Bhagalpur News: किशनगंज : समय पर पहचान से आसान होता है उपचार, प्रारंभिक जांच को आदत बनाने पर जोर
Bhagalpur News: किशनगंज से अवधेश झा की रिपोर्ट बदलती जीवनशैली, असंतुलित खानपान, शारीरिक गतिविधियों में कमी

Bhagalpur News: किशनगंज से अवधेश झा की रिपोर्ट बदलती जीवनशैली, असंतुलित खानपान, शारीरिक गतिविधियों में कमी और बढ़ते तनाव के कारण गैर संचारी रोग अब केवल शहरी आबादी तक सीमित नहीं रह गए हैं। मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग और कैंसर जैसी बीमारियां ग्रामीण क्षेत्रों में भी तेजी से चुनौती बन रही हैं। इन रोगों की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शुरुआती अवस्था में कई बार इनके स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। बीमारी का पता तब चलता है, जब वह गंभीर रूप ले चुकी होती है। ऐसे में सरकार का जोर बीमारी के गंभीर होने का इंतजार करने के बजाय प्रारंभिक अवस्था में ही उसकी पहचान कर उपचार शुरू करने पर है।इसी उद्देश्य से जिले में गैर संचारी रोगों की जांच एवं जागरूकता गतिविधियों को लगातार मजबूत किया जा रहा है। 01 सितंबर से विशेष गैर संचारी रोग स्क्रीनिंग अभियान शुरू किया जाएगा। इसके तहत लोगों को अपनी स्वास्थ्य जांच नियमित रूप से कराने के लिए प्रेरित किया जाएगा। जिले में आयुष्मान आरोग्य मंदिर, अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और सदर अस्पताल में आवश्यक जांच एवं उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।
आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से घर-घर हो रही जोखिम की पहचान
गैर संचारी रोगों की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा समुदाय स्तर पर भी लगातार कार्य किया जा रहा है। आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से घर-घर जाकर सी-बैक (कम्युनिटी बेस्ड असेसमेंट चेकलिस्ट) प्रपत्र के जरिए लोगों की स्वास्थ्य संबंधी जानकारी एवं गैर संचारी रोगों के जोखिम का आकलन किया जा रहा है।जिन लोगों में बीमारी या जोखिम के संकेत मिलते हैं, उन्हें आगे की जांच के लिए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र भेजा जाता है। इस प्रक्रिया से ऐसे लोगों की पहचान संभव हो रही है, जो सामान्य तौर पर बीमारी के लक्षण नहीं होने के कारण अस्पताल नहीं पहुंचते। इससे स्वास्थ्य विभाग का प्रयास केवल उपचार तक सीमित न रहकर रोकथाम और शुरुआती पहचान पर केंद्रित हो रहा है।जिला गैर संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. उर्मिला कुमारी ने बताया कि प्रारंभिक जांच गैर संचारी रोगों के नियंत्रण की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। उन्होंने कहा कि नियमित स्क्रीनिंग के माध्यम से मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों की समय रहते पहचान की जा सकती है। जांच में किसी प्रकार की आशंका मिलने पर मरीज को आवश्यक उपचार और फॉलोअप से जोड़ा जाता है।
आयुष्मान आरोग्य मंदिर से सदर अस्पताल तक जांच की सुविधा
जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को लोगों के नजदीक पहुंचाने के उद्देश्य से आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को प्रारंभिक जांच का महत्वपूर्ण केंद्र बनाया गया है। इसके साथ ही अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और सदर अस्पताल में भी आवश्यकतानुसार जांच, चिकित्सकीय परामर्श, उपचार, दवा और फॉलोअप की सुविधा उपलब्ध है।इस व्यवस्था का उद्देश्य लोगों को बीमारी गंभीर होने के बाद अस्पताल पहुंचने से पहले ही जांच की सुविधा उपलब्ध कराना है। यदि किसी व्यक्ति में प्रारंभिक जांच के दौरान बीमारी की पहचान हो जाती है तो समय रहते उपचार शुरू किया जा सकता है। इससे बीमारी के बढ़ने और उससे होने वाली गंभीर जटिलताओं की आशंका को कम करने में मदद मिलती है।
