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बोले पूर्णिया : पुल के अभाव में हर साल टापू बनता पटना रहिका

बोले पूर्णिया : पुल के अभाव में हर साल टापू बनता पटना रहिका

संक्षेप:

पटना रहिका गांव के लोग वर्षों से एक पुल के निर्माण की मांग कर रहे हैं। बरसात में यह गांव टापू में बदल जाता है, जिससे गांववालों को आवाजाही में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। सरकारी आश्वासन के बावजूद पुल नहीं बना, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक गतिविधियों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।

Dec 05, 2025 12:49 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, भागलपुर
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प्रस्तुति: अमित गोस्वामी रजनीश

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बिहार में सड़कों और गलियों का विकास तेजी से हुआ है। पुल-पुलियों का भी विकास कम नहीं हुआ। लेकिन श्रीनगर प्रखंड में पटना रहिका लगभग 4000 आदिवासियों का एक ऐसा गांव है, जहां देश के आजाद हो जाने के बाद भी आज तक नदी पर पुल नहीं बना। इसका मलाल गांव में बसने वाले अधिकांश गरीब और मजलूम लोगों को काफी ज्यादा है। जनप्रतिनिधियों के अनदेखी और प्रशासन का उदासीन रवैया अब इन लोगों के लिए नियति बन गई है। यहां के लोगों का कहना है कि इन लोगों का अपना कोई नेता नहीं है लेकिन जब चुनाव का समय आता है तो कई नेता आते हैं और वोट लेकर चले जाते हैं। कुछ युवाओं ने बताया कि हम लोगों को तो स्थानीय नेता अलग दुनिया का लोग समझते हैं। हम लोगों को आवागमन नहीं रहने के कारण तरह-तरह की परेशानी है। कहना अतिशय नहीं होगा कि हमारी जीवन शैली आदिम जमाने जैसी बर्बर है।

पूर्णिया जिला के श्रीनगर प्रखंड क्षेत्र के सिंघिया पंचायत स्थित पटना रहिका गांव के लोग वर्षों से एक अदद पुल निर्माण की मांग कर रहे हैं। करीब चार हजार की आबादी वाला यह गांव हर साल बरसात के मौसम में टापू में तब्दील हो जाता है, जिससे ग्रामीणों को आवाजाही में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। गांव में मुख्य रूप से आदिवासी, एससी और एसटी समुदाय के लोग रहते हैं, जिनके लिए बरसात का मौसम किसी चुनौती से कम नहीं है। गांव के लोग बरसात में पानी पार करने के लिए चचरी (बांस का अस्थायी पुल) बनाते हैं। जब सरकार की ओर से नाव उपलब्ध होती है तो वे नाव से आवाजाही करते हैं। वहीं कम बरसात होने पर ग्रामीणों को ठेंगुना भर पानी में पैदल पार करना पड़ता है। इस दौरान श्रीनगर प्रखंड मुख्यालय, अंचल कार्यालय, जिला मुख्यालय, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र श्रीनगर, सदर अस्पताल और मुख्य मार्ग तक पहुंचना ग्रामीणों के लिए बेहद मुश्किल हो जाता है।

