कटिहार : दीदी की सिलाई घर महिलाओं की आत्मनिर्भरता का मिसाल बना केंद्र

Newswrap हिन्दुस्तान, भागलपुर
share

कटिहार जिले के समेली प्रखंड में 'दीदी की सिलाई घर' महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता का एक सशक्त मंच बन रहा है। इस पहल से 35 जीविका दीदियों को रोजगार मिला है और महिलाएं प्रतिमाह 6 से 8 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं। यह पहल महिला सशक्तिकरण और स्वरोजगार को बढ़ावा दे रही है।

कटिहार : दीदी की सिलाई घर महिलाओं की आत्मनिर्भरता का मिसाल बना केंद्र

कटिहार से शशि रमण की रिपोर्ट कटिहार जिले के समेली प्रखंड अंतर्गत चकला मौलानगर पंचायत भवन में प्रतिष्ठा जीविका महिला विकास स्वावलंबी सहकारी समिति लिमिटेड, समेली द्वारा संचालित “दीदी की सिलाई घर” ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता और स्वरोजगार का सशक्त मंच बनकर उभर रहा है। यह पहल न केवल महिलाओं को रोजगार उपलब्ध करा रही है, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर भी बना रही है। जीविका दीदी सिलाई केंद्र का हाल ही में केंद्र का निरीक्षण प्रमुख प्रतिनिधि संतोष कुमार पप्पू, जीविका के बीपीएम प्रकाश सिंह, एसी सुमित कुमार, उपप्रमुख कंचन देवी, मुखिया राजेश कुमार मंडल, सरपंच मनोज पटेल, पंचायत समिति सदस्य अमरेंद्र माधव, जदयू नेता मनोज मंडल, दिलीप कुमार साह एवं सुनील कुमार शर्मा ने किया।

महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर

केंद्र में वर्तमान में आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों के लिए पोशाक तैयार की जा रही है। इस पहल के तहत लगभग 35 जीविका दीदियों को रोजगार मिला है। कार्य शुरू करने से पहले सभी महिलाओं को सात दिनों का विशेष सिलाई-कटाई प्रशिक्षण दिया गया, जिससे वे सिलाई कार्य में दक्ष बन सकें। प्रशिक्षण के बाद महिलाएं प्रतिदिन 5 से 8 सेट पोशाकों की सिलाई कर रही हैं।

आर्थिक सशक्तिकरण का उद्देश्य

जीविका के प्रखंड परियोजना प्रबंधक प्रकाश सिंह ने बताया कि इस योजना का उद्देश्य महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है। उन्होंने कहा कि दीदियों द्वारा तैयार पोशाकें आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों को उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण सामग्री भी उपलब्ध हो रही है।

भविष्य की योजनाएं

एसी सुमित कुमार ने बताया कि प्रखंड क्षेत्र में कुल 120 महिलाओं को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। फिलहाल 34 जीविका दीदियों को चार बैचों में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। भविष्य में सरकारी विद्यालयों के छात्र-छात्राओं के लिए यूनिफॉर्म तैयार करने की भी योजना है। जिससे ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

महिलाओं की आय में वृद्धि

इस पहल का सकारात्मक असर महिलाओं की आय पर भी दिखाई दे रहा है। वर्तमान में सिलाई केंद्र से जुड़ी महिलाएं प्रतिमाह लगभग 6 से 8 हजार रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं। इससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और उनमें आत्मविश्वास एवं आत्मसम्मान का विकास हुआ है।

सामाजिक परिवर्तन की नई पहचान

प्रशिक्षक राहुल कुमार मंडल ने कहा कि जीविका दीदियां अब केवल घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन की नई पहचान बन रही हैं। सिलाई प्रशिक्षण उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ उनके आत्मविश्वास को भी मजबूत कर रहा है।

कार्यक्रम में सीएलएफ की एमबीके गीता कुमारी, अध्यक्ष पिंकी देवी, सचिव रूबी देवी, कोषाध्यक्ष मंजू देवी, एमआईएस पवन कुमार, प्रशिक्षक खुशबू कुमारी, प्रवीण कुमार, उत्तम कुमार सहित बड़ी संख्या में प्रशिक्षु जीविका दीदियां उपस्थित थीं।

“दीदी की सिलाई घर” आज केवल एक उत्पादन केंद्र नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के सपनों को नई उड़ान देने का माध्यम बन गया है। यह पहल महिला सशक्तिकरण, स्वरोजगार और ग्रामीण विकास की दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत कर रही है।

सामान्य प्रश्न

दीदी की सिलाई घर का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस योजना का उद्देश्य महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है।

कृपया अपने अनुभव को रेट करें

Hindustan

लेखक के बारे में

Hindustan
हिन्दुस्तान भारत का प्रतिष्ठित समाचार पत्र है। इस पेज पर आप उन खबरों को पढ़ रहे हैं, जिनकी रिपोर्टिंग अखबार के रिपोर्टरों ने की है। और पढ़ें

लेटेस्ट   Hindi News ,    बॉलीवुड न्यूज,   बिजनेस न्यूज,   टेक ,   ऑटो,   करियर , और   राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।