
बोले जमुई : जंगली जानवरों ने छीनी किसानों की आजीविका
संक्षेप: अलीगंज प्रखंड के किसानों को नीलगाय और जंगली सूअरों के हमलों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनकी फसलें बर्बाद हो रही हैं। किसान खेती से मुनाफा नहीं कमा पा रहे हैं और कई पलायन को मजबूर हो रहे हैं। क्षेत्र में सिंचाई की व्यवस्था भी नहीं है, जिससे स्थिति और खराब हो गई है।
बोले जमुई : जंगली जानवरों ने छीनी किसानों की आजीविका

-प्रस्तुति: अविनाश कुमार
अलीगंज प्रखंड के किसानों के सामने नीलगाय और जंगली सूअरों का आतंक बड़ी समस्या बन गया है। इन जानवरों के झुंड खेतों में घुसकर फसलें बर्बाद कर देते हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। किसानों का कहना है कि लागत के अनुरूप खेती से अब मुनाफा नहीं मिल पा रहा है, ऊपर से जंगली जानवरों का उत्पात उनकी परेशानियों को और बढ़ा देता है। मजबूर होकर कई किसान खेती छोड़कर रोजगार की तलाश में परदेस का रुख कर रहे हैं। क्षेत्र में अब तक कोल्ड स्टोरेज की व्यवस्था नहीं हो सकी है, जिसके कारण सब्ज़ी और फलों जैसी जल्दी खराब होने वाली उपज समय पर सुरक्षित नहीं रह पाती।
लगातार दो वर्षों से सुखाड़ का दंश झेल रहे अलीगंज प्रखंड के किसान नीलगाय व जंगली सूअर के कारण खेती छोड़ पलायन को मजबूर हैं। किसान दिन-रात ,सर्दी-गर्मी,धूप-छांव की परवाह किए बैगर कड़ी मेहनत से अपनी खेतों में बुआई करते हैं। जब फसल तैयार होने की बारी आई तो नीलगाय का झुंड फसल को बर्बाद कर दे रहा है। हर तरफ नोनी-कैथा, डिहरी, महतपुर , धनार, ताजपुर चौरासा, बहछा अबगिला, दिननगर से लेकर भलुआना जंगल तक हर नीलगायों के झुंड का बोलबाला है। अपनी फसलों के बर्बादी का तमाशा देखकर भी किसान बेचारा बने है। विडंबना यह है कि नीलगायों से मुक्ति के लिए न ही जिला प्रशासन कुछ कर रहा है न ही वन विभाग। जबकि प्रखंड के किसान कई बार डीएम को इस समस्या को लेकर आवेदन दिया है। लेकिन अबतक कुछ संज्ञान नहीं लिया गया। कृषि विभाग भी नियमों का हवाला देकर उसे अपने हाल पर छोड़ दिया है। पहले नीलगाय आदमी को देखकर भाग जाता था। अब तो दिन भर रबी फसल मसूर, चना, मटर, गेहूं, खेसारी आदि फसलों में झुंड के झुंड में जाकर बर्बाद कर रहा है। यदि झुंड खेत में बैठ गया तो सभी फसल बर्बाद हो रहा है। इस क्षेत्र में कई फसल नीलगाय के कारण विलुप्त हो गए। डिहरी गांव के किसान मुकेश सिंह, नरेश सिंह, पप्पू सिंह, कृष्णनंदन सिंह, सुभाष चन्द्र सिंह, रामविलास यादव, अशोक पांडेय आदि किसानों ने बताया कि आज से पांच साल पहले हमारे गांव में मिर्च, सौंफ, धनिया, मेथी, मक्का की खेती खूब होती थी। किसानों का 10 कट्ठा मिर्च की खेती से सालों भर घर का खर्च पानी निकल जाता था, लेकिन नीलगाय के कारण अब किसान मसाला फसल की खेती छोड़ दिए। पहले नीलगाय इंसान को देखकर भाग जाता था।
पलायन को मजबूर किसान