पटना रहिका में केवल एक प्राथमिक विद्यालय है। उसके बाद शिक्षा जारी रखने के लिए बच्चों को गांव से बाहर जाना पड़ता है, लेकिन बरसात के समय आवाजाही रुक जाने के कारण अधिकांश बच्चे पढ़ाई से वंचित रह जाते हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, बच्चों को समय पर स्कूल पहुंचने में कठिनाई होती है, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित होती है। ग्रामीण अपनी सामान्य खरीदारी के लिए को-ऑपरेटिव बाजार या चंपानगर बाजार जाते हैं। लेकिन बरसात में आवाजाही ठप हो जाने से राशन, दवा और अन्य जरूरत की वस्तुएं लाने-ले जाने में दिक्कत होती है। इस साल कम बारिश होने से लोगों ने टूटी हुई अस्थायी पुलिया पर पाइप लगाकर किसी तरह आवागमन की व्यवस्था की है, लेकिन ग्रामीणों को डर है कि ज्यादा बारिश होने पर यह पूरी तरह टूट सकती है। छितौना घाट से नाव की व्यवस्था जरूर है, जिससे लोग रामनगर होते हुए चंपानगर तक पहुंच जाते हैं। लेकिन यह व्यवस्था भी अस्थायी और जोखिम भरी है। ग्रामीणों का कहना है कि यह स्थायी समाधान नहीं है। हर साल वे एक अदद पक्के पुल के लिए जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाते हैं, लेकिन अब तक उनकी मांग पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। ग्रामीणों के अनुसार, बारिश के दौरान बीमार पड़ने पर मरीज को अस्पताल पहुंचाना किसी युद्ध से कम नहीं होता। गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता। कई बार रास्ते में ही गंभीर मरीजों की हालत बिगड़ जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि पुल के अभाव में उनकी जिंदगी हर साल दांव पर लगी रहती है।

सरकारी स्तर पर केवल मिलते रहे आश्वासन, बढ़ रहा है लोगों का आक्रोश

पटना रहिका के लोग कई सालों से पुल निर्माण की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकारी स्तर पर केवल आश्वासन मिलते रहे। ग्रामीण बताते हैं कि चुनाव के समय नेताओं द्वारा पुल बनाने के वादे किए जाते हैं, लेकिन बरसात खत्म होते ही उनकी आवाज अनसुनी कर दी जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि स्थायी पुल के निर्माण से न केवल उनकी आवाजाही सुगम होगी, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापारिक गतिविधियों में भी सुधार आएगा। साथ ही प्रशासनिक सेवाओं तक पहुंच आसान होगी और गांव का सामाजिक-आर्थिक विकास संभव हो सकेगा। पटना रहिका के लोगों की यह मांग सिर्फ विकास की नहीं, बल्कि जीवनरक्षक सुविधा की है। अब देखना यह है कि कब उनकी यह वर्षों पुरानी उम्मीद हकीकत बनती है और उन्हें बरसात में टापू जैसी जिंदगी से छुटकारा मिलता है।

हमारी भी सुनें

पटना रहिका में एक अदद पुल के लिए कई साल से मांग करने के बाद भी तरस गए हैं। पुल नहीं बनने से लोगों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता है।

- ब्रज किशोर भारती

‌पटना रहिका में पुल नहीं बनने से चारों तरफ से पानी से घिरा टापु नामा बने इस गांव का हाल बेहाल हो जाता है। लोगों को रोजाना जीवन जीने की जद्दोजहद लगी रहती है।

- सुमन झा

कई बच्चों को प्राथमिक विद्यालय में पढ़ने के बाद आगे की पठन पाठन से वंचित होना पड़ता है। बच्चों की शैक्षणिक विकास से वंचित होना पड़ता है।

- अमित कुमार झा

पटना रहिका में पुल नहीं बनने से लोग नारकीय जीवन जीने के लिए विवश है। चारों तरफ से पानी से घिरा टापु नामा इस गांव में घर से बाहर दूसरे गांव जाने में दिक्कत होती है।

- अजय शर्मा

फसल मंडी ले जाने में काफी दिक्कत का सामना करना आम बात हो गई है। किसानों को काफी दिक्कत का सामना करने के बाद फसल घर तक या मंडी तक ले जाते हैं।

- आनन्द

लोगों को प्रखंड मुख्यालय,जिला मुख्यालय, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र,थाना जाने में काफी दिक्कत होती है।

- हरि मुर्मू

बरसात में लोगों को काफी दिक्कत होती है। एक तरफ रामनगर होकर निकलने के लिए नाव की व्यवस्था है। लोगों को ठेंगुना भर पानी में आवाजाही करना पड़ता है।

