बोले कटिहार : खुले में मांस बेचने वालों पर हो सख्ती और लाइसेंस प्रक्रिया सरल हो
कटिहार शहर में खुले में मांस और मछली की बिक्री से लोगों में चिंता बढ़ गई है। कई दुकानों के पास वैध लाइसेंस नहीं है, और स्थिति स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन गई है।

-प्रस्तुति : ओमप्रकाश अम्बुज, मोना कश्यप
कटिहार शहर की सुबह अब सिर्फ चाय और अखबार की खुशबू से नहीं खुलती। कई इलाकों में चौक-चौराहों और भीड़-भाड़ वाले बाजारों से उठती कच्चे मांस की गंध लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन चुकी है। सड़क किनारे टंगे मांस के टुकड़े, पास बहती गंदी नालियां और मक्खियों की भरमार। यह दृश्य आज शहर के कई हिस्सों में आम हो गया है। कटिहार नगर निगम क्षेत्र के अलावा कुरसेला, कोढ़ा, बरारी, मनिहारी और अमदाबाद नगर पंचायतों में भी खुलेआम मांस और मछली की बिक्री को लेकर बहस तेज हो गई है। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि कई दुकानों के पास न तो वैध अनुज्ञप्ति (लाइसेंस) है और न ही खाद्य सुरक्षा विभाग की स्वीकृति। हाल ही में सरकार ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि बिना लाइसेंस संचालित मांस-मछली दुकानों को बंद कराया जाए। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी कहती है। न्यू मार्केट और मिरचाईबाड़ी जैसे व्यस्त बाजारों में खुले में मांस लटकाकर बेचा जा रहा है। आसपास गंदगी का अंबार, अपशिष्ट सीधे नालियों में और दुर्गंध से परेशान लोग इन सबके बीच प्रशासनिक सख्ती अब तक नजर नहीं आई है।
स्थानीय निवासी कहते हैं कि यह सिर्फ बदबू का मामला नहीं, बल्कि स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर प्रश्न है। बिना ढके मांस, खुले में कटाई और अस्वच्छ परिवेश से टायफाइड, फूड प्वाइजनिंग और डायरिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। कई अभिभावक चिंतित हैं कि स्कूल जाने वाले बच्चे रोज इसी रास्ते से गुजरते हैं।
शहर की वधशाला की स्थिति भी सवालों के घेरे में है। नगर निगम क्षेत्र में संचालित बूचड़खाना जर्जर हालत में बताया जा रहा है। स्वच्छ जल की पर्याप्त व्यवस्था नहीं, अपशिष्ट निस्तारण की ठोस प्रणाली का अभाव और नियमित सैनिटाइजेशन की कमी ये समस्याएं वर्षों से उठती रही हैं। नागरिकों की मांग है कि आधुनिक सुविधाओं से युक्त नया बूचड़खाना बनाया जाए, जहां से प्रमाणित और स्वच्छ मांस उपलब्ध कराया जा सके।
कटिहार सिविल सोसाइटी और अन्य सामाजिक संगठनों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपने की तैयारी शुरू कर दी है। उनकी मांग है कि नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग संयुक्त अभियान चलाकर सभी दुकानों का निरीक्षण करे। जिनके पास लाइसेंस नहीं है, उन्हें समय सीमा देकर नियमों का पालन सुनिश्चित कराया जाए, अन्यथा सख्त कार्रवाई की जाए।
हालांकि तस्वीर का एक दूसरा पहलू भी है। छोटे दुकानदारों का कहना है कि लाइसेंस प्रक्रिया जटिल और खर्चीली है। वे दावा करते हैं कि अगर प्रशासन पारदर्शी और सरल व्यवस्था लागू करे, तो वे निर्धारित मानकों का पालन करने को तैयार हैं। उनका तर्क है कि जीविका चलाने के लिए वे मजबूरन इस स्थिति में काम कर रहे हैं। शहर अब दो सवालों के बीच खड़ा है। रोजगार या स्वास्थ्य? नागरिकों का मानना है कि समाधान टकराव में नहीं, संतुलन में है। अगर आधुनिक वधशाला, नियमित निरीक्षण और जागरूकता अभियान साथ-साथ चलें, तो न सिर्फ अवैध बिक्री पर रोक लगेगी, बल्कि शहर की सेहत भी सुरक्षित रहेगी। अब देखना यह है कि प्रशासन इस उठती आवाज को सुनकर ठोस कदम कब उठाता है। क्योंकि यह मुद्दा सिर्फ बाजार का नहीं, हर घर की थाली और हर परिवार की सेहत से जुड़ा है।