अब अकेले पाकर इंसानों पर ही झुंड बनाकर हमला कर देता है। फसल में जब 50 नीलगायों का झुंड घुस जाएगा तो फसल की स्थिति क्या होगी हमारे गांव के अधिकांश किसान अब खेती छोड़ सूरत,दिल्ली चले गए। खेत में नीलगाय के कारण लागत के अनुरूप मुनाफा नहीं मिल पाता है। वहीं जंगली सूअर अलीगंज प्रखंड के दक्षिणी क्षेत्र में परेशानी का सबब बन गया है। इस संबंध में प्रखंड कृषि पदाधिकारी द्वारा बताया गया कि इस संबंध में हमलोग कुछ नहीं कह सकते। ऐसी ही समस्या को लेकर क्षेत्र के कई किसानों ने अपनी फसल की सुरक्षा के लिए बिजली के तार से खेत को घेरकर रात को करंट लगा दिया जाता है। इसी विधि से फसल की सुरक्षा करता है। जिसमें बिजली की चपेट में आने से आधा दर्जन से अधिक किसानों की मौत हो चुकी है। ऐसे कई मामले थाना तक नहीं आ पाता है।
कई किसानों की हो चुकी है मौत
नीलगाय से फसल बचाने के लिए लगाए गए बिजली के तार से अब तक कई किसानों की मौत हो चुकी है। अलीगंज प्रखंड के सभी 13 पंचायतों के किसान नीलगाय के आतंक से त्रस्त है। कभी मसाले की खेती के लिए प्रसिद्ध इस क्षेत्र की कई कीमती फसल नीलगाय के कारण विलुप्त हो गई। जिस किसान के पास बीघा-दो बीघा भी जमीन थी। इस फसल के कारण घर खर्चा तथा बच्चे की पढ़ाई हो जाती थी। लेकिन इन सात-आठ वर्षों में नीलगाय की आबादी इस क्षेत्र में इतनी बढ़ गई, कोई भी मसाला फसल होने नहीं दे रहा है। अब तो गांव पर भी आकर सब्जी कि खेती तथा किसानों द्वारा लगाई गई मक्का भी बर्बाद कर रहा है। डिहरी गांव के किसान विक्कु सिंह, आरईओ में कार्यरत बजेंद्र सिंह, शशि राम, मनोज सिंह, सुभाष चन्द्र कुमार ने बताया की हमलोग गांव के करीब अपने खेत में मकई तथा सब्जी की खेती की, लेकिन जब फसल तैयार होने को हुई तो नीलगाय का झुंड बर्बाद कर दिया।
हमारी भी सुनें
नई सरकार से उम्मीद है कि किसानों को इस समस्या से निजात दिलाए। किसानों को फसल की काफी क्षति हो जाती है। इससे आर्थिक नुकसान होता है।
-अर्जुन
अलीगंज प्रखंड के सभी 13 पंचायतों में एक भी नहर नहीं है। किसी तरह मेहनत कर उपज किया भी तो नीलगाय बर्बाद कर देती है।
-निलेश सिंह
नई सरकार से हमलोगों को काफी उम्मीद है। जिस आशा और विश्वास के साथ जनमत मिला है। उस पर सरकार को खड़ा उतरना चाहिए।
-संजीव कुमार
नई सरकार से हमलोगों को काफी उम्मीद है। अलीगंज की धरती में बहुत उर्वरा शक्ति है। यहां की 80 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है।
-रंजीत सिंह
नीलगाय की वजह से बहुत हानि होती है। हमलोग कई बार स्थानीय जनप्रतिनिधि से इस समस्या के बारे में बात की। समाधान नहीं निकला।
-कृष्णमुरारी
प्रखंड के सभी पंचायत नीलगाय के प्रकोप से आक्रांत है। सिंचाई का कोई समुचित प्रबंध नहीं है। इससे उपज का लाभ नहीं मिल पाता है।
-डब्लु कुशवाहा
नई सरकार को हमलोग के क्षेत्र पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। प्रत्येक वर्ष नीलगाय की वजह से लाखों रुपये की क्षति होती है।
-हरेराम यादव
इस क्षेत्र की सिंचाई बहुत बड़ी समस्या है। धान की फसल एक पानी के बिना अधिकांश गांव में सूख गई। इससे किसानों को आर्थिक क्षति हुई है।
