Farmers in Karhariya South Face Crisis Due to Repeated Floods and Complex Policies बोले मुंगेर : फसल डूबी, मुआवजा रुका किसान भूख व कर्ज के शिकार, Bhagalpur Hindi News - Hindustan
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बोले मुंगेर : फसल डूबी, मुआवजा रुका किसान भूख व कर्ज के शिकार

बरियारपुर प्रखंड के करहरिया दक्षिणी पंचायत के किसान इस वर्ष बार-बार आई बाढ़ और सरकारी नीतियों के कारण संकट में हैं। 825 एकड़ में धान की फसल तीन बार बर्बाद हुई, जिससे 500 से अधिक किसान प्रभावित हुए।...

Newswrap हिन्दुस्तान, भागलपुरThu, 4 Sep 2025 04:32 AM
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बोले मुंगेर : फसल डूबी, मुआवजा रुका किसान भूख व कर्ज के शिकार

प्रस्तुति: गौरव कुमार मिश्रा

बरियारपुर प्रखंड के करहरिया दक्षिणी पंचायत के किसान इस वर्ष बार-बार आई बाढ़ और सरकारी नीतियों की जटिलताओं से गहरे संकट में हैं। करीब 825 एकड़ भूमि में धान की फसल तीन बार बाढ़ में बर्बाद हो गई, जिससे 500 से अधिक किसान और 250 बटायेदार प्रभावित हुए। उन्होंने कृषि इनपुट अनुदान के लिए आवेदन तो किया, लेकिन नए नियमों के चलते कई किसान मुआवजे से वंचित हैं। उदाहरण के लिए, पति-पत्नी या भाई-भाई के नाम से अलग-अलग जमीन होने पर भी सिर्फ एक को लाभ देने का प्रावधान किसानों के आक्रोश का कारण बन गया है। इसके अलावा खाद वितरण में कालाबाजारी और मनमानी ने उनकी परेशानियां और बढ़ा दी हैं।

बरियारपुर प्रखंड अंतर्गत करहरिया दक्षिणी पंचायत के किसानों पर इस वर्ष बाढ़ और सरकारी नीतियों की दोहरी मार पड़ी है। यह पंचायत कृषि प्रधान क्षेत्र है, जहां लगभग 500 किसान और 250 बटायेदार खेती से जुड़े हुए हैं। पूरे पंचायत में 825 एकड़ सिंचाई योग्य भूमि है, लेकिन बार-बार आई बाढ़ ने किसानों की मेहनत को पूरी तरह बर्बाद कर दिया। किसानों ने बताया कि पहली बार बुआई और रोपनी बाढ़ से ठीक एक सप्ताह पहले की गई थी। लेकिन मात्र सात दिन बाद ही बाढ़ का पानी पूरे खेतों में भर गया और फसल डूब गई। पानी घटने के बाद किसानों ने हिम्मत जुटाकर दूसरी बार रोपाई की, किन्तु कुछ दिनों में फिर से बाढ़ आ गई। तीसरी बार भी यही स्थिति बनी और पूरे 825 एकड़ में धान की फसल पूरी तरह नष्ट हो गई। किसानों का कहना है कि इस वर्ष की खेती उनके लिए अब तक की सबसे कठिन रही। लगातार बाढ़ के कारण उन्हें लगभग नाममात्र की पैदावार भी नहीं मिल सकी।

फसल बर्बाद होने के बाद किसानों की उम्मीदें कृषि इनपुट अनुदान-2025-26 पर टिकीं। पंचायत के करीब 550 किसानों ने आवेदन किया, लेकिन नए नियमों की वजह से अधिकांश को लाभ से वंचित कर दिया गया। पहले वंशावली और राजस्व रिपोर्ट के आधार पर रैयत और गैर-रैयत, दोनों तरह के किसानों को मुआवजा मिल जाता था। परंतु अब जिला कृषि पदाधिकारी ने आदेश दिया है कि केवल उन्हीं किसानों को अनुदान मिलेगा, जिनके नाम से भूमि की रसीद होगी। बटायेदार और बकायेदार किसानों को इस प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया, जिसके कारण उनकी स्थिति और खराब हो गई। इतना ही नहीं, नया प्रावधान पति-पत्नी या भाई-भाई जैसे नजदीकी परिजनों की अलग-अलग जमीन होने पर भी केवल एक को लाभ देता है। इसने न केवल कई किसानों को मुआवजे से बाहर कर दिया है बल्कि पारिवारिक विवाद की स्थिति भी पैदा कर दी है। किसानों का कहना है कि नई नीति गरीब किसानों और बटायेदारों को पूरी तरह नुकसान पहुंचा रही है। किसानों ने बताया कि 2024 की रबी और खरीफ सीजन में भी उन्हें आवेदन प्रक्रिया की त्रुटियों के चलते मुआवजा नहीं मिला था।

खाद की कालाबाजारी से जिले के किसान हलकान

फसल नुकसान के बाद किसानों को नई फसल की तैयारी के लिए खाद और बीज की सख्त जरूरत थी। लेकिन खाद वितरण में कथित मनमानी और कालाबाजारी ने उन्हें और परेशान कर दिया है। किसानों का आरोप है कि सरकारी दर 266 रुपये प्रति बोरी की यूरिया बाजार में 450 से 500 रुपये तक बेची जा रही है। जो किसान सरकारी दर पर खाद मांगते हैं, उन्हें सीधे इन्कार कर दिया जाता है। इस स्थिति से किसानों की लागत कई गुना बढ़ गई है और खेती घाटे का सौदा साबित हो रही है।