- अजय रिषी

इमरजेंसी मरीज को अस्पताल ले जाने में काफी मशक्कत का सामना करना पड़ता है। लोग खटिया पर लादकर अस्पताल तक ले जाने के लिए मजबूर हैं।

- बाबूलाल

लोगों का रोजगार व्यवसाय सब चौपट हो गई है। लोग अपने गांव में ही कैद होकर रह जाते हैं। लोगों का आर्थिक विकास भी अटक गया है। इन्हें रोजगार मिलना चाहिए।

- हेपपन देवी

पटना रहिका गांव में शत प्रतिशत आदिवासी एससी-एसटी होने के बाद भी अब तक पुल नहीं बनने से एससी-एसटी के लोगों का मजाक उड़ाया जा रहा है।

- मंझली देवी

पटना रहिका में पुल नहीं बनने से लोगों को बेवजह काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता है। बरसात में सांप-बिच्छू अन्य जीव से खतरा बना रहता है।

- पटवारी हेमब्रम

बरसात भर लोग अन्य गांवों से कटे रहते हैं। लोगों को आवाजाही लगभग बंद हो जाती है। जरूरत का सामान खरीद कर घर लाने में फजीहत हो जाती है।

- रामलाल

लोगों को आदत हो गई है पानी में पार करने की। नदी तो हमारा जीवन है ही लेकिन अगर उस पर पुल बन जाए तो हमारे जीवन शैली सुधर जाएगी।

- मांगन महलदार

पटना रहिका में पुल बनाने की मांग को लेकर कई बार जनप्रतिनिधि एवं अधिकारियों को जानकारी दी गई है लेकिन अब तक पुल नहीं बनने से आवाजाही में दिक्कत होती है।

- राजू

पटना रहिका में पुल बनाने को लेकर कई जनप्रतिनिधि एवं अधिकारियों ने सिर्फ आश्वासन दिया है। पर अब तक जमीन पर काम शुरू नहीं हुआ।

- अमित कुमार

बोले जिम्मेदार

पटना रहिका गांव सचमुच विकास से काफी दूर रहा है। वहां के लोगों की सबसे बड़ी समस्या आवागमन के लिए पुल का नहीं होना है। इस मसले को संज्ञान में लिया गया है। इसके लिए आवाज उठाई जाएगी और वहां के जनता की सुविधा के लिए पुल निर्माण की दिशा में काम भी करवाए जाएंगे।

-राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव,सांसद, पूर्णिया

शिकायत

1. पटना रहिका में पुल नहीं बनने से लोगों को आवाजाही में काफी दिक्कत होती है।

2. पटना रहिका में पुल नहीं बनने से किसानों को फसल मंडी ले जाने में काफी दिक्कत होती है।

3. पटना रहिका में पुल नहीं बनने से बच्चों को प्राथमिक शिक्षा के बाद शिक्षा से वंचित होना पड़ता है।

4. पटना रहिका में पुल नहीं बनने से इमरजेंसी मरीज को अस्पताल ले जाने में काफी दिक्कत होती है।

5. पटना रहिका में पुल नहीं बनने से लोगों को बाजार में खरीदारी करना मुश्किल हो जाता है। इसके कारण लोगों में शासन-प्रशासन के विरुद्ध आक्रोश बढ़ता रहा है।

सुझाव

1. पटना रहिका में पुल बनाने से लोगों की आवाजाही बेहतर हो जाएगी।

2. पटना रहिका में पुल बनाने से किसानों को फसल मंडी ले जाने में दिक्कत नहीं होगी।

3. पटना रहिका में पुल बनने से बच्चे उच्च माध्यमिक शिक्षा से वंचित नहीं रहेंगे।

4. पटना रहिका में पुल बनने से इमरजेंसी मरीज को अस्पताल ले जाने में दिक्कत नहीं होगी।

5. पटना रहिका पुल बनने से लोगों को बाजार में खरीदारी करने में दिक्कत नहीं होगी। इसके लिए जनप्रतिनिधि और प्रशासन को तत्काल आवश्यक कदम उठाए जाने की जरूरत है।