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बोले भागलपुर: हरियाली घटने से बढ़ रहा वायु प्रदूषण, कम हो रहा भूजल स्तर

बोले भागलपुर: हरियाली घटने से बढ़ रहा वायु प्रदूषण, कम हो रहा भूजल स्तर

संक्षेप:

भागलपुर में तेजी से घटती हरियाली और बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर लोगों ने चिंता जताई है। विशेषज्ञों का कहना है कि अंधाधुंध शहरीकरण और पेड़ों की कटाई के कारण शहर का पर्यावरण खराब हो रहा है। इससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं और भूजल स्तर भी गिर रहा है।

Nov 14, 2025 06:03 pm ISTYogendra Rai हिन्दुस्तान, भागलपुर
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शहर के लोगों ने जहां भागलपुर में तेजी से घट रही हरियाली पर चिंता जताई। वहीं, तेजी से बढ़ रहे वायु प्रदूषण को लेकर भी मुखर हुए। टीएमबीयू के पूर्व प्राध्यापक व जीव विज्ञानी डॉ. तपन कुमार घोष ने कहा कि 20 वर्ष पहले तक शहर काफी हरा भरा था। हर तरफ तरह-तरह के पेड़ दिखते थे। खासकर दक्षिणी क्षेत्र व गंगानदी के किनारे पेड़ों व झुरमुटों की भरमार थी। बढ़ते शहरीकरण के कारण जहां अबतक अनगिनत पेड़ काट दिए गए हैं। वहीं कई तालाब को भरकर उसपर कॉलोनी बसा दी गई है।

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सैंडिस कंपाउंड में टहलने के लिए शहर के जाने माने डॉक्टरों व बुजुर्गों के साथ शहर में घटती हरियाली व बढ़ता प्रदूषण विषय पर हिन्दुस्तान के बोले भागलपुर अभियान के तहत संवाद का आयोजन किया गया। डॉक्टरों और बुजुर्गों ने कहा कि सैंडिस कंपाउंड के चारों ओर के इलाके व इससे सटे कटहल बाड़ी, छोटी खंजरपुर, खिरनीघाट, कोयला घाट, तिलकामांझी, इशाकचक, छत्रपति पोखर, शीतला स्थान चौक, मिरजानहाट से अलीगंज तक कई बगीचे थे। हवाई अड्डा से सटे सच्चिदानंदनगर, नीलकंठनगर, विक्रमशिला कॉलोनी, शिवपुरी कॉलोनी व अन्य मोहल्ले सैकड़ों आम के पेड़ को काटकर बसाया गया है। इससे सटे गोपालपुर इलाके में भी पेड़ों की भरमार थी। लेकिन अब सिर्फ घर ही घर नजर आते हैं, कहीं भी बाग-बगीचे नहीं दिखते हैं। इससे शहर से कई जीव जंतु विलुप्त हो गए हैं। साथ ही शहर की आबोहवा लगातार प्रदूषित हो रही है। भागलपुर अब देश के सबसे प्रदूषित शहरों में शुमार हो गया है। शहर में सांस व एलर्जी के रोगी काफी बढ़ गए हैं। हवा के साथ-साथ जमीन भी प्रदूषित हो रही है।

