काढ़ागोला गंगा घाट पर शव दाहगृह बनवाने की मांग

Newswrap हिन्दुस्तान, भागलपुर
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बरारी प्रखंड के काढ़ागोला गंगा घाट पर शव दाहगृह निर्माण की मांग बढ़ रही है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि घाट धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व रखता है, लेकिन सुविधाओं का अभाव है। बारिश और बाढ़ के समय अंतिम संस्कार करना मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों ने सरकार से जल्द सुविधाएं उपलब्ध कराने की अपील की है।

काढ़ागोला गंगा घाट पर शव दाहगृह बनवाने की मांग

सेमापुर से राणा सिंह की रिपोर्ट बरारी प्रखंड क्षेत्र के प्रसिद्ध काढ़ागोला गंगा घाट पर शव दाहगृह (श्मशान घाट) निर्माण की मांग अब जोर पकड़ने लगी है। स्थानीय ग्रामीण नवीन चौधरी, मनोज शाह, अमन कुमार सिंह, मनीष कुमार, समीर चौधरी, रंजीत मंडल कहना है कि यह घाट न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि ऐतिहासिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण रहा है, बावजूद इसके यहां बुनियादी सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। ग्रामीणों ने बताया कि काढ़ागोला घाट वर्षों से आसपास के कई गांवों के लोगों के लिए अंतिम संस्कार का मुख्य स्थान रहा है। लेकिन यहां शव दाह के लिए न तो पक्का मंच है और न ही छाया, पानी, लकड़ी रखने या बैठने की समुचित व्यवस्था।

खासकर बारिश और बाढ़ के मौसम में स्थिति और भी खराब हो जाती है, जब गंगा का जलस्तर बढ़ने से पूरा इलाका जलमग्न हो जाता है और अंतिम संस्कार करना बेहद कठिन हो जाता है। इतिहास की बात करें तो काढ़ागोला घाट का नाम क्षेत्र में लंबे समय से प्रचलित रहा है। पुराने समय में यह घाट व्यापार और आवाजाही का भी महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता था। गंगा के किनारे बसे इस इलाके से नाव के जरिए लोगों और सामान का परिवहन होता था। साथ ही, धार्मिक दृष्टि से भी यह स्थान लोगों की आस्था से जुड़ा रहा है, जहां दूर-दराज के लोग स्नान और पूजा के लिए पहुंचते हैं। स्थानीय बुजुर्ग बताते हैं कि पहले यहां पर घाट की व्यवस्था बेहतर थी और लोगों की आवाजाही भी ज्यादा रहती थी, लेकिन समय के साथ सुविधाओं का विकास नहीं हो पाया। आज स्थिति यह है कि अंतिम संस्कार जैसे संवेदनशील कार्य के लिए भी लोगों को खुले में और असुविधाजनक हालात में काम करना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर यहां आधुनिक शव दाहगृह का निर्माण किया जाए, तो इससे न केवल स्थानीय लोगों को राहत मिलेगी बल्कि घाट की गरिमा भी बढ़ेगी। साथ ही पर्यावरण के दृष्टिकोण से भी यह बेहतर होगा, क्योंकि व्यवस्थित दाहगृह से प्रदूषण पर नियंत्रण संभव है। लोगों ने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, एवं जिला पदाधिकारी और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि इस ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले घाट पर जल्द से जल्द शव दाहगृह, शेड, पानी और प्रकाश जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि लोगों को अंतिम संस्कार के दौरान सम्मानजनक वातावरण मिल सके।

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