
बोले कटिहार : अधूरा नाला बनी आफत, धूल-कीचड़ में कैद जिंदगी
संक्षेप: कटिहार शहर में अधूरे नाला और सड़क निर्माण कार्यों ने स्थिति बिगाड़ दी है। धूल, कीचड़ और मच्छरों से परेशान लोग अब आंदोलन की चेतावनी दे रहे हैं। बच्चों को स्कूल जाने में कठिनाई हो रही है और बुजुर्ग घरों में कैद हैं। नगर निगम की लापरवाही से लोग बीमारियों का शिकार हो रहे हैं।
बोले कटिहार : अधूरा नाला बनी आफत, धूल-कीचड़ में कैद जिंदगी

-प्रस्तुति: ओमप्रकाश अम्बुज/देवाशीष गुप्ता
कटिहार शहर इन दिनों धूल, कीचड़ और बदबू की गिरफ्त में है। राहत देने के लिए शुरू हुए नाला और सड़क निर्माण कार्य अब लोगों के लिए परेशानी बन गए हैं। अधूरे कामों से गलियां दलदल में बदल गईं, दुकानों के सामने धूल उड़ रही है और मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। लोगों का निकलना मुश्किल हो गया है। बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे, बुजुर्ग घरों में कैद हैं। शहरवासी खुद को विकास नहीं, अव्यवस्था के बीच पाते हैं। उनकी उम्मीदें अब नाराजगी में बदल चुकी हैं। क्योंकि विकास के नाम पर मिल रही है बस गंदगी, परेशानी और टूटी उम्मीदों की धूलभरी तस्वीर।
शहर की गलियों में इन दिनों राहत नहीं, आफत का सैलाब बह रहा है। नगर निगम क्षेत्र के कई वार्डों में अधूरे नाला और सड़क निर्माण कार्यों ने लोगों का जीना दूभर कर दिया है। जिस काम से लोगों को सुविधा और सफाई की उम्मीद थी, वही अब धूल, कीचड़ और मच्छरों का केंद्र बन गया है। गलियों में धूल उड़ती है, बारिश होते ही कीचड़ का साम्राज्य फैल जाता है, और खुले नालों से बदबू के साथ बीमारी का खतरा मंडराता है। नगर निगम और बिहार शहरी आधारभूत संरचना विकास निगम लिमिटेड के तहत शुरू हुए कई प्रोजेक्ट महीनों से अधूरे पड़े हैं। कहीं नाले की ढलाई पूरी हुई पर सड़क अधूरी रह गई, तो कहीं आधी सड़क बनाकर छोड़ दी गई। नतीजा यह है कि स्थानीय लोग रोजमर्रा की मुश्किलों से जूझ रहे हैं। बच्चे स्कूल जाते समय फिसल जाते हैं, बुजुर्गों को निकलना मुश्किल है, और दुकानदारों की बिक्री पर भी असर पड़ रहा है। स्थानीय दुकानदार बताते हैं कि पहले जहां ग्राहकों की भीड़ रहती थी, अब लोग धूल और गंदगी के कारण दुकानों तक आने से कतराते हैं। धूलभरी हवा में सांस लेना तक मुश्किल हो गया है। व्यापार में भारी गिरावट आई है और नुकसान बढ़ता जा रहा है। लोगों का कहना है कि चुनाव के वक्त नेताओं ने इन गलियों को चमकाने के वादे किए थे, लेकिन अब कोई देखने तक नहीं आता। नगर निगम में शिकायतें देने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही। कई वार्डों में काम महीनों से रुका पड़ा है, जिससे लोगों का सब्र जवाब दे रहा है। अधूरे नालों में जमा पानी मच्छरों का घर बन चुका है। मलेरिया, डेंगू और बुखार जैसी बीमारियां फैलने लगी हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीमें कभी-कभार पहुंचती हैं, लेकिन सफाई की मूल समस्या जस की तस है। निवासियों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि अधूरे कार्यों की गुणवत्ता की जांच कर दोषी ठेकेदारों की जवाबदेही तय की जाए।
जल्द सुधार नहीं हुआ तो आंदोलन करने को मजबूर
