
बिहार में खाद की किल्लत, किसान 500 रु यूरिया और 1800 रु डीएपी खरीदने को मजबूर
खरीक में किसान, सरकारी दावे के बावजूद, यूरिया 500 रुपये और डीएपी 1800 रुपये तक ऊंचे दामों पर खरीदने को मजबूर हैं। बिना लाइसेंस के हो रही कालाबाजारी पर स्थानीय प्रशासन का उदासीन रवैया है, जिससे किसान अब मंत्री से मिलने की योजना बना रहे हैं।
एक ओर जहां सरकार किसानों की जरूरत के लिए बाजार में पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध होने का दावा कर रही है, वहीं खरीक क्षेत्र में ये दावे हवा-हवाई साबित हो रहे हैं। इस समय गेंहू, मकई और केले सहित अन्य फसलों में खाद देने का मुख्य समय है, लेकिन किसानों को खाद ऊंचे दामों पर खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा है। किसान बता रहे हैं कि यहां यूरिया 267 रुपये के सरकारी दाम के मुकाबले 500 रुपये में, और डीएपी 1,350 रुपये के सरकारी दाम के मुकाबले 1,700 से 1,800 रुपये में बेची जा रही है। एमओपी (MOP) और एनपीके (NPK) जैसी अन्य खादें भी ऊंचे दामों पर मिल रही हैं। जब किसान दाम कम करने की बात कहते हैं, तो दुकानदार उन्हें खाद देने से मना कर देते हैं।

प्रशासन का रवैया खराब
तेलघी के धीरज राय, मुकेश मंडल, शंभू झा और अरविंद चौधरी जैसे कई किसानों ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि फसल बचाने की मजबूरी में उन्हें महंगे दामों पर खाद खरीदनी पड़ रही है। किसानों का यह भी आरोप है कि कई दुकानदार बिना वैध लाइसेंस के खुलेआम खाद बेच रहे हैं, और इस पूरे मामले पर स्थानीय अधिकारियों तथा जनप्रतिनिधियों का रवैया उदासीन बना हुआ है।
हालांकि, बीडीओ मोना कुमारी सोनी ने बताया कि उन्हें इस मामले में अभी तक किसानों से कोई लिखित आवेदन नहीं मिला है, लेकिन वह इस मामले की स्वयं जांच करेंगी और दोषी पाए जाने वाले दुकानदारों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। महंगे दामों से परेशान किसान अब इस समस्या को लेकर संबंधित मंत्री से मिलने के लिए भी एकजुट हो रहे हैं।

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