पेड़ कम होने से भूजल स्तर गिर रहा

संवाद में डॉ. आरके गुप्ता ने कहा कि पहले तिलकामांझी से जेल रोड व जीरोमाइल तक दोनों ओर कई विशाल पेड़ दिखते थे। लेकिन पेड़ों की जड़ों में शहर का कूड़ा डंपिंग के कारण पेड़ धीरे-धीरे सूखते चले गए। यही स्थिति चंपापुल व दोगच्छी के बीच है। कूड़ा को जलाकर इसे नष्ट किया जा रहा है। इस तरफ भी कई पेड़ सूखकर ठूंठ बन गए। वहीं अलीगंज की ओर जाने पर भी कई पेड़ अब नजर नहीं आते हैं। बेहतर तरीके से कचरे का प्रबंधन नहीं करने के कारण सड़क किनारे के सैकड़ों पेड़ अब खत्म हो गए हैं। लगातार घटती हरियाली के कारण शहर का भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है। पहले पेड़ की जड़ें गहराई से जल को खींचती थी। पेड़ नहीं रहने से गर्मियों में वाटर लेवल काफी गिर जाता है। पांच साल पहले तक घरों में बोरिंग कराने के लिए 350 फीट ड्रिल करना पड़ता था। लेकिन अब लोग अगले एक दशक को ध्यान में रखकर 400 से 450 फीट बोरिंग करा रहे हैं। उन्होंने बताया कि यही हाल रहा तो 2030 तक लोग 500 फीट बोरिंग कराएंगे। वहीं गर्मियों में 350 फीट वाले बोरिंग या तो सूख जाएंगे, या इससे पानी बहुत कम निकलेगा।

भागलपुर पहले प्राकृतिक रूप से काफी समृद्ध था

जेएलएनएमसीएच के सर्जरी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. चंद्रमौली उपाध्याय ने बताया कि भागलपुर पहले प्राकृतिक रूप से काफी समृद्ध था। समय के साथ-साथ यहां की हरियाली धीरे-धीरे कम होती चली गई। पेड़-पौधे की संख्या घटने के कारण यहां की हवा शुद्ध नहीं हो पाती है। योजनाबद्ध तरीके से शहरी बसावट नहीं होने के कारण जगह-जगह वाहनों के जाम लगते हैं। सड़क पर हर समय धुएं व धूल का गुबार उड़ता रहता है। सड़क से सटी आबादी भी इस समस्या को झेल रही है। शहर में अगर पेड़ों की संख्या बढ़ाई जाए तो समस्या काफी हद तक कम हो सकती है। पहले सड़कों के किनारे शहर में जगह-जगह पेड़ थे। बढ़ते ट्रैफिक लोड के कारण मजबूरीवश सड़क की चौड़ाई बढ़ाई गई। इस कारण कई पेड़ आधुनिकता की भेंट चढ़ गए। उन्होंने बताया कि हम ऑक्सीजन गैस सांस लेते हैं। वहीं पेड़ से पर्यावरण में काफी मात्रा में ऑक्सीजन मिलती है। अगर हमें अपनी सांस का ख्याल रखना है तो पेड़- पौधों का भी ख्याल जरूर रखना होगा। पेड़-पौधों की उपज बढ़ाने के लिए वाटर हार्वेस्टिंग एक बेहतर विकल्प हो सकता है।

कंस्ट्रक्शन पर लगाम लगाना जरूरी

शहर में बिल्डिंग बनने का सिलसिला और तेज हो गया है। इस बीच पेड़ के लिए कोई जगह नहीं बच रही है। सरकार इसके लिए गाइडलाइन लाए। हर आवासीय क्षेत्र में पेड़ लगाने का नियम बने। कॉलोनी में पेड़-पौधों के लिए अलग से जगह तय किए जाएं। रोड व भवन समेत अन्य तरह के कंस्ट्रक्शन के कारण वायु प्रदूषित हो रही है। भवन को बनाने के दौरान धूल से बचाव के लिए इन्हें कवर नहीं किया जाता है। इससे भी वायु प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। पेड़ की कमी के कारण लोगों के स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ रहा है। शोध से पता चला है कि साफ हवा में रहने वाले लोग प्रदूषित शहर में रहने वाले की तुलना में लंबा जीवन जीते हैं। उन्होंने बताया कि शहरी क्षेत्र में अब आवास की बजाय हरियाली बढ़ाने पर जोर देना चाहिए। शहर के बाहरी हिस्से में कॉलोनी बसाई जाए। अस्पताल, कोर्ट-कचहरी, विश्वविद्यालय व कॉलेज समेत बस व रेलवे स्टेशन को शहरी क्षेत्र से दूर ले जाना चाहिए। इससे भी शहर पर ट्रैफिक व आबादी का दबाव कम होगा।