लोगों का कहना है कि अगर जल्द सुधार नहीं हुआ तो वे सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने को मजबूर होंगे। कटिहार शहर के मुख्य बाज़ारों में इन दिनों सन्नाटा पसरा है। जहां कभी ग्राहकों की भीड़ रहती थी, वहां अब धूल के गुबार और कीचड़ के ढेर हैं। अधूरे नाले और सड़क निर्माण कार्यों के कारण लोगों का दुकानों तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। बर्तन, कपड़ा, इलेक्ट्रॉनिक्स और किराना दुकानदारों का कहना है कि पिछले दो महीनों में बिक्री में 40 से 60 प्रतिशत तक की गिरावट आई है। ग्राहक धूल भरे माहौल में खरीदारी करने से कतराते हैं। कई दुकानों के सामने जमा कीचड़ से ग्राहकों का फिसलना आम बात हो गई है। दुकानदारों ने बताया कि उन्होंने नगर निगम को बार-बार शिकायत दी, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं हुआ। व्यापारियों का कहना है कि अगर हालात ऐसे ही रहे तो दीपावली और छठ जैसे त्योहारों की बिक्री पर भी असर पड़ेगा।
स्थायी सफाई की व्यवस्था नहीं
लोगों का कहना है कि विकास कार्य जनता की सहूलियत के लिए होने चाहिए, न कि उनके व्यवसाय को ठप करने के लिए। कटिहार नगर निगम क्षेत्र के कई वार्डों में अधूरे नालों में पानी का जमाव अब बीमारी का केंद्र बन चुका है। मच्छरों के झुंड शाम होते ही गलियों में मंडराने लगते हैं। नतीजा यह है कि डेंगू, मलेरिया और टायफाइड के मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। सदर अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार, पिछले एक महीने में बुखार और मच्छरजनित बीमारियों के मामलों में लगभग 30 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है। मोहल्लों में दवा छिड़काव की औपचारिक कार्रवाई तो कभी-कभी होती है, लेकिन स्थायी सफाई की व्यवस्था नहीं है। गंदे पानी की बदबू से लोगों का रहना दूभर हो गया है। खासतौर पर बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि निगम को तत्काल जलनिकासी और सफाई की विशेष व्यवस्था करनी चाहिए।
लोगों को हो रही परेशानी
लोगों ने चेतावनी दी है कि अगर हालात नहीं सुधरे तो वे सामूहिक रूप से आंदोलन करेंगे। चुनाव के वक्त नगर निगम और जनप्रतिनिधियों ने शहर को स्मार्ट और स्वच्छ बनाने के वादे किए थे, लेकिन अब वही वादे अधूरे निर्माण कार्यों की मिट्टी में दबे नजर आते हैं। लोगों को उम्मीद थी कि नाला और सड़क निर्माण से उनका इलाका सुधरेगा, लेकिन अधूरे कामों ने उनकी जिंदगी मुश्किल कर दी है। कई जगह सड़कों की खुदाई के बाद महीनों से काम बंद पड़ा है। नतीजतन लोगों को आने-जाने में परेशानी हो रही है।
जल्द कार्य हो शुरू
बारिश में गलियां कीचड़ में तब्दील हो जाती हैं, और धूप में धूल उड़ती है। स्थानीय निवासी अब अधिकारियों और नेताओं से नाराज हैं। उनका कहना है कि योजनाओं की नींव मजबूत नहीं, बस कागजों पर पूरी दिखाई जाती है। लोगों ने मांग की है कि अधूरे कार्यों की जवाबदेही तय कर दोषी ठेकेदारों पर कार्रवाई की जाए। जनता की यह नाराजगी बताती है कि विकास की कहानी अधूरी रहने पर आशीर्वाद नहीं, आक्रोश मिलता है। प्रशासन रुके हुए कार्य को जल्द से जल्द कराने का निर्देश दे। जिससे लोगों को राहत मिलेगी।
हमारी भी सुनें
अधूरे नाले और सड़क निर्माण ने पूरे मोहल्ले की हालत बिगाड़ दी है। घर से बाहर निकलना तक मुश्किल हो गया है।सांस लेने में परेशानी होती है।
-चंद्र मोहन सिंह
यह परियोजना राहत देने के बजाय अभिशाप बन गई है। नगर निगम के अधिकारी केवल निरीक्षण की फोटो खिंचवाने आते हैं।
-मनीष कुमार झा
नई सड़क और नाला बनाने की घोषणा होती है, लेकिन पूरा काम कभी नहीं होता। आधा काम छोड़ देने से मोहल्ला कीचड़ और मच्छरों का अड्डा बन गया है।
-लक्ष्मण
दिनभर धूल और रात में मच्छर-यही अब हमारी ज़िंदगी का हिस्सा बन गया है। निर्माण स्थल के चारों ओर मलबा फैला है, जिससे चलना-फिरना तक कठिन है।
-सोनू
