daughters of lakhisarai were becoming national level female footballer but today just golden memories - कभी नेशनल लेवल की महिला फुटबॉलर तैयार होतीं थीं यहां, आज बस सुनहरी यादें- VIDEO DA Image

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कभी नेशनल लेवल की महिला फुटबॉलर तैयार होतीं थीं यहां, आज बस सुनहरी यादें- VIDEO

daughters of lakhisarai were becoming national level female footballer but today just golden memorie

बिहार के लखीसराय जिले के हलसी प्रखंड  की बेटियों ने फुटबॉल के क्षेत्र में कभी देशभर में अपने इलाके को पहचान दी थी। बेटियों का जज्बा इस कदर कायम था कि यहां दो-दो बार राष्ट्रीय स्तर के फुटबॉल मैच कराए गए। बेटियों से उनका मैदान छिन गया और फिर उड़ान भरने का सपना संजोए बेटियों को मजबूरन उसी चौका-बरतन वाली जिंदगी में लौटना पड़ा। अब खेल सामग्री के साथ ही वो सुनहरी यादें एक संदूक में बंद हो गई।

दरअसल, वर्ष 2004 में हलसी प्रखंड के केवीके की उबड़-खाबड़ जमीन को स्थानीय बुद्धिजीवियों ने अपने प्रयास से एक बेहतर मैदान का स्वरूप दिया। तब वहां के थानेदार नरेश पासवान हुआ करते थे, उन्हीं के पहल पर लोगों ने यह बीड़ा उठाया। जेसीबी और अन्य साधनों से मैदान तैयार किए गए। फिर एक कमेटी तैयार हुई और हलसी क्षेत्र को महिला फुटबॉल के क्षेत्र में चोटी पर पहुंचाने का संकल्प लिया गया। 

मुश्किल रहा बेटियों को मैदान तक लाना
उस समय की यादों को ताजा करते हुए कमेटी के सदस्य सह तत्कालीन मुखिया मो जैनूल हक बताते हैं कि शुरुआती दौर में बेटियों को मैदान तक लाना मुश्किल भरा रहा। बेटियों की इच्छा होती थी, तो अभिभावक हिचकते थे और अभिभावक चाहते थे, तो बेटियों को परेशान देखा जाता था। हालांकि काफी प्रयास के बाद 12 बेटियों को एकत्रित कर उन्हें बेहतर ट्रेनिंग दी गई। स्वयं अंतरराष्ट्रीय फुटबॉलर पीटर धनराज ने 20 दिनों की कड़ी ट्रेनिंग के बाद बेटियों को राज्यस्तरीय खेलने लायक बना दिया। हालांकि सामान्य तौर पर खिलाड़ियों का प्रशिक्षण हर दिन सुबह-शाम सालोंभर चलता रहा। गांव-समाज के कुछ लोग तरह-तरह की बातें किया करते थे। हालांकि बाद में जब परिणाम बेहतर सामने आने लगे तो 12 की जगह 32-33 बेटियां मैदान में उतरी और फुटबॉल के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने को जुट गईं।
 
वर्ष 2005 में पहला राष्ट्रीय मुकाबला
हलसी में महिला फुटबॉल के शुरु होने के सालभर बाद ही यहां पहला राष्ट्रीय स्तर का मुकाबला खेला गया। इस मुकाबले में मेजबान बिहार के साथ ही हरियाणा, पंजाब, केरल, झारखंड, पश्चिम बंगाल, यूपी आदि राज्यों से टीम खेलने पहुंची। बिहार टीम में हलसी की बेटियों के साथ ही बेगूसराय, बेतिया आदि जिलों के खिलाड़ी शामिल थी। भव्य आयोजन के दौरान भारी भीड़ मैदान में देखी गई। खिलाड़ियों को खाने-पीने के साथ ही आवासन व उचित सम्मान भी दिया गया। व्यवस्था से खुश होकर सीएम ने भी एक बधाई संदेश भेजा था। वहीं कुछ बाहरी राज्यों के सीएम ने भी बिहार के सीएम को बेहतर आयोजन के लिए बधाई संदेश भेजा। साल दो साल बाद एक बार फिर राष्ट्रीय फुटबॉल का गवाह हलसी प्रखंड बना।


 
मैदान भी छिन गया, स्टेडियम भी न बना
कमेटी के सदस्यों के साथ ही उस समय की खिलाड़ियों ने बताया कि वर्तमान में फुटबॉल के ग्रामीण स्तर के आयोजन भी यहां नहीं होते हैं और न ही यहां का कोई व्यक्ति फुटबॉल खेलता है। इसकी मुख्य वजह मैदान का न होना है। वर्ष 2007 के बाद से धीरे-धीरे फुटबॉल की गतिविधियां खत्म होती चली गई। केवीके ने उक्त मैदान को कृषि कार्य के लिए उपयोग करने की बात कहकर ले लिया। ग्रामीणों के काफी आग्रह के बावजूद मैदान खिलाड़ियों के लिए नहीं रह सका। वर्ष 2009 में सूबे के मुखिया ने भरी सभा में हलसी को उसी जमीन पर स्टेडियम देने की बात कही थी। इन बातों को 2016 में भी एक सभा के दौरान दोहराया, लेकिन आश्वासन महज नेताओं के भाषण सा ही रह गया। आज 10 साल बाद भी यहां स्टेडियम नहीं है, जिससे लोग चाह कर भी फिर से बेटियों को फुटबॉल से नहीं जोड़ पा रहे हैं।
 
कमेटी में ये लोग थे शामिल
कमेटी में तत्कालीन थानाध्यक्ष नरेश पासवान, मुखिया मो जैनूल हक के साथ ही नजीद बेग, डॉ परवाज, राजाराम पासवान, डॉ पंकज, विनय कुमार सिंह, संजय सिंह, रामविलास महतो, मो जावेद अख्तर, प्रमोद सिंह, बटुकेश्वर राम आदि शामिल थे। आयोजन समिति के अध्यक्ष तत्कालीन एसडीओ और सचिव नरेश पासवान थे।

तीन बेटियां कर रही नौकरी
फिजिकल फिटनेश के साथ ही फुटबॉल के खेल में हासिल प्रमाण-पत्र के आधार पर उस वक्त की तीन फुटबॉलर बेटियां आज देश में अलग-अलग सरकारी नौकरियों में अपनी सेवा दे रही है। इनमें रूली कुमारी सीआईएसएफ, निखहत प्रवीण आदि शामिल है। 

स्टेडियम के लिए मिली जमीन
हलसी प्रखंड में ही आउटडोर स्टेडियम बनाने की योजना है। केवीके की जमीन से सटे बिहार सरकार की जमीन पर स्टेडियम का निर्माण होना है। कला, संस्कृति एवं युवा विभाग को आठ एकड़ जमीन हस्तानांतरित कर दी गई है। हालांकि भवन निर्माण विभाग द्वारा स्टेडियम का निर्माण कराया जाएगा।  

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