भूमि अधिग्रहण में अनियमितता का आरोप
किसानों ने डीएम को सौंपा 14 सूत्री मांगपत्र समस्याओं के समाधान करने की अपील की

कहलगांव, निज प्रतिनिधि। विक्रमशिला केंद्रीय विश्वविद्यालय परियोजना के लिए अधिग्रहित भूमि के मुआवजे में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए प्रभावित किसानों ने सोमवार को जिलाधिकारी सहित संबंधित अधिकारियों को 14 सूत्री मांगपत्र सौंपा।
किसानों की मांगें
किसानों ने मुआवजा निर्धारण प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए उचित भुगतान, पुनर्वास और रोजगार की मांग की है। किसान अध्यक्ष महेंद्र मंडल द्वारा दिए गए आवेदन में कहा गया है कि 13 फरवरी 2026 को घोषित अवार्ड में तीन वर्ष पुराने भू-मूल्य के आधार पर मुआवजा निर्धारित किया गया है।
अन्य मुद्दे
साथ ही पेड़-पौधों, मकानों, कुओं एवं निजी चापाकलों का समुचित मूल्यांकन नहीं किया गया। किसानों का आरोप है कि कई भू-दाताओं के पेड़ों का सर्वेक्षण तक नहीं हुआ, जबकि बीटी एक्ट के तहत आदेश प्राप्त किसानों तथा वर्ष 1992 से जमाबंदी कायम रैयतों का मुआवजा भी लंबित रखा गया है।
किसानों का त्याग
किसानों ने कहा कि जिन परिवारों ने पीढ़ियों से अपनी पुश्तैनी जमीन पर खेती की है, उन्होंने विकास कार्यों के लिए अपनी भूमि देकर बड़ा त्याग किया है। ऐसे में उन्हें उचित मुआवजे से वंचित करना न केवल कानूनी अन्याय है, बल्कि मानवीय दृष्टि से भी अनुचित है।
मांगपत्र की मुख्य बातें
मांगपत्र में किसानों ने वर्तमान सर्किल रेट के आधार पर मुआवजा भुगतान, हाल की खरीद-बिक्री दरों के अनुसार चार गुना राशि, 100 प्रतिशत सोलेशियम तथा 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने की मांग की है। प्रतिनिधिमंडल में अंतीचक की मुखिया ललिता देवी, किसान अध्यक्ष महेंद्र मंडल, सामाजिक कार्यकर्ता राजेश पासवान, बिनती कुमारी, नंद किशोर मंडल सहित अन्य ग्रामीण शामिल थे।
सामान्य प्रश्न
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