घर की छतों पर बढ़ाएं हरियाली, होगी भरपाई

संवाद में डॉ. रवींद्र सिंह ने कहा कि शहर में अब पेड़ लगाने के लिए जगह कम बचे हैं। खाली जमीन पर आवासीय व कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स बनाए जा रहे हैं। इस दौरान अगर कोई पेड़ रास्ते में आता है तो उसे काटकर गिरा दिया जाता है। अब लोगों को आगे आकर शहर की हरियाली को बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए। इसके लिए घर की छतों पर गमले व टैंक में पौधे लगाने की प्रवृत्ति बढ़ानी होगी। ऐसे प्रयासों से भी हम हवा को साफ-सुथरा रखने में एक कदम आगे बढ़ा सकते हैं। उन्होंने कहा कि छतों पर बागवानी को बढ़ावा देने के लिए सरकारी स्तर से मदद भी दी जाती है। लोग अपनी छतों पर नींबू जैसे मध्यम आकार वाले पौधे भी लगा रहे हैं। वहीं फूल व सब्जियों का उत्पादन भी किया जा रहा है। इससे लोगों को आर्गेनिक सब्जियां उगाने में सहूलियत होगी। इसके सेवन से लोगों के स्वास्थ्य में भी सुधार होगा, वहीं हर सीजन में पैसे की भी बचत होगी। बाजार में मिलने वाली सब्जियों में पेस्टिसाइड की भरमार रहती है। इसके सेवन से हमारा स्वास्थ्य भी बिगड़ता है।

बिना पेड़ काटे की जाए शिफ्टिंग

बीते एक दशक से शहर में जगह-जगह पौधरोपण कर रहे समाजसेवी संजय कुमार चक्रवर्ती ने बताया कि अगर कहीं पर सड़क या बिल्डिंग बन रहा हो तो वहां पर पेड़ को काटने की बजाय उसे मशीन से उखाड़कर दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया जाए। इसके लिए नगर निगम प्रशासन को मशीन की खरीदारी करनी चाहिए। देखने को मिलता है कि विशाल पेड़ों को मशीन से आसानी से शिफ्ट कर दिया जाता है। इससे पेड़ को नुकसान भी नहीं पहुंचता है। साथ-साथ पर्यावरण को भी क्षति नहीं पहुंचती है। पहले शहर में पेड़ की भरमार थी। नई-नई कॉलोनियां बसाने के चक्कर में पेड़ों को काट दिया गया। शहर से सटे पंचायतों में इस समय कई कॉलोनी बस रही है। जमीन की मुंहमांगी कीमत के कारण इन पेड़ों की बलि चढ़ रही है। सरकार को ऐसा नियम बनाना चाहिए कि पर्यावरण को नुकसान भी नहीं पहुंचे, वहीं आमलोगों की बसावट भी बेहतर तरीके से हो जाए। घरों के आसपास पेड़ रहने से लोगों को स्वच्छ हवा में सांस लेने का अवसर मिलेगा। पेड़ के अभाव में घर का तापमान भी गर्मी में काफी बढ़ जाता है। इससे बचने के लिए लोग एसी, पंखे व कूलर जैसे बिजली खपत वाले उपकरणों को लगाते हैं। वहीं एसी से निकलने वाला क्लोरो फ्लोरो कार्बन से वायु प्रदूषण फैलता है।

शहर में हरियाली तेजी से घट रही है। इसका दुष्प्रभाव शहर की आबादी पर पड़ता जा रहा है। दिनोंदिन रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है। इसका मुख्य कारण शहर में बढ़ता प्रदूषण है। इसपर रोकथाम की जरूरत है।

