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भीषण ठंड व शीतलहर से मक्का फसल पर संकट, किसान चिंतित

भीषण ठंड व शीतलहर से मक्का फसल पर संकट, किसान चिंतित

संक्षेप:

बिहपुर में कड़ाके की ठंड और शीतलहर ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। मक्का की फसल में पीलापन और कीट प्रकोप के लक्षण देखे जा रहे हैं। किसानों का कहना है कि ठंड के कारण पौधों की वृद्धि रुक गई है। कृषि पदाधिकारी ने किसानों को आश्वस्त किया है कि ठंड से फसल को स्थायी नुकसान नहीं होगा।

Jan 10, 2026 01:39 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, भागलपुर
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बिहपुर, संवाद सूत्र। भीषण ठंड और शीतलहर ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। लगातार गिरते तापमान, घने कोहरे और धूप नहीं निकलने का सीधा असर बिहपुर प्रखंड क्षेत्र में लगी मक्का की फसल पर पड़ने लगा है। पाले के खतरे के बीच खेतों में खड़ी फसल में पीलापन, वृद्धि रुकना और कीट प्रकोप के लक्षण सामने आ रहे हैं, जिससे किसान चिंता में डूबे हैं। बिहपुर प्रखंड में इस वर्ष बड़े पैमाने पर गेहूं और मक्का की खेती की गई है। कड़ाके की ठंड और कभी-कभार ही धूप निकलने के कारण मक्का के पौधों का विकास प्रभावित हो रहा है।

किसानों के अनुसार ठंड के चलते पौधों की बढ़वार लगभग रुक गई है, जिससे भविष्य की उपज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। नारायणपुर प्रखंड के वीरबन्ना गांव के किसान सच्चिदानंद यादव ने बताया कि लगातार दो सप्ताह से ठंड बढ़ने के कारण मक्का के पौधों का विकास पूरी तरह रुक गया है। पौधों में पीलापन आ गया है और कीटों का प्रभाव भी दिखने लगा है। वहीं नगरपाड़ा गांव के किसान कुंवर सिंह ने कहा कि पाले के डर से वे नियमित रूप से सिंचाई कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद पौधों पर अपेक्षित असर नहीं दिख रहा है। लगभग दो माह के पौधों में केवल सात पत्ते ही आ पाए हैं, जो चिंता का विषय है। बिहपुर प्रखंड के मड़वा गांव के किसान अरुण सनगही और सोनवर्षा गांव के किसान चंद्रकांत चौधरी ने बताया कि ठंड के कारण पौधों का विकास स्थिर हो गया है। पौधों में कीड़ों का प्रभाव बढ़ रहा है और पत्तियों पर पीलापन साफ नजर आ रहा है। जमालपुर गांव निवासी किसान विनय कुमार सिंह ने बताया कि बीते दो सप्ताह से अत्यधिक ठंड के कारण मक्का की फसल का विकास बुरी तरह प्रभावित हुआ है। बचाव के लिए सिंचाई तो की जा रही है, लेकिन सिंचाई के बाद भी खेतों में कोई खास सुधार नहीं दिख रहा है। यही स्थिति बनी रही तो फसल तैयार होने तक लागत काफी बढ़ जाएगी और उपज में भारी गिरावट आएगी। पहले जहां एक बीघा में लगभग 100 मन मक्का की उपज होती थी, अब इसके घटकर करीब 70 मन तक रह जाने की आशंका है। साथ ही मक्का की फसल में हरदा रोग का भी असर देखा जा रहा है। किसानों की बढ़ती चिंता के बीच बिहपुर प्रखंड कृषि पदाधिकारी अमन निसार ने किसानों को आश्वस्त किया है कि ठंड से घबराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में गेहूं और मक्का की फसल को किसी प्रकार का स्थायी नुकसान नहीं हुआ है। ठंड के कारण पौधों का विकास जरूर धीमा हुआ है, लेकिन जैसे ही धूप निकलने लगेगी, पौधों की बढ़वार में तेजी आ जाएगी। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि फिलहाल एक एकड़ में एक किलो सल्फर का छिड़काव करें, जिससे पौधों में गर्मी आएगी और विकास को गति मिलेगी। साथ ही कीटों से बचाव के लिए उपयुक्त कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करने की भी सलाह दी गई है।

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