प्रारंभिक जांच को अपनी आदत बनाएं: डीएम
जिलाधिकारी नवीन कुमार ने जिलेवासियों से अपील करते हुए कहा कि गैर संचारी रोगों से बचाव के लिए प्रत्येक व्यक्ति को प्रारंभिक स्वास्थ्य जांच को अपनी नियमित आदत बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कई गंभीर बीमारियां शुरुआत में बिना किसी स्पष्ट लक्षण के शरीर में मौजूद रहती हैं। ऐसे में केवल बीमारी के लक्षण दिखाई देने का इंतजार करना उचित नहीं है।उन्होंने कहा कि प्रारंभिक जांच को अपनी आदत बनाएं। बीमारी का लक्षण दिखाई देने का इंतजार न करें। यदि बीमारी की पहचान शुरुआती अवस्था में हो जाए तो उसका उपचार आसान होता है, जटिलताओं को रोकना संभव होता है और परिवार पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को भी कम किया जा सकता है।जिलाधिकारी ने कहा कि जिले में आयुष्मान आरोग्य मंदिर, अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और सदर अस्पताल में जांच की सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसलिए लोगों को इन सुविधाओं का आवश्यक रूप से लाभ उठाना चाहिए और चिकित्सकों की सलाह के अनुसार नियमित जांच एवं उपचार कराना चाहिए।
समय पर जांच से गंभीर स्थिति से बचाव संभव: सिविल सर्जन
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने कहा कि गैर संचारी रोगों में नियमित जांच और समय पर उपचार बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों को नियंत्रित नहीं किया जाए तो आगे चलकर हृदय, गुर्दे, आंखों और शरीर के अन्य महत्वपूर्ण अंगों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।उन्होंने आम लोगों से अपील की कि स्वास्थ्य को लेकर किसी प्रकार की लापरवाही न बरतें। उम्र 30 वर्ष या उससे अधिक होने पर नियमित रूप से स्वास्थ्य जांच कराएं। यदि जांच में कोई समस्या सामने आती है तो चिकित्सकीय सलाह के अनुसार समय पर उपचार शुरू करें और दवाओं का नियमित सेवन करें।
01 सितंबर से अभियान को मिलेगा और व्यापक स्वरूप
01 सितंबर से शुरू होने वाले विशेष गैर संचारी रोग स्क्रीनिंग अभियान के माध्यम से जिले में प्रारंभिक जांच को और व्यापक बनाया जाएगा। आशा कार्यकर्ताओं द्वारा समुदाय में लोगों को जांच के लिए प्रेरित करने के साथ-साथ सी-बैक प्रपत्र के माध्यम से जोखिम वाले व्यक्तियों की पहचान की जाएगी। इसके बाद संबंधित लोगों को नजदीकी स्वास्थ्य संस्थानों से जोड़ा जाएगा।स्वास्थ्य विभाग का उद्देश्य स्पष्ट है कि बीमारी को गंभीर होने के बाद पहचानने के बजाय शुरुआती अवस्था में ही पहचान कर उपचार शुरू करना। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग के साथ आम लोगों की भागीदारी भी जरूरी है।इसलिए जिलेवासियों से अपील है कि स्वास्थ्य जांच को केवल बीमारी के समय की जरूरत न समझें, बल्कि इसे नियमित स्वास्थ्य आदत का हिस्सा बनाएं। आयुष्मान आरोग्य मंदिर, अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और सदर अस्पताल में उपलब्ध जांच सुविधाओं का आवश्यक रूप से लाभ उठाएं। समय पर जांच होगी, तो बीमारी की पहचान समय पर होगी और समय पर उपचार से जीवन को गंभीर जोखिम से बचाया जा सकेगा।


