Bhagalpur News: वायु प्रदूषण से होने वाली बीमारियों की स्क्रीनिंग और इलाज के लिए चेस्ट क्लीनिक
Bhagalpur News: सदर और मायागंज अस्पताल में होगा इलाज, मरीजों की होगी स्क्रीनिंग राज्य स्वास्थ्य समिति

Bhagalpur News: भागलपुर, वरीय संवाददाता। वायु प्रदूषण से होने वाली बीमारियों के इलाज के लिए सदर और मायागंज अस्पताल में चेस्ट क्लीनिक की शुरुआत होगी। इससे संबंधित अधिसूचना राज्य स्वास्थ्य समिति ने जारी की। बीमारियों की स्क्रीनिंग और उपचार के लिए भागलपुर समेत राज्य के सभी जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज अस्पताल में चेस्ट क्लीनिक चलेगी। आमतौर ठंड बढ़ने पर अक्टूबर से फरवरी तक वायु प्रदूषण सर्वाधिक रहता है। इन चार महीना के दौरान चेस्ट क्लीनिक द्वारा वायु प्रदूषण से संबंधित सभी बीमारियों की रिपोर्टिंग प्रतिदिन की जाएगी। जिला गैर संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. पंकज कुमार मनस्वी के अनुसार चेस्ट क्लीनिक के माध्यम से वायु प्रदूषण से संबंधित बीमारियों के रिस्क फैक्टर को जानने के लिए मरीजों की स्क्रीनिंग की जाएगी। रोगियों में संभावित कारणों की पहचान होगी। मानक के अनुसार रोगियों की देखभाल की जाएगी। साथ ही वायु प्रदूषण से संबंधित बीमारियों के निदान के लिए स्वस्थ आदतों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
एनसीडी क्लीनिक से लिंक किया जाएगा
जिला स्तर पर चेस्ट क्लीनिक को गैर संचारी रोगों की स्क्रीनिंग व इलाज करने वाली एनसीडी क्लीनिक से लिंक किया जाएगा। जिला अस्पताल और अनुमंडलीय अस्पताल स्तर पर उपाधीक्षक और मेडिकल कॉलेज व अस्पताल स्तर पर अधीक्षक नोडल पदाधिकारी नामित किए जाएंगे। मेडिकल कॉलेज में चेस्ट क्लीनिक को टीबी एंड चेस्ट विभाग से लिंक किया जाएगा। यहां पर उच्च जोखिम वाले मरीजों की पहचान कर इनकी सूची तैयार की जाएगी। ऐसे मरीजों को पीएचसी व सीएचसी से जोड़कर नियमित फॉलोअप किया जाएगा। चेस्ट क्लीनिक में दवाओं और उपकरणों की सूची मानक के अनुसार तैयार की जाएगी।
सांस और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियां हो रहीं
ठंड के मौसम में हर साल भागलपुर जिला में वायु प्रदूषण की स्थिति बिगड़ जाती है। भागलपुर देश के टॉप वायु प्रदूषित शहरों में शामिल हो जाता है। इनमें अस्थमा बीमारी दूषित हवा और हवा में मौजूद सूक्ष्म कण, सांस फूलना और दमा का अटैक आना, सीओपीडी यानी क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज है। सीओपीडी में फेफड़ों के वायुमार्ग में सूजन आ जाती है। वहीं ब्रोंकाइटिस और निमोनिया के कारण फेफड़ों में संक्रमण और लगातार खांसी की समस्या बनी रहती है। फेफड़ों का कैंसर भी जहरीले रसायनों और प्रदूषण के लंबे समय तक संपर्क में रहने से होता है।