-डॉ. आरके ठाकुर

एक दशक के बाद वायु समेत हर तरह के प्रदूषण की स्थिति और भी गंभीर हो जाएगी। यही समय है जब हमें सामुदायिक व सरकारी स्तर पर प्रयास करने होंगे। अब भी हम नहीं चेते तो बहुत देर हो जाएगी।

-डॉ. तपन कुमार घोष

भविष्य की चिंता करते हुए हमें अभी से ही पहल करनी होगी। दो दशक बाद काफी देर हो चुकी होगी। बिगड़ते वातावरण के हम सभी जिम्मेदार हैं। इसकी भरपाई के लिए ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाने की जरूरत है।

-नरेंद्र कुमार

आमलोगों को पर्यावरण की सुरक्षा के लिए आगे आना होगा। कम्युनिटी स्तर पर जागरूकता फैलाने की जरूरत है। पर्यावरण बचेगा तब ही जीव जंतु बच पाएंगे। बिना पेड़-पौधे के जीवन की कल्पना नहीं कर सकते हैं।

-डॉ. चंद्रमौली उपाध्याय

पेड़ पौधों के कम होने का पहला असर वायु प्रदूषण के रूप में दिख रहा है। इससे लोगों का स्वास्थ्य तेजी से बिगड़ रहा है। वहीं लोगों को पेयजल की समस्या हो रही है। धरती का भूजल स्तर तेजी से नीचे गिरता जा रहा है।

-डॉ. रवींद्र सिंह

आज के समय में हर व्यक्ति को यह समझना होगा कि पृथ्वी हमारी नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की भी है। यदि हम आज हरियाली को बचाएंगे, तो कल हमारी धरती फिर से स्वच्छ, सुंदर और जीवनदायिनी बन सकेगी।

-ओम प्रकाश मिश्रा

हमें अधिक से अधिक वृक्षारोपण करना चाहिए, पुराने पेड़ों की रक्षा करनी चाहिए। औद्योगिक प्रदूषण को नियंत्रित करने के सख्त नियम लागू करने चाहिए। साथ ही, प्लास्टिक के स्थान पर पर्यावरण–हितैषी वस्तुओं का प्रयोग बढ़ाना चाहिए।

-राजा मिश्रा

आज के समय में घटती हरियाली और बढ़ता प्रदूषण हमारे पर्यावरण के सामने सबसे बड़ी चुनौती बन चुकी है। जिस धरती ने हमें जीवन दिया, वही आज मानव की लापरवाही और स्वार्थ के कारण कराह रही है।

-डॉ. शैलेश चंद्र झा

विकास की दौड़ में हमने जंगल काटे, नदियों को गंदा किया, और हवा में ज़हर घोल दिया। इसका परिणाम है कि तापमान लगातार बढ़ रहे हैं। घटती वर्षा फसलों का उत्पादन कम रहा है और बीमारियों का बढ़ता खतरा अलग।

-प्रताप रजक

पहले शहर व आसपास के गांव हरियाली से भरे रहते थे। पेड़ों की छाया, पक्षियों की चहचहाहट, और स्वच्छ हवा हमारे जीवन का हिस्सा थी। लेकिन आज आधुनिकता की आड़ में पेड़ों को काटकर कंक्रीट के जंगल खड़े किए जा रहे हैं।

-उमेश प्रसाद

घटती हरियाली का सीधा असर जलवायु पर पड़ रहा है। पेड़ कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर ऑक्सीजन देते हैं, लेकिन पेड़ों के कम होने से हवा में कार्बन की मात्रा बढ़ रही है। इससे ग्लोबल वार्मिंग जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो रही हैं।

-अरुण प्रसाद

मिट्टी का कटाव, जलस्तर में गिरावट और जैव-विविधता का नष्ट होना भी घटती हरियाली के दुष्परिणाम हैं। इस स्थिति से निपटने के लिए हमें तुरंत कदम उठाने होंगे। हमें अधिक से अधिक वृक्षारोपण करना चाहिए, पुराने पेड़ों की रक्षा करनी चाहिए।

