
बोले पूर्णिया : पीने को पानी नहीं, शेड जर्जर व सफाई नदारद
चक हटिया, जो अंग्रेजों के समय से आर्थिक विपणन का केंद्र रहा है, आज अपनी अस्तित्व की अंतिम सांसें गिन रहा है। सरकारी उदासीनता और बदलती बाजार व्यवस्था के कारण यह हाट खत्म होने की कगार पर है।
-प्रस्तुति: प्रदीप कुमार राय
अंग्रेज के जमाने से आर्थिक विपणन का केंद्र माना जाने वाला चक हटिया की हालत अभी काफी खराब हो चुकी है। यह इलाके का एक ऐसा हटिया था जहां से जलालगढ़ समेत आसपास के इलाके की अर्थव्यवस्था तय होती थी। कृषि और कृषि से जुड़े एवं कृषि के पूरक व्यवसाय का सारा उत्पाद यहां आता था और बड़े पैमाने पर बिक्री होती थी। ज्ञात हो कि पूर्णिया जिला के जलालगढ़ प्रखंड क्षेत्र में स्थित ऐतिहासिक चक हाट आज अपने अस्तित्व की अंतिम सांसें गिन रहा है। आज़ादी के दौर से ही क्षेत्र का सबसे पुराना और प्रमुख हाट रहा चक हाट सरकारी उदासीनता, बदलती बाजार व्यवस्था और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में आए परिवर्तन का दंश झेल रहा है। कभी सोमवार और शुक्रवार को लगने वाला यह साप्ताहिक हाट आसपास के लोगों के लिए जीवनरेखा माना जाता था। अररिया, कसबा, गढ़बनेली से लेकर जलालगढ़ क्षेत्र के कई पंचायतों के लोग बैलगाड़ी और साइकिल से यहां पहुंचते थे। धान, तंबाकू, कपड़ा और मांस-मछली की व्यापक खरीद-बिक्री से यह हाट पूरे सीमांचल में पहचान रखता था, लेकिन प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता की वजह से चक हटिया धीरे-धीरे खत्म होती चली गई। एक जमाने में सीमंचल में अपनी अगल पहचान रखने वाली यह हटिया आज अपने पुनरुत्थान
की बाट जोह रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि आर्थिक गतिविधियों के चरम पर रहने वाले इस हाट से तंबाकू की खरीद-बिक्री होती थी, जिसे बड़े पैमाने पर कोलकाता भेजा जाता था। तब हाट का वार्षिक डाक लाखों रुपए तक पहुंचता था, लेकिन आज उसकी आय सिमटकर महज़ 5,000 रुपए के आसपास रह गई है, वह भी अब अंचल कार्यालय के माध्यम से। बाजार समिति के दौर में दुकानदारों के लिए बनाए गए शेड अब पूरी तरह खंडहर बन चुके हैं। हाट में बटटी (प्रवेश शुल्क/रसीद) भी वसूला जाता था जिससे कई परिवारों का जीवन-यापन होता था। लेकिन आज गतिविधियां न के बराबर हैं। स्थानीय ग्रामीण बताते हैं कि आवागमन के साधनों के विकसित होने के बाद लोग सीधे शहर के बाजारों और मॉल तक पहुंचने लगे। वहीं, सरकारी विभागों की अनदेखी से हाट का बुनियादी ढांचा टूटा—शेड जर्जर, सफाई व्यवस्था ध्वस्त और व्यवसायिक माहौल समाप्त। नतीजतन, व्यापारी और खरीदार दोनों दूर होते चले गए। आज जिस चकहाट ने कभी सीमांचल की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति दी, वही आज इतिहास बनने की कगार पर है। ग्रामीणों का आग्रह है कि यदि समय रहते इसके संरक्षण, नवीनीकरण और व्यवस्थित प्रबंधन की पहल नहीं हुई तो आने वाली पीढ़ियों के लिए यह हाट सिर्फ यादों और बुजुर्गों की कहानियों में सिमट जाएगा।
कृषक से ग्राहक को जोड़ने वाला पुल है हटिया
ग्रामीण हटिया गांव की रीढ़ है। यह कृषक से ग्राहक को जोड़ने वाला सीधा पुल है, जो रोजगार, आजीविका, सामाजिक जुड़ाव और स्थानीय संस्कृति को जीवित रखता है। यही कारण है कि आज भी कई ग्रामीण क्षेत्र साप्ताहिक हटिया के बिना अधूरे माने जाते हैं। ग्रामीण हटिया सिर्फ खरीद-बिक्री का स्थान नहीं, बल्कि ग्रामीण समाज की आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक धरोहर है। यहां स्थानीय किसानों और उत्पादकों को सीधा बाजार मिल जाता है और किसान बिना बिचौलियों के सीधे ग्राहकों को सब्जी, अनाज, फल, दूध, मछली, अंडा आदि बेचते हैं।
समाधान
1. चक हटिया में कहीं नहीं है ग्राहक और दुकानदार जनित सुविधाएं, इसलिए आने से कतराते हैं
2. लोग स रकारी विभागों की अनदेखी से हाट का बुनियादी ढांचा टूटा—शेड जर्जर, सफाई व्यवस्था ध्वस्त और व्यावसायिक माहौल समाप्त
3. पानी पीने से लेकर यूरिनल तथा शौचालय तक की है समस्या, बैठने की भी व्यवस्था नहीं है
