निलंबित स्टेनो और क्लर्क पर प्रपत्र ‘क’ गठित करने की कार्रवाई शुरू

Newswrap हिन्दुस्तान, भागलपुर
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एमओ का सर्विस बुक कंफर्म करने के लिए 70 हजार घूस लेते धराए थे विजिलेंस

निलंबित स्टेनो और क्लर्क पर प्रपत्र ‘क’ गठित करने की कार्रवाई शुरू

भागलपुर, मुख्य संवाददाता। रिश्वतखोरी मामले में एसडीओ कार्यालय के निलंबित स्टेनो और क्लर्क पर प्रपत्र ‘क’ गठित करने की कार्रवाई शुरू हो गई है। फिलहाल दोनों सरकारी कर्मचारी विजिलेंस स्पेशल कोर्ट के निर्देश पर भागलपुर जेल में बंद हैं। ये दोनों कर्मी नाथनगर के प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी सह मार्केटिंग ऑफिसर (एमओ) अभिजीत कुमार का सर्विस बुक कंफर्म करने के लिए 70 हजार घूस लेते दफ्तर में ही धराए थे। विजिलेंस टीम द्वारा रंगेहाथों गिरफ्तार होने पर नौ दिन बाद डीएम ने दोनों को सस्पेंड किया था। स्टेनो प्रेम कुमार पूर्व में भी जेल जा चुका है। वर्ष 2016 में डीएम के स्टेनो रहते हुए सृजन घोटाला मामले में संलिप्तता देखकर एसआईटी ने जेल भेजा था।

लेकिन सीबीआई ने उनके खिलाफ चार्जशीट नहीं की थी, जिसके आधार पर वे जमानत लेने में सफल रहे। निलंबन टूटने के बाद उन्हें सदर एसडीओ के यहां पदस्थापित किया गया था।इधर, आरोपपत्र प्रपत्र ‘क’ तैयार करने के लिए एसडीओ कार्यालय से जरूरी कागजातों की मांग शुरू हो गई है। इसी दौरान पता चला कि विजिलेंस थाना से अब तक एसडीओ को लिखित जानकारी नहीं मिली कि दोनों को गिरफ्तार किया गया है। एसडीओ ने सिर्फ विजिलेंस डीएसपी के मौखिक सूचना पर ही डीएम को रिपोर्ट कर दी थी। अब विजिलेंस थाना से दोनों की गिरफ्तारी से संबंधित कागज, एफआईआर की कॉपी, चिकित्सीय प्रमाणपत्र और जेल भेजे जाने संबंधित कागजातों की मांग की जाएगी। एसडीओ कार्यालय के कर्मी पिछले दो दिनों से जिला स्थापना शाखा की दौड़ लगा रहे हैं कि प्रपत्र ‘क’ गठन के लिए और क्या-क्या दस्तावेज जरूरी है। सृजन मामले में सीबीआई ने नहीं दी थी रिपोर्टस्टेनो प्रेम कुमार पूर्व में जब जेल गए थे, तब नियमानुसार उन्हें निलंबित किया गया था। लेकिन प्रपत्र ‘क’ का गठन नहीं हो पाया था। एसआईटी से केस सीबीआई ट्रांसफर हो गया था, इसलिए प्रपत्र ‘क’ गठन के लिए आरोप गठित करने की अनिवार्यता के लिए सीबीआई से कई बार संपर्क किया गया। लेकिन सीबीआई ने किसी भी पत्र का जवाब नहीं दिया। सीबीआई द्वारा उचित कागज का नहीं देना और स्टेनो प्रेम को बचाने की मुहिम में लगे समाहरणालय के तत्कालीन कर्मी-अधिकारियों ने तब तक फाइल को दबा कर रखा। जब तक कि प्रेम की जमानत न हो गई। यही वजह रहा कि न तो प्रेम कुमार पर प्रपत्र ‘क’ का गठन हुआ और न विभागीय कार्यवाही शुरू हुई।

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