-नीतीश
हमारा गांव प्याज उपज के लिए मशहूर था। यहां के अधिकांश किसान प्याज की खेती करते थे, पर नीलगाय के वजह से खेती छोड़ पलायन को मजबूर हैं।
-जयनाथ
नीलगाय के कारण खरीफ तथा रबी दोनों फसल प्रभावित हो रही है। नई नवनिर्वाचित विधायक इस समस्या का समाधान करें।
-संजीव कुमार
यहां की खेतों में तीन हजार रुपये प्रति किलो प्याज का बीज डाल दिए। पर कृषि फीडर में लो वोल्टेज के कारण काफी परेशानी हो रही है।
-वीणा कुमारी
हमारे यहां की प्रमुख फसल मिर्च, धनिया, सोफ जमाइन तथा मंगरैला होता था जो अब नीलगाय के कारण विलुप्त हो गई। पलायन को मजबूर हैं।
-धीरज कुमार
जब सब्जी के पौधे फल देने लायक होता है तो नीलगाय बर्बाद कर दे रहा है। जिससे हमलोग अब सब्जी की खेती करना छोड़ दिये। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान हो रहा है।
-प्रियंका कुमारी
सब्जी की खेती में परेशानी तथा मेहनत बहुत अधिक है। जब पौधे फल देने लायक होता है नीलगाय का झुंड खेत को बर्बाद कर दे रहा है। सरकार को कोई ठोस कदम उठाना चहिए।
-विजेन्द्र
सरकारी उपेक्षा के चलते पूरे अलीगंज प्रखंड में पटवन तथा नीलगाय बहुत बड़ी समस्या है। इन दोनों समस्याओं के कारण किसानों को हर वर्ष लाखों का नुकसान हो रहा है।
-मुकेश
हर वर्ष खेती में हजारों का खर्च होता ,लेकिन लागत के अनुरूप मुनाफा नहीं मिल रहा है। अलीगंज प्रखंड के सभी 13 पंचायत में पटवन एक गंभीर समस्या है। स्थायी समाधान ढूंढना चाहिए।
-कुमार चंचल
बोले जिम्मेदार
नीलगाय और जंगली सूअरों के विरुद्ध कार्रवाई करना अधिकार क्षेत्र से बाहर है। किसानों की इस गंभीर समस्या को लेकर शीघ्र ही वरीय पदाधिकारियों से बातचीत की जाएगी, ताकि उचित समाधान निकाला जा सके। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि सरकार की ओर से इस संबंध में कुछ दिशानिर्देश जारी किए गए हैं, लेकिन उनकी वास्तविक जानकारी अभी स्थानीय स्तर पर स्पष्ट नहीं है। प्रशासन ने किसानों से सहयोग बनाए रखने की अपील की है।
छोटेलाल चौधरी, बीएओ, अलीगंज
शिकायत
1. किसानों को जंगली जानवरों से मुक्ति दिलाने में सरकार समुचित ध्यान नहीं दे रही है।
2. फसल मुआवजा के लिए भी कई बार किसान पदाधिकारी से मिले, कोई पहल नहीं की गई।
3. नियमों का हवाला देकर पदाधिकारी पल्ला झाड़ ले रहे हैं। किसानों की जान तो चली गई लेकिन प्रशासन मूकदर्शक बना रहा। अबतक नीलगायों से मुक्ति के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई।
4. किसानों की मजबूरी है कि दूसरे राज्यों में पलायन कर रहे हैं।
सुझाव
1. सरकार को इस पर पहल कर मुक्ति दिलाने का प्रयास करना चाहिए, जिससे किसानों का राहत मिल सके।
2. फसल क्षति का मुआवजा से किसानों को राहत मिल सकती है। इस पर सरकार को पहल करनी चाहिए।
3. नीलगाय से बचाव का सरकार को नियम बनना चाहिए।
4. सरकारी स्तर पर इसके खात्मा के लिए पहल करनी चाहिए। जिससे लोग फसल उपजा सकें और पलायन रुके।

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