-राम प्रसाद चौधरी

विकास की अंधी दौड़ में हम अपनी धरती की हरी चादर को तेजी से खोते जा रहे हैं। आधुनिकता और औद्योगिकीकरण ने जहाँ हमें सुविधाएं दी हैं, वहीं पर्यावरण का संतुलन भी गंभीर रूप से बिगाड़ दिया है।

-पंकज चौधरी

घटती हरियाली और बढ़ता प्रदूषण आज केवल एक पर्यावरणीय मुद्दा नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गया है। पेड़ कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर ऑक्सीजन देते हैं, इसे बचाना होगा।

-संजय कुमार चक्रवर्ती

पहले जहां गांव-शहरों के चारों ओर हरियाली दिखाई देती थी, वहीं आज कंक्रीट के जंगल उग आए हैं। क्षों की अंधाधुंध कटाई से न केवल जैव-विविधता प्रभावित हो रही है, बल्कि जलवायु परिवर्तन की रफ्तार भी तेज़ हो गई है।

-श्रेष्ठ

हरियाली और स्वच्छ पर्यावरण ही जीवन की बुनियाद हैं। यदि हमने अभी भी प्रकृति के साथ तालमेल नहीं बिठाया, तो आने वाली पीढ़ियां एक बीमार और निर्जीव धरती विरासत में पाएंगी। हमें याद रखना होगा कि धरती हमारी नहीं, हम धरती के हैं।

-कबीर

समस्याएं

1. पेड़ों की अंधाधुंध कटाई- शहरीकरण और उद्योगों के विस्तार के कारण हर साल लाखों पेड़ काटे जा रहे हैं, जिससे हरियाली लगातार घट रही है।

2. वायु प्रदूषण- वाहनों, कारखानों और बिजलीघरों से निकलने वाला धुआँ हवा को जहरीला बना रहा है।

3. जल और मिट्टी प्रदूषण- औद्योगिक कचरा, रासायनिक खाद और प्लास्टिक के कारण नदियाँ और भूमि प्रदूषित हो रही हैं।

4. ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन- हरियाली घटने और प्रदूषण बढ़ने से तापमान में वृद्धि, अनियमित वर्षा और प्राकृतिक आपदाएं बढ़ रही हैं।

5. स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव- प्रदूषित वातावरण के कारण अस्थमा, एलर्जी, हृदय रोग और अन्य श्वसन संबंधी बीमारियाँ तेजी से बढ़ रही हैं।

सुझाव

1. वृक्षारोपण और संरक्षण- प्रत्येक व्यक्ति को साल में कम-से-कम एक पेड़ अवश्य लगाना चाहिए और उसकी देखभाल करनी चाहिए।

2. औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण- कारखानों में प्रदूषण-नियंत्रक उपकरणों का प्रयोग अनिवार्य किया जाए और कचरे का सही निस्तारण हो।

3. पर्यावरण–अनुकूल परिवहन- सार्वजनिक परिवहन, साइकिल और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दिया जाए।

4. प्लास्टिक पर नियंत्रण- एकल-उपयोग प्लास्टिक पर सख्त प्रतिबंध लगाया जाए और पर्यावरण–हितैषी विकल्प अपनाए जाएँ।

5. जनजागरूकता और शिक्षा- स्कूलों, कॉलेजों और समाज में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता अभियान चलाए जाएँ ताकि हर व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी समझे।

बोले जिम्मेदार

भागलपुर वन प्रमंडल की ओर से लगातार पौधरोपण अभियान चलाया जा रहा है। बीते पांच वर्षों में भागलपुर समेत आसपास के जिलों में पेड़ों की संख्या बढ़ी है। आने वाले समय में विभाग की पहल का असर और देखने को मिलेगा।

-रूपम कुमार सिंह, रेंज ऑफिसर, भागलपुर वन प्रमंडल कार्यालय

प्रस्तुति: गौतम वेदपाणि, फोटोग्राफ: कान्तेश