
आस्था से राजनीति तक, प्रत्याशी बना रहे छठ पर्व को वोट का अवसर
संक्षेप: बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान छठ पूजा प्रत्याशियों के लिए जनता से जुड़ने का बड़ा माध्यम बन गई है। भागलपुर सहित अन्य क्षेत्रों में प्रत्याशी छठ घाटों और तालाबों पर प्रवासी मतदाताओं सहित हजारों लोगों से मिलकर अपने पक्ष में समर्थन जुटाने की व्यापक योजना बना रहे हैं।
बिहार में विधानसभा के चुनावी माहौल के बीच आस्था का महापर्व ‘छठ पूजा’ प्रत्याशियों के लिए जनता से सीधे जुड़ने का एक बड़ा माध्यम बनने जा रहा है। छठ पूजा को केवल एक धार्मिक अनुष्ठान के रूप में न देखकर, इसे वोटरों के बीच अपनी पहुंच बनाने के एक सुनहरे अवसर के रूप में देखा जा रहा है। कुछ ऐसा ही हाल भागलपुर में है, जहां सभी दल और निर्दलीय प्रत्याशी अब लोगों से जुड़ने के लिए छठ पर्व का इंतजार कर रहे हैं।
मौका खास इसलिए भी है क्योंकि हजारों की संख्या में प्रवासी बिहारी भी इस पर्व पर अपने घर पहुंचे होंगे और उनसे भी इसी छठ घाट पर मुलाकात कर अपने दावे को मजबूत बनाएंगे। घाटों पर जनता के बीच जाने का प्लान कई राजनीतिक दलों के प्रत्याशी छठ के बहाने नदी घाटों और अस्थायी तालाबों पर जनता के बीच जाने की व्यापक योजना बना रहे हैं। यह एक ऐसा मौका होता है जब बड़ी संख्या में लोग, जिनमें प्रवासी मतदाता भी शामिल होते हैं, एक साथ एकत्रित होते हैं।
घाटों पर साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था, पानी और चिकित्सा सुविधाओं की व्यवस्था में हाथ बंटाकर या उनकी देखरेख करके प्रत्याशी न केवल अपनी सक्रियता दिखा सकते हैं, बल्कि छठ व्रतियों और उनके परिजनों से सीधा संवाद भी स्थापित कर सकते हैं। छठ के पारंपरिक गीत और धुनों को भी प्रचार में इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे भावनात्मक जुड़ाव मजबूत हो सके। घर-घर प्रसाद पाने की योजना छठ पर्व के समापन, यानी पारण के दिन कई प्रत्याशी घर-घर जाकर प्रसाद ग्रहण करने की योजना बना रहे हैं। इस तरह छठ पूजा इस चुनावी दौर में आस्था, संस्कृति और सियासत का एक अनूठा संगम बनने जा रही है।

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