
मुंगेर: बीमार मवेशियों पर संकट, अस्पताल की लापरवाही उजागर
धरहरा के पशु अस्पताल की स्थिति बेहद खराब है। ग्रामीण मवेशियों को बीमार होने पर खाट या मालवाहक वाहन से लाने को मजबूर हैं। चिकित्सक राजेश कुमार की लापरवाही के चलते मवेशियों का सही इलाज नहीं हो रहा है।...
धरहरा, एक संवाददाता। प्रखंड मुख्यालय स्थित पशु अस्पताल नाम के लिए भले खड़ा हो, लेकिन ग्रामीणों को इससे कोई राहत नहीं मिल रही। अस्पताल की स्थिति इतनी लचर है कि पशुपालक बीमार मवेशियों को खाट पर लादकर या मालवाहक वाहन से अस्पताल तक लाने को मजबूर हैं। इससे उनके ऊपर आर्थिक बोझ तो बढ़ ही रहा है, वहीं मवेशियों की हालत भी बिगड़ती जा रही है।ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि चिकित्सक राजेश कुमार न तो क्षेत्र भ्रमण करते हैं और न ही अस्पताल में सही इलाज उपलब्ध कराते हैं। दवा लक्षण देखकर नहीं दी जाती। यही वजह है कि मवेशी लगातार बीमार पड़ रहे हैं और उनकी जान पर बन आई है।मोहनपुर

गांव निवासी सुनील सिंह ने बताया कि उनकी गाय आठ दिन से बुखार में तड़प रही है। चलंत वाहन से आए चिकित्सक इंजेक्शन और सलाइन तो लगा रहे हैं, लेकिन हालत में कोई सुधार नहीं है। गाय ने खाना-पीना छोड़ दिया और दूध उत्पादन 18 लीटर से घटकर महज 2 लीटर रह गया। इसी तरह प्रवीण दास ने कहा कि उनके मवेशी की गर्दन पर गांठ है, लेकिन इलाज का कोई असर नहीं दिख रहा। कंपनी दास का कहना है कि उनके मवेशी के खुर में जख्म है, दवा लेने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है।इमरजेंसी की स्थिति में जब पशुपालकों ने अस्पताल प्रबंधक से निजी नंबर मांगा तो साफ इंकार कर दिया गया। कहा गया कि केवल सरकारी नंबर ही मिलेगा और इसके लिए एक सप्ताह इंतजार करना होगा। इससे पशुपालकों का गुस्सा और बढ़ गया।इधर ग्रामीणों की पीड़ा पर सवाल उठाने के बजाय चिकित्सक राजेश कुमार ने विवादित बयान देते हुए कहा कि क्षेत्र में किसी प्रकार की बीमारी नहीं है, अफवाह फैलाकर स्थिति को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है। उप प्रमुख नीरज यादव ने प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि यह लापरवाही बर्दाश्त के बाहर है। अस्पताल में पदस्थापित चिकित्सक को अपनी जिम्मेदारी निभानी ही होगी। जिला प्रशासन अगर तुरंत हस्तक्षेप नहीं करता तो यह पशुपालकों की आजीविका पर सीधा हमला होगा।

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