नाक पर रुमाल रखकर गुजरते हैं स्कूली बच्चे
कटिहार। सुबह स्कूल की घंटी से पहले जब बच्चे यूनिफॉर्म पहनकर घर से निकलते हैं, तो उनके हाथ में किताबें होती हैं और आंखों में सपने। लेकिन शहर के कई बाजारों से गुजरते हुए उन्हें नाक पर रुमाल रखना पड़ता है। खुले में लटकता मांस, आसपास बिखरा अपशिष्ट और तेज दुर्गंध—यह दृश्य उनके मासूम मन पर असर छोड़ रहा है। कटिहार के न्यू मार्केट और मिरचाईबाड़ी जैसे भीड़भाड़ वाले इलाकों में अभिभावक रोज इसी चिंता के साथ बच्चों को भेजते हैं। कई माता-पिता बताते हैं कि बच्चे घर लौटकर उल्टी-मितली और सिरदर्द की शिकायत करते हैं। डॉक्टरों का भी मानना है कि अस्वच्छ माहौल से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
शिकायत
01 कई दुकानों में बिना लाइसेंस मांस-मछली की खुलेआम बिक्री हो रही है। प्रशासनिक निगरानी की कमी से नियमों की अनदेखी लगातार जारी है।
02 खुले में मांस लटकाकर बेचा जा रहा है, जिससे मक्खियां और गंदगी फैल रही है। इससे आसपास रहने वाले लोगों को बदबू और संक्रमण का खतरा झेलना पड़ रहा है।
03 वधशाला की स्थिति जर्जर है और वहां स्वच्छता मानकों का पालन नहीं होता। अपशिष्ट निस्तारण की समुचित व्यवस्था नहीं होने से गंदगी फैलती है।
04 निरीक्षण अभियान नियमित नहीं चलाए जाते, जिससे दुकानदार लापरवाह बने रहते हैं। जुर्माना और कार्रवाई की प्रक्रिया भी प्रभावी नहीं दिखती।
05 लाइसेंस प्रक्रिया जटिल और खर्चीली बताई जाती है, जिससे छोटे दुकानदार पीछे हट जाते हैं। पारदर्शिता की कमी से अव्यवस्था बनी हुई है।
सुझाव
01 नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग संयुक्त रूप से नियमित निरीक्षण अभियान चलाएं। हर दुकान का लाइसेंस और स्वच्छता प्रमाणन अनिवार्य किया जाए।
02 शहर में अत्याधुनिक और मानक अनुरूप नया बूचड़खाना स्थापित किया जाए। वहां से प्रमाणित मांस की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
03 दुकानदारों को स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा मानकों पर प्रशिक्षण दिया जाए। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त जुर्माना लगाया जाए।
04 लाइसेंस प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और कम खर्चीला बनाया जाए। ऑनलाइन आवेदन और समयबद्ध स्वीकृति की व्यवस्था लागू की जाए।
05 बाजार क्षेत्रों में अपशिष्ट प्रबंधन और नियमित सफाई की स्थायी व्यवस्था हो। नागरिकों की शिकायत दर्ज करने के लिए हेल्पलाइन या पोर्टल शुरू किया जाए।
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हमारी भी सुनें
शहर में खुलेआम मांस-मछली की बिक्री जिस तरह सड़कों पर हो रही है, वह चिंताजनक है। दुर्गंध और गंदगी से आसपास रहने वाले परिवार परेशान हैं। प्रशासन को चाहिए कि लाइसेंस व्यवस्था को सख्ती से लागू करे, लेकिन छोटे दुकानदारों को भी वैकल्पिक व्यवस्था दे। स्वच्छता और रोजगार—दोनों साथ चल सकते हैं, बस इच्छाशक्ति चाहिए।
— महबूब आलम
हम रोज न्यू मार्केट होकर गुजरते हैं। कई जगह बिना ढके मांस टंगा रहता है, मक्खियां भिनभिनाती रहती हैं। यह सिर्फ बदबू नहीं, बीमारी को न्योता है। नगर निगम को नियमित जांच करनी चाहिए। नियम सभी के लिए समान हों, तभी व्यवस्था सुधरेगी।
— राम लखन साह
