सहरसा: सच्चे प्रेम से हीं होगी परमात्मा की प्राप्ति :कथावाचिका
सहरसा से मनीश कुमार सिंह। सनातन श्री नारायण सेवा संस्थान द्वारा आयोजित श्रीमद भागवत

सहरसा से मनीश कुमार सिंह। सनातन श्री नारायण सेवा संस्थान द्वारा आयोजित श्रीमद भागवत के पांचवे दिन भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन किया गया। कथा व्यास डॉ शिवानी शुक्ला ने कहा धनवान व्यक्ति वही है जो अपने तन, मन, धन से सेवा भक्ति करें। वही आज के समय में धनवान व्यक्ति है। परमात्मा की प्राप्ति सच्चे प्रेम के द्वारा ही संभव हो सकती है। पुतना राक्षसी ने बालकृष्ण को उठा लिया और स्तनपान कराने लगी। श्रीकृष्ण ने स्तनपान करते-करते ही वध कर उसका कल्याण किया। माता यशोदा जब भगवान श्री कृष्ण को पुतना के वक्षस्थल से उठाकर लाती है उसके बाद पंचगव्य से स्नान कराती है।
सभी को गौ माता की सेवा, गायत्री का जाप और गीता का पाठ अवश्य करना चाहिए। गाय की सेवा से 33 करोड़ देवी देवताओं की सेवा हो जाती है। पृथ्वी ने गाय का रूप धारण करके श्रीकृष्ण को पुकारा तब श्रीकृष्ण पृथ्वी पर आये हैं। इसलिए वह मिट्टी में नहाते, खेलते और खाते हैं ताकि पृथ्वी का उद्धार कर सकें। गोपालकों ने जाकर यशोदामाता से शिकायत कर दी मां तेरे लाला ने माटी खाई है। यशोदा माता हाथ में छड़ी लेकर दौड़ी आयीं। माता के ऐसा कहने पर श्रीकृष्ण ने अपना मुख खोल दिया। श्रीकृष्ण के मुख खोलते ही यशोदाजी ने देखा कि मुख में चर-अचर सम्पूर्ण जगत विद्यमान है। आकाश, दिशाएं, पहाड़, द्वीप, समुद्रों के सहित सारी पृथ्वी, बहने वाली वायु, वैद्युत, अग्नि, चन्द्रमा और तारों के साथ सम्पूर्ण ज्योतिर्मण्डल, जल, तेज अर्थात प्रकृति, महतत्त्व, अहंकार, देवगण, इन्द्रियां, मन, बुद्धि, त्रिगुण, जीव, काल, कर्म, प्रारब्ध आदि तत्त्व भी मूर्त दीखने लगे। महाराज ने कहा कि आज कल की युवा पीढ़ी अपने धर्म अपने भगवान को नही मानते है, लेकिन अपने धर्म को जानना चाहते हो तो पहले अपने धर्म को जानने के लिए गीता, भागवत ,रामायण पढ़ो तो, तुम नहीं तुम्हारी आने वाली पीढ़ी भी संस्कारी हो जाएगी।
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