गली में इतना कीचड़ है कि पैदल निकलना मुश्किल हो गया है। बच्चे गिरते हैं, बुजुर्ग घरों में कैद हैं। नगर निगम के इंजीनियर और ठेकेदार दोनों बेपरवाह हैं।
-हीरा
अधूरे नाले से बदबू और गंदा पानी पूरे इलाके में फैल रहा है। बारिश के बाद घरों में पानी भर जाता है। कोई जिम्मेदार अधिकारी देखने तक नहीं आता।
-मनोज पासवान
शहर के बीचोंबीच इतना बुरा हाल देखकर शर्म आती है। ठेकेदार ने आधा काम कर छोड़ दिया, जिससे सड़क धंस गई है और गंदा पानी जमा रहता है।
-प्रिंस पासवान
अधूरे नाले के कारण हर वक्त गंदगी का ढेर लगा रहता है। लोग बीमार पड़ रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग भी मौन है।
-ओम कुमार
रात में मच्छरों का आतंक और दिन में उड़ती धूल ने जीवन नरक बना दिया है। सड़क पर चलना भी जोखिम भरा हो गया है। किसी के गिरने या चोट लगने की खबरें आम हैं।
-रोहित
हमारे वार्ड में निर्माण कार्य छह महीने से रुका पड़ा है। कोई अधिकारी यह देखने नहीं आता कि हालत कितनी खराब हो गई है।
-रतन पासवान
जब नाला बनना शुरू हुआ था, तो सोचा था कि जलजमाव से राहत मिलेगी। लेकिन अधूरा काम अब सिरदर्द बन गया है। नाले का ढक्कन नहीं है।
-कन्हैया
नगर निगम के इस रवैये से लोगों में गहरा असंतोष है। गलियां टूट चुकी हैं, नालों में पानी सड़ रहा है, और मच्छरों से बचना मुश्किल है।
-गोविंदा पासवान
हमारे मोहल्ले की हालत देखकर लगता है मानो यहां कोई जिम्मेदार संस्था है ही नहीं। अधूरे नाले में पानी सड़ रहा है, धूल से आंखें जलती हैं। काम के नाम पर सिर्फ बोर्ड लगा है।
-राहुल कुमार
बरसात के बाद कीचड़ और धूप के बाद धूल, यही हमारी नियति बन गई है। गली से निकलना तो दूर, घर का दरवाजा खोलना भी मुश्किल हो गया है। बच्चे और बुजुर्ग बार-बार बीमार पड़ते हैं।
-मोहन
इन अधूरे कामों से सिर्फ परेशानी नहीं, खतरा भी बढ़ गया है। नाले में गंदा पानी जमा है, जिससे बीमारी फैल रही है। जवाब अब प्रशासन को देना होगा।
-विकास पासवान
हमारे इलाके में काम शुरू तो हुआ, लेकिन खत्म नहीं हुआ। अब हालत यह है कि आधी सड़क खुदी पड़ी है, और दूसरी आधी कीचड़ से भरी। धूल से लोग बीमार हो रहे हैं।
-अभिषेक कुमार
बोले जिम्मेदार
नगर निगम शहरवासियों की परेशानियों को गंभीरता से ले रहा है। कई वार्डों में नाला और सड़क निर्माण कार्य तकनीकी कारणों से कुछ समय के लिए रुके थे, जिन्हें अब तेजी से पूरा किया जा रहा है। ठेकेदारों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि कार्य गुणवत्ता के साथ तय समय सीमा में पूरे हों। जहां शिकायतें मिली हैं, वहां निरीक्षण दल भेजा गया है।
-संतोष कुमार, नगर आयुक्त, कटिहार
शिकायत
1. नाले और सड़कों के अधूरे निर्माण से गलियों में धूल और कीचड़ का साम्राज्य फैला है।
2. खुले नालों से बदबू उठती है, जिससे लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो गया है।
3. बारिश होते ही गंदा पानी घरों और दुकानों में घुस जाता है।
4. शिकायत करने के बाद भी नगर निगम अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचते।
5. अधूरे कामों के कारण बच्चों और बुजुर्गों को फिसलन से चोट लगने की घटनाएं बढ़ गई हैं।
सुझाव
1. अधूरे निर्माण कार्यों की तुरंत समीक्षा कर ठेकेदारों की जवाबदेही तय की जाए।
2. सड़कों और नालों के निर्माण को प्राथमिकता देते हुए तय समय सीमा में पूरा किया जाए।
3. काम पूरा होने तक नियमित सफाई और पानी निकासी की व्यवस्था की जाए।
4. प्रभावित वार्डों में धूल नियंत्रण के लिए छिड़काव कराया जाए।
5. नगर निगम एक निगरानी समिति गठित करे, जिसमें नागरिकों को भी शामिल किया जाए।

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