जनता की आवाज

कृषि इनपुट अनुदान के लिए ऑनलाइन आवेदन किया, लेकिन आवेदन रिजेक्ट हो रहा है जबकि पिछले साल हमें फसल क्षतिपूर्ति की राशि मिल गई थी।

-दीपक कुमार

कर्ज लेकर धान की रोपाई की, लेकिन बाढ़ आने से सारा फसल बर्बाद हो गया। अब तक फसल क्षति मुआवजा भी नहीं मिला। हमलोग परेशान हैं।

-बंटी कुमार

धान की रोपाई के एक सप्ताह बाद ही बाढ़ आ गई और फसल नष्ट हो गया। किसान सलाहकार बताते हैं कि केवल उसी को मुआवजा मिलेगा जिसके नाम से जमीन की रसीद है।

-किशोर मंडल

पंचायत में लगभग 95 प्रतिशत किसानों के नाम से जमीन नहीं है, बल्कि पूर्वजों के नाम पर है। ऐसे में हम सब मुआवजा से वंचित हो जाएंगे।

-कारे लाल ठाकुर

अगर पत्नी के नाम से जमीन है तो पति के खाते में मुआवजा नहीं मिलेगा। पति को फसल क्षति मुआवजा से वंचित कर दिया जाएगा। जिससे परेशान हैं।

-सुधांशु शेखर

परिवार में केवल एक ही सदस्य को मुआवजा मिलेगा, बाकी सदस्य वंचित रह जाएंगे। इससे किसानों में गहरा आक्रोश है। आगे की खेती पर संकट होगा।

-शालिग्राम सिंह

अब नया नियम यह है कि पति और पत्नी दोनों के नाम से जमीन हो तो भी परिवार के केवल एक ही व्यक्ति को मुआवजा मिलेगा। पहले वंशावली के आधार पर लाभ मिलता था।

-बलराम मंडल

समय पर खाद उपलब्ध नहीं होता। डीलर ब्लैक में महंगे दाम पर बेचते हैं। हम महंगे दाम पर खाद डालते हैं, बाढ़ आती है और फसल बर्बाद हो जाता है, फिर भी मुआवजा नहीं मिलता।

-मनोज चौधरी

डीलर खाद ब्लैक में बेचते हैं। वास्तविक कीमत 266 रुपये है लेकिन 450 से 500 रुपये में किसानों को खरीदना पड़ता है। इसकी जांच हो।

-जागो देवी

ऑनलाइन आवेदन करने के बाद भी किसानों के फॉर्म रिजेक्ट किए जा रहे हैं। जिम्मेदार हमारी समस्याओं का जल्द समाधन करने की दिशा में कदम उठाएं।

-वासुकी मंडल

अगर हमें मुआवजा नहीं मिला तो हम जिलाधिकारी कार्यालय का घेराव करेंगे। इसकी सारी जिम्मेदारी संबंधित विभाग की होगी।

-ओम प्रकाश चौधरी

कृषि सलाहकार बताते हैं कि केवल रसीदधारी को ही मुआवजा मिलेगा। परिवार में एक ही सदस्य को लाभ दिया जाएगा। इसके कारण परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

-ज्ञानी कुमार

पहले वंशावली के आधार पर किसानों को मुआवजा मिल जाता था, लेकिन अब नए नियम से किसान बेहद परेशान हैं। जिम्मेदार इसका समाधान करें।

-धर्मेंद्र मंडल

अब केवल उसी व्यक्ति को आवेदन करने की अनुमति है जिसके नाम से जमीन का रसीद है। इससे अनेक किसान मुआवजा से वंचित हो जाएंगे।

-सत्येंद्र कुमार

नए नियम से लगभग 70 प्रतिशत किसान मुआवजा से वंचित हो जाएंगे। जिससे वे आगे की खेती नहीं कर पाएंगे। इससे उनका परिवार परेशानी में पड़ जाएगा।

-अरविंद शर्मा

किसानों को चिंता है कि वे रसीद कहां से लाएं जबकि जमीन पुश्तैनी नाम पर है और उसी के आधार पर रसीद कटता था। इस समस्या का समाधान हो।

-गोपाल चौधरी

बोले िजम्मेदार

2025-2026 कृषि इनपुट अनुदान में नए नियम लागू होने से किसान परेशान हैं। आवेदन करने वाले किसानों के फॉर्म रिजेक्ट किए जा रहे हैं, जबकि पहले फसल क्षति मुआवजा वंशावली के आधार पर मिल जाता था। अब केवल उन्हीं किसानों को आवेदन की अनुमति है जिनके नाम से जमीन का रसीद है। इस कारण लगभग 95% किसान मुआवजा से वंचित हो जाएंगे।

-दुर्गेश सिंह, जिला परिषद

शिकायत

1. तीन बार आई बाढ़ ने धान की पूरी फसल बर्बाद कर दी, जिससे भारी आर्थिक क्षति हुई।

2. नए नियमों में केवल उन्हीं किसानों को लाभ दिया जा रहा है जिनके नाम से जमीन की रसीद है।

3. सैकड़ों बटायेदार और बकायेदार किसान मुआवजा से वंचित हैं।

4. पिछले वर्षों की तरह इस बार भी रसीद और दस्तावेज की त्रुटियों के कारण आवेदन हुए रिजेक्ट।

सुझाव

1. करहरिया दक्षिणी पंचायत के किसानों को विशेष राहत पैकेज दिया जाए।

2. कृषि इनपुट अनुदान और मुआवजा नीति को सरल बनाएं।

3. किसानों को वंचित न किया जाए, ग्राम स्तर पर सत्यापन और सहायता केंद्र बनाए जाएं।

4. सिंचाई और जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त हो, जिससे किसानों की फसल बर्बाद न हो।

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