ईश्वर का करें साक्षात्कार, मानव जीवन है बड़ा दुर्लभ जीवन : स्वामी रामानंद
कहलगांव के पटेल नगर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा सह त्रिवेणी महोत्सव में स्वामी रामानंद शास्त्री महाराज ने ईश्वर के साक्षात्कार का महत्व बताया। उन्होंने गोपियों को आत्म तत्व का उपदेश दिया और रुक्मिणी विवाह का प्रसंग सुनाया। श्रद्धालुओं ने भजनों और झाकियों के साथ उत्सव मनाया।

कहलगांव, निज प्रतिनिधि। श्रीमद्भागवत का यह पांच प्राण है। जिसे हम रास पंचायत अध्याय करते हैं। जिन इंद्रियों के द्वारा सदैव कृष्णा रस का पान करता हो उसे हम गोपी कहते हैं। भगवान गोपियों को आत्म तत्व का उपदेश किया और कहा गोपियों जिस परिवार के जिस पुत्र को तुम अपना मान बैठी हो याद रखना शरीर नहीं रहेगा और संसार भी नहीं रहेगा। इसीलिए प्रत्येक प्राणियों को चाहिए ईश्वर का साक्षात्कार करें, क्योंकि यह मानव जीवन बड़ा दुर्लभ जीवन है। दुर्लभों मानुसो देही नाम क्षणभंगुर राह। यह बातें कहलगांव के पटेल नगर में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा सह त्रिवेणी महोत्सव में कथा वाचन करते हुए कथावाचक स्वामी रामानंद शास्त्री महाराज ने कही है।
उन्होंने कहा कि शरीर के पतन होने से पूर्व तूने ब्रह्मा अर्थात् परमात्मा को जान लिया तब तो ठीक है नहीं तो बहुत बड़ी हानि होगी। रुक्मिणी विवाह का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा द्वारका से बड़े धूमधाम से बारात आई कुंडलपुर में जाकर के भगवान का भव्य स्वागत हुआ और भगवान रुक्मिणी के साथ विवाह संपन्न हुआ। कथा एवं झाकी एवं भजनों की प्रस्तुती से श्रद्धालु झूमते हुए जयकारे लगाते रहे। मंच का संचालन डॉ. प्रवीण कुमार राणा ने किया।
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