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बोले जमुई : चार्जिंग प्वाइंट नहीं होने से आमदनी हो रही है कम

बोले जमुई : चार्जिंग प्वाइंट नहीं होने से आमदनी हो रही है कम

संक्षेप:

जमुई शहर में टोटो रिक्शा यात्रियों के लिए सुविधाजनक हैं, लेकिन चालकों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। चार्जिंग प्वाइंट की कमी, स्टैंड न होना और अत्यधिक शुल्क वसूली से चालकों की स्थिति खराब हो रही है। इन समस्याओं के समाधान के लिए उचित व्यवस्था की आवश्यकता है।

Dec 03, 2025 12:25 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, भागलपुर
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-प्रस्तुति, राजीव कुमार

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शहर में अब टोटो रिक्शा लोगों के लिए सुलभ साधन बन गया है। शहर में कहीं भी जाना हो सड़क पर जाते ही आपको टोटो दिख जाएगा, लेकिन यही टोटो अब जाम का कारण भी बनते जा रहे हैं। हालांकि इसमें टोटो चालक की भी गलती नहीं है। इनके लिए कही स्टैंड नहीं बना है नतीजा होता है कि सड़क पर ही खड़ा कर ये सवारी बैठाते हैं। जमुई शहर में रोजाना एक हजार से अधिक टोटो चलते हैं। मतलब एक हजार ई-रिक्शा से एक हजार परिवारों का पेट चलता है। लेकिन, इन चालकों की दुश्वारियां भी कम नहीं हैं। सबसे अधिक परेशानी शहर में चार्जिंग प्वाइंट नहीं रहने से चालकों को हो रही है। चालकों के लिए रिफ्रेशमेंट रूम तो दूर की बात, पानी और शौचालय तक की व्यवस्था नहीं है। इसी बदहाल व्यवस्था के बीच ये चालक काम करने को विवश हैं। यात्री शेड भी नहीं है। इस कारण आए दिन यात्रियों के नखड़े व उनके विरोधों का खामियाजा भी चालकों को भुगतना पड़ता है। हद तो यह कि इनके लिए एक भी स्टैंड तक नहीं है। सड़क किनारे या चौक-चौराहों पर ही टोटो लगाना पड़ता है। चालकों के लिए बीमा और सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं है। खैरा, सोनो, चकाई, लक्ष्मीपुर, अलीगंज, गिद्धौर, बरहट जैसे प्रखंड मुख्यालयों व बाजारों में ई-रिक्शा वाहनों की संख्या काफी बढ़ी है। उनके लिए चार्जिंग की व्यवस्था सबसे बड़ी परेशानी बनी हुई है। चार्जिंग नहीं हो पाने से कई बार चालकों को वाहनों को घर तक ले जाना मुश्किल हो जाता है। चालक दिनभर दौड़-धूप का काम करते हैं। ऐसे में दोपहर में खाना खाने या आराम करने के लिए कहीं भी रिफ्रेंशमेंट रूम जैसी कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में टोटो ही उनका एकमात्र सहारा है। महिसौड़ी के दिनेश गुप्ता कहते हैं कि वे शहर में 10 साल से टेंपो चला रहे हैं। पहले रोजाना 10 रुपए लिया जाता है। लेकिन, सुविधा कुछ भी नहीं मिलती है। एक बार चलाएं या चार बार 10 रुपए तो देना ही पड़ता है। कई बार बीच में चार्जिंग खत्म होने पर निजी गैराज का सहारा लेना पड़ता है। वहां एक घंटा चार्ज करने का 30 रुपए लिया जाता है। किसी कारणवश रात में ठहरना पड़ता है, तब पूरा चार्ज करने का 70 रुपए भरना पड़ता है। शहर में टोटो की संख्या बढ़ने से कमाई भी कम होती है। जबकि, चार्ज करने के लिए अधिक पैसे देने पड़ते हैं। इससे बचत नहीं हो पाती है। कई बार तो दिनभर चलाने के बाद भी 200 रुपए तक कमाई नहीं हो पाती है। जमुई शहर में ई-रिक्शा का संघ नहीं होने के कारण चालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि एक साल पूर्व ई-रिक्शा का संघ मौजूद था लेकिन किसी कारणवश संघ को भंग कर दिया गया है। लगातार बस स्टैंड का मनमानी चालकों पर देखने को मिलता है। आये दिन चालकों के साथ मारपीट की भी घटना सामने आती है। लेकिन संघ नहीं होने के कारण चालक अपनी आवाज नहीं उठा पाते है।

