्कि पानी की मात्रा और मिट्टी की उर्वरा शक्ति को भी बचा कर रखेगी। बिहार कृषि विवि (बीएयू) ने इस तकनीक द्वारा खाद की तीन वेरायटी तैयार कर ली है। तीनों को पेटेंट कराने की प्रक्रिया चल रही है। भारत सरकार को भी इसकी जांच के लिए भेजा जाएगा। इस पर मुहर लगने के साथ ही बिहार के खेतों में नैनो तकनीक से उत्पादित खाद किसानों तक पहुंच जाएगी।

मृदा विज्ञान एवं कृषि रसायन विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. निंटू मंडल ने बताया कि नैनो तकनीक से तैयार खाद के कई फायदे हैं। एक हेक्टेयर में अगर 10 किलो यह खाद डालते हैं तो पांच बार की जगह एक बार ही पटवन करना होगा। अन्य खाद की तुलना में नैनो तकनीक से तैयार खाद की मात्रा भी कम लगती है। पर्यावरण को बचाती है। किसानों के लिए यह हर तरह से उपयोगी साबित होगी।

खाद के तीन वेरायटी के नाम अलग-अलग हैं। इसमें एमएनसीपीसी, नैनो पी, एनएसपी है। इसमें नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाशियम, जिंक है। जो मल्टी न्यूट्रेंड की तरह पौधे में जाएगा। रसायनिक खाद 100 ग्राम में 30 प्रतिशत ही पौधों में जाता है 70 प्रतिशत तक खराब हो जाता है। साथ ही रसायनिक खाद की वजह से शरीर में होने वाले हानिकारक बीमारियों से भी यह बचा कर रखेगा।

पांच जिलों में हो चुका है ट्रायल

बीएयू द्वारा नैनो तकनीक से तैयार खाद का ट्रायल पांच जिलों में हो चुका है। इसमें सबौर (भागलपुर), मुंगेर, शेखपुरा, किशनगंज और कटिहार शामिल है। वैज्ञानिक ने बताया कि बहुत ही अच्छा रिजल्ट आया है। उम्मीद की जा रही है कि जब किसान इसका उपयोग करना शुरू करेंगे तो फिर उन्हें भी वो फायदा दिखेगा। इस साल इसकी पूरी प्रक्रिया चल रही है।

चार कृषि संस्थान में होती है नैनो तकनीक की पढ़ाई

बीएयू कृषि आधारित शोध में नैनो तकनीक का जमकर इस्तेमाल कर रहे हैं। इस पर लगातार शोध के कार्य चल रहे हैं। देश में बीएयू के अलावा तीन अन्य कृषि संस्थानों में ही नैनो तकनीक से पढ़ाई होती है। इसमें दिल्ली स्थित पूसा कृषि संस्थान, पंजाब एग्रीकल्चरल विश्वविद्यालय लुधियाना, तमिलनाडु विश्वविद्यालय शामिल हैं।

बयान

कृषि आधारित कामों में नैनो तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। खाद पर काम चल रहा है। इसके अलावा भी कई शोधार्थी विभिन्न विषयों के साथ शोध कार्य से जुड़े हुए हैं। आने वाले दिनों में कृषि कार्यों में नैनो तकनीक आधारित उत्पाद का किसान उपयोग करेंगे। इससे लाभ और उत्पादन में खर्च भी कम लगेगा।

डॉ. आरके सोहाने

प्रभारी कुलपति बीएयू

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