मांस बेचने वालों की भी मजबूरी समझनी चाहिए, लेकिन सार्वजनिक स्थानों पर अस्वच्छ तरीके से बिक्री गलत है। अगर आधुनिक बूचड़खाना बने और वहां से प्रमाणित मांस मिले, तो दुकानदारों और ग्राहकों दोनों को लाभ होगा। आधा-अधूरा नियंत्रण समाधान नहीं है।
— महेंद्र मंडल
हमारे मोहल्ले में नाली के पास कटाई होती है। बच्चे उसी रास्ते से स्कूल जाते हैं। यह स्थिति बदलनी ही चाहिए। स्वास्थ्य से समझौता कर कोई विकास संभव नहीं। प्रशासन को चेतावनी देकर नहीं, कार्रवाई करके दिखाना होगा।
— सरयुग महतो कुशवाहा
समस्या का हल टकराव में नहीं, नीति में है। लाइसेंस प्रक्रिया आसान की जाए और स्वच्छता मानक स्पष्ट हों। जो नियम माने, उसे संरक्षण मिले; जो न माने, उस पर दंड लगे। शहर को साफ रखना हम सबकी जिम्मेदारी है।
— आनंद कुमार आजाद
खुले में मांस बेचने से संक्रमण का खतरा बढ़ता है। फूड सेफ्टी विभाग को सक्रिय होना चाहिए। सिर्फ कागजी आदेश से काम नहीं चलेगा। नियमित निरीक्षण और दंडात्मक कार्रवाई जरूरी है, ताकि लोगों का भरोसा बना रहे।
— मो. एहतशाम
शहर की छवि भी दांव पर है। बाहर से आने वाले लोग जब बाजार में ऐसी गंदगी देखते हैं, तो गलत संदेश जाता है। प्रशासन और व्यापारियों को मिलकर स्वच्छ बाजार मॉडल तैयार करना चाहिए। यह आधुनिक शहर की पहचान होगी।
— प्रणव
महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। घर तक बदबू आती है और बच्चों के स्वास्थ्य की चिंता अलग। हम चाहते हैं कि साफ-सुथरी दुकानों से ही खाद्य सामग्री मिले। निगरानी व्यवस्था मजबूत होनी चाहिए।
— उर्मिला
अगर नियम पहले से बने हैं तो उनका पालन क्यों नहीं हो रहा? पारदर्शिता की कमी दिखती है। लाइसेंसधारी दुकानों की सूची सार्वजनिक होनी चाहिए, ताकि लोग भी जागरूक होकर खरीदारी करें।
— कुमारी मिल्की
स्कूल जाते समय कई बार रास्ता बदलना पड़ता है। खुले में कटाई देखकर असहज महसूस होता है। शहर में स्वच्छता अभियान सिर्फ पोस्टर तक सीमित नहीं रहना चाहिए, जमीन पर असर दिखना चाहिए।
— निशु कुमारी
व्यापार जरूरी है, पर नियमों के दायरे में। अगर बूचड़खाना जर्जर है तो उसे दुरुस्त करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। जब तक मूल ढांचा ठीक नहीं होगा, सड़क किनारे अव्यवस्था खत्म नहीं होगी।
— राजेश कुमार
हम चाहते हैं कि दुकानदारों को भी प्रशिक्षण दिया जाए—स्वच्छता, अपशिष्ट प्रबंधन और भंडारण के बारे में। जागरूकता से ही सुधार संभव है। केवल छापेमारी से स्थायी समाधान नहीं निकलेगा।
— कुमार गौरव
यह मुद्दा राजनीति से ऊपर उठकर देखना होगा। नागरिकों की सेहत प्राथमिकता होनी चाहिए। नियमित सैंपल जांच और सार्वजनिक रिपोर्टिंग से पारदर्शिता आएगी। तभी लोग भरोसे के साथ खरीदारी कर पाएंगे।
— सुबोध कुमार सिंह
शहर तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन व्यवस्थाएं पुरानी हैं। आधुनिक वधशाला और तय मानकों वाली दुकानों की व्यवस्था की जाए। अगर अभी कदम नहीं उठाया गया तो समस्या और विकराल होगी।
— नंदन कुमार यादव
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जिम्मेदार
मांस-मछली दुकानों की जांच के लिए अभियान चलाने का निर्णय लिया गया है। बिना वैध लाइसेंस संचालित दुकानों को नोटिस जारी किया जाएगा आधुनिक वधशाला के प्रस्ताव पर भी विचार चल रहा है। साथ ही, लाइसेंस प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने की दिशा में ठोस पहल की जाएगी।
-संतोष कुमार, नगर आयुक्त, कटिहार
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