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VIDEO अररिया से ग्राउंड रिपोर्ट: तबाही के निशां बाकी, टापू पर जिंदगी बिताने को मजबूर पीड़ित

flood affected area at araria

1 / 4अररिया में चारों ओर पानी ही पानी, दैनिक कामों के लिए पानी भरी गड्ढ़े को पार करते बाढ़ पीड़ित।

flood affected area of araria

2 / 4अररिया में चारों ओर पानी ही पानी, पानी में डूबा हुआ शव।

flood at araria

3 / 4कभी इस बाइक की सवारी करते थे, आज बाढ़ में डूबकर खराब हुई बाइक को कंधे पर लेकर मेकेनिक के पास ले जाते लोग।

flood at araria

4 / 4इस पुल पर से होकर गुजरते थे लोग सैकड़ों लोगों को सहारा देता था ये पुल। अब बाढ़ से तबाह हुए इस पुल को ही सहारे की आस।

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गांव के गांव उजड़ गए, गांव से बाहर निकलने के सभी रास्ते और पुल पुलिया ध्वस्त हो चुके हैं। जिधर जाते उधर ही कोई न कोई शव पानी में नजर आता। 

बीबी सैमुन अपनी बेटी नजरुल और गांव की दूसरी औरतों के साथ खराब बाढ़ में बर्बाद हुई पाट को किसी तरह से बचाने में लगी है। उनका गांव गुरमी झमटा टापू में तब्दील हो गया है। चारों ओर पानी ही पानी है। गांव से बाहर निकलने के सभी रास्ते और पुल पुलिया ध्वस्त हो गए हैं। बीबी सैमुन कहती हैं 13 तारीख को सुबह 3 बजे जब उनके गांव में पानी घुसा तो सब सो रहे थे। अंधेरा था।

पानी जब गांव में 2 से तीन फीट घुस गया और चीख पुकार हुई तब नींद खुली। पानी देखकर आवक रह गई। घर का कुछ बचा पाती उससे पहले सब बहने लगा था। गांव से बाहर जाने के सभी रास्तों पर पानी की तेज धार का कब्जा था। संयोग से इस गांव पर बाढ़ आपदा भवन बना हुआ है। उसी की छत पर तीन दिन भूखे प्यासे गुजरा। इसी तरह मो. शमशाद, मो जुबैर, मो आदिल और सैकड़ों परिवारों को भूखे प्यासे रहना पड़ा।

पंचायत के वार्ड 12 के पंच शमशाद और 11 के पंच घनश्याम ने बताया कि सभी कच्चे मकान ध्वस्त हो गए हैं या अब हो जाएंगे। अब लड़ाई भूख औऱ बेरोजगारी की होगी। सरकार से राहत के नाम पर जो बंटा वो मुरवल्ला तक ही रह गया। तीन चार दिन से सामूहिक भोजन अपने स्तर से कराया गया अब दिक्कत है कि जो अनाज सरकार से मिल रहा उसे गांव तक कैसे लेकर आएं।

इससे भी बुरा हाल महिसकोल और झमता का। पूरा गांव उजड़ गया है। मो जुबैर ने बताया कि करीब नौ लोगों की लाशें बाढ़ के पानी में पाट की फसलों में फंसी हुई देखी। किसी के गले में बैग फंसा था तो किसी ने अपने बच्चे को पीठ पर बांध रखा था। लाशें दूर दूर से बह कर आई हैं। प्रशासन की पहुंच यहां तक नहीं है। महामारी फैल रही है। पूर्णदाहा के दो बच्चे बह कर जोकीहाट तक चले गये। हम जिस ओर इस टापू बने क्षेत्र में बढ़ते लोग मौत की अलग अलग दर्दनाक दास्तान बताते। प्रशासन की नजर में भले ही मौत का आंकड़ा 42 तक पहुंचा हो लेकिन प्रत्यक्षदर्शियों की माने तो मृतकों की संख्या सैकड़ों में है। लाशें अब भी पानी मे जहां तहां फंसी हैं।

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