4. हटिया में जमीन पर दुकान लगाने के लिए बना शेड जर्जर अवस्था में, लोगों को डर बना रहता है कि यहां दुकान लगाने पर कभी भी हादसा हो सकता है
5. हटिया में कहीं भी पर्याप्त एवं अत्याधुनिक रोशनी की नहीं है व्यवस्था नहीं है
समाधान
1. सबसे पहले लोकल प्रोडक्ट बेचने वाले व्यापारियों के लिए स्थाई जगह बने तभी लोग यहां पहुंचेंगे
2. सभी पुराने शेड को हटाकर नई और अति आधुनिक व्यवस्था बहाल हो, ताकि दुकानदार भयमुक्त होकर अपनी दुकानदारी कर सकें
3. हटिया के अंदर और बाहर दोनों जगह वेपर लाइट एवं हाई मास्ट लाइट की व्यवस्था हो
4. कम से कम चार जगह अलग-अलग महिला और पुरुष के लिए शौचालय बने, ताकि खरीदारी के लिए आने वाले खासकर महिलाओं को परेशानी न हो
5. छोटे बड़े व्यापारियों की सुरक्षा के लिए हटिया में ही सुरक्षाकर्मी की तैनात की जाए
इनकी भी सुनें
यह हाट अब सरकारी उदासीनता का दंश झेल रहा है। अगर यही हाल रहा तो कुछ वर्षों में सब खंडहर में तब्दील होकर इतिहास हो जाएगा। -लक्ष्मीकांत सिंह
चकहाट क्षेत्र के लिए बहुत महत्व रखता है। लोग दूर-दराज से आते थे, आज खालीपन देख मन दुखता है। सरकार व प्रशासन चाहेे तो हाट फिर से चमक उठे। -विद्याधर महतो
हम लोग पहले यहां आराम से धान फसल की बिक्री कर लेते थे। लोकल सब्जी और पटवा भी यहीं बेच लेते थे। किसानों को बेहतर दाम भी मिल जाता था। -अभिनंदन सिंह
दिन प्रतिदिन हाट का अवनति होता गया किसी ने ध्यान नहीं दिया। जनप्रतिनिधियों ने भी इस तरफ कुछ नहीं सोचा जिससे लोकल हटिया रसातल चला गया। -गणेश महतो
बाजार समिति से जो शेड बना था वह भी बिना देखरेख के जर्जर हो गया है। कोई जिम्मेदारी लेने वाला नहीं दिखता। अब सिर्फ नाम का हटिया रह गया है । -इजाउल
यह क्षेत्र सब्जी बाजार के नाम से फेमस था। लेकिन आज इक्का-दुक्का सब्जी विक्रेता ही मिलते हैं। हटिया में रौनक नहीं रहने के कारण ग्राहक ही नहीं आते हैं। -उमेश महतो
लोगों की जरूरतें गावों में ही पूरी होने लगीं और हाट का महत्व घट गया। चक हटिया को संवारने के लिए प्रशासन और समाज के लोगों ने सोचा ही नहीं। -दीनानाथ ठाकुर
चक हाट लगने से महिलाएं अपनी उपज का सामान आसानी से बेच लेती थीं। अब अवसर कम हो गया है। छोटे-छोटे परिवारों के महिलाओं की परेशानी बढ़ गई है। -बुधनी देवी
चकहाट के धीरे-धीरे पतन से कई लोगों की रोजी-रोटी पर भी असर पड़ गया है। इसी हटिया में छोटा-मोटा व्यवसाय कर रोजी-रोटी चलाते थे। -कामो
हाट के पतन से स्थानीय ग्रामीणों के छोटे व्यवसाय पर भी बुरा प्रभाव पड़ा है। क्योंकि इस इलाके में हर इंसान थोड़े-थोड़ी सब्जी की खेती करता था और हटिया में बेचता था। -शिव महतो
महिलाओं के हित में चकहाट के जीर्णोद्धार के लिए सरकार को विशेष ध्यान देना चाहिए। स्थानीय विधायक को भी हटिया के विकास को संज्ञान में लेना चाहिए। -निर्मला
स्थानीय खरीद-बिक्री के लिए चकहाट बहुत जरूरी था। आज लोग मजबूरी में दूर के बाजारों का रुख करते हैं। हटिया में लोकल लोगों का अनुराग भी अनूठा था। -मुनचुन ठाकुर
सरकार को अविलंब चकहाट के पुनरुद्धार के लिए कदम उठाना चाहिए। स्थानीय विधायक और प्रशासन दोनों को इस पर ध्यान देने की जरूरत है। -छोटू कुमार पासवान
पूरे हटिया की घेराबंदी कर सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम कर दिया जाए और रोशनी की पर्याप्त व्यवस्था कर दी जाए तो यही जगह फिर से झिलमिल करने लगेगा। -रवि कुमार
समय के अनुसार मार्केट के रूप रंग व व्यवसाय में चेंजिंग की जरूरत है। रोशनी-पानी तथा दुकान की व्यवस्था कर हटिया को जीविका दीदी के हवाले कर दिया जाए। -ललिता
बोले जिम्मेदार
सरकार के निर्देशानुसार ग्रामीण हाट बाजार के विस्तार व विकास की बात बन सकती है लेकिन जब तक ऊपर से कोई निर्देश नहीं आता है तब तक इस मसले पर कुछ भी बात करना जल्दबाजी होगी।
-सुमन कुमार,सीआई, जलालगढ़
चक हटिया की समस्या सामने आई है तो इसका समाधान किया जाएगा वसदन में भी आवाज उठाई जाएगी क्योंकि यह एक ऐतिहासिक जगह है और ऐतिहासिक जगह को हर हाल में मुकाम मिलना चाहिए।
-राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव, सांसद

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