स्टैंडों पर रसीद से अधिक राशि वसूली जाती है

नगर परिषद में चलने वाले ई-रिक्शा चालकों को नगर परिषद में दिन भर चलने के लिए 200 रुपए तक की राशि विभिन्न बस स्टैंडों के संचालकों को देना पड़ता है। ई-रिक्शा चालक बताते हैं कि महिसौड़ी बस स्टैंड में उन लोगों से 50 रुपए वसूल किया जाता है कि जबकि रसीद 30 रुपए का मिलता है। यहीं हाल झाझा बस स्टैंड में भी किया जाता है, जहां ई-रिक्शा चालकों से 30 रुपए लिया जाता है और रसीद 10 रुपया का ही दिया जाता है। वहीं अगर स्टेडियम के समीप मौजूद स्टैंड की बात करें तो इस स्टैंड में प्रत्येक टीप 20 रुपए ई-रिक्शा चालकों से वसूल किया जाता है और रशीद भी नहीं दिया जाता है। वहीं खैरा से गरही जाने के दौरान पड़ने वाले ललदहिया गांव के समीप ई-रिक्शा चालकों से जबरन 30 रूपया वसूल कर लिया जाता है। अगर कोई चालक राशि देने से मना किया तो स्टैंड संचालकों के आदमी चालकों की पिटाई करने से पीछे नहीं रहते है।

शिकायत

1. ई-रिक्शा के लिए स्टैंड नहीं होने के कारण वे लोग सड़क किनारे वाहन को लगाने के लिए मजबूर है।

2. शहर में एक भी चार्जिंग प्वाइंट नहीं होने के कारण प्राइवेट चार्जिंग प्वाइंट वालों की चांदी कट रही है और चालकों का अर्थिक दोहन हो रहा है।

3. यात्री शेड और स्टैंड नहीं होने के कारण अक्सर चालकों के साथ होती रहती है झड़प

4. बीमा और स्वास्थ्य सेवाओं से चालक अनजान हैं। इसमें कभी भी दुर्घटना व मारपीट होने पर चालकों को काफी नुकसान उठाना पड़ता है।

5. ई-रिक्शा का संघ नहीं होने के कारण चालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

सुझाव

1. बस स्टैंड परिसर में एक कोने में जगह दी जानी चाहिए। सबसे अधिक यात्री वहीं आते-जाते है।

2. शहर के चारों तरफ एक-एक चार्जिंग प्वाइंट की व्यवस्था अविलंब होनी चाहिए। ताकि चालकों को चार्जिंग करने में अधिक पैसा नहीं देना पड़े

3. चालकों की सुविधा के लिए कम से कम दो रिफ्रेंशमेंट रूम हो, ताकि चालक आराम कर सकें

4. चालकों के लिए बीमा की व्यवस्था की जाए, जिन चालकों को इसके बारे में जानकारी नहीं है। उनके लिए शिविर लगाकर उन्हें जागरूक किया जाए

5. यात्री शेड और स्टैंड के पास कम से कम पानी उपलब्ध हो, इससे यात्रियों को भी सुविधा मिलेगी।

हमारी भी सुनें

शहर के चौक-चौराहों पर सुरक्षा के लिए दर्जनों सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं। बावजूद, अक्सर सड़क किनारे से ई-रिक्शा समेत अन्य वाहनों की चोरी होती रहती है।

- कुंदन यादव

स्टैंड व चार्जिंग प्वाइंट बनने से ऐसे वाहनों की सुरक्षा भी हो सकेगी। चालक वहां रात में भी वाहनों को चार्ज में लगाकर आराम से घर लौट सकते हैं।

-मो. मेराज खान

ई-रिक्शा के लिए शहर में कम से कम तीन प्रमुख जगहों पर चार्जिंग की व्यवस्था होनी चाहिए। वहां घंटा के हिसाब से एक दर तय होनी चाहिए।

-मो. इम्तेयाज खान

जिस दिन सबकुछ सही रहता है, उस दिन शाम तक आराम से 400 से 500 रुपए कमा लेते हैं। अगर बीच में चार्ज खत्म हुई, तो बंटाधार हो जाता है।

-मो. ताजउद्दीन

एक बार चार्ज होने पर 50 से 60 किलोमीटर तक वाहन चलता है। घर से आने जाने में ही 20 किलोमीटर चार्ज खत्म हो जाता है। शाम तक चार्ज खत्म होने का डर बना रहता है।

-मो. जसीम

चालकों को भी पानी, शौचालय, रिफ्रेंशमेंट रूम जैसी व्यवस्था होनी चाहिए। अब तक यहां इस तरह की कहीं भी व्यवस्था नहीं है।

-मो. सेराज

शहर में चार साल से ई रिक्शा चला रहे हैं। लेकिन, अब तक कहीं भी चार्जिंग प्वांयट नहीं बनाया गया। कई बार दोपहर में ही चार्ज खत्म हो जाता है। उस दिन कमाई भी नहीं हो पाती है।

- मो. समीर

चालकों के लिए शहर में कम से कब एक कैंटीन होनी चाहिए। जहां वे बैठकर कम से कम अपना खाना सही से खा सकें। इससे चालकों को काफी सहुलियत होगी।

- मो. जहांगीर

शहर के ई-रिक्शा का संघ नहीं होने के कारण हमलोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई तरह की बात हमलोग नहीं कर पाते है।

- मो. जसीम

रात में भी कई बार रोगियों को लेकर शहर में आना पड़ता है। ऐसे में सार्वजनिक जगहों पर उनके लिए थोड़ी देर ठहरने जैसी सुविधा मिले, तो काफी राहत होगी।

-मो. महमूद

नगर परिषद क्षेत्र में अगर कोई भी ई-रिक्शा दिन भर चलाता है तो उसे दिन भर के लिए दौ रुपया शहर के विभिन्न स्टैंड संचालक को देने पड़ जाता है। जिस कारण ई-रिक्शा चालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

- मो. अफरोज

शहर के स्टेडियम के समीप मौजूद स्टैंड चालकों द्वारा प्रत्येक खेप 20 रुपया लिया जाता है। अगर कोई ई-रिक्शा चालक रशीद की मांग करता है तो उसके साथ मारपीट भी किया जाता है।

- पिंटू कुमार

शहर के महिसौड़ी बस स्टैंड के समीप स्टैंड संचालक द्वारा जबरन 50 रुपया ई-रिक्शा चालकों से लिया जाता है जबकि रशीद मात्र 30 रूपया का ही दिया जाता है।

- रंजय कुमार

नगर परिषद में ई-रिक्शा का संघ नहीं होने के कारण ई-रिक्शा अपनी मांग को स्थानीय प्रशासन के पास नहीं रख पाते है। जिस कारण ई-रिक्शा चालकों के साथ काफी मनमानी होती है और दोहन भी किया जाता है।

- राजेश मांझी

जमुई रेलवे स्टेशन में मौजूद स्टैंड के संचालक द्वारा ई-रिक्शा चालकों के पास काफी मनमानी करते है। वहां के संचालक दिन भर का जहां 80 रुपए लेते है, अगर गलती से अंधेरा होने पर स्टैंड चले गए तो फिर से ई-रिक्शा चालकों से 80 रुपए वसूल किया जाता है।

- बड़को कुमार

शहर के झाझा स्टैंड में ई-रिक्शा का कोई ठहराव भी नहीं होने पर उस मार्ग से गुजरने के एवज में 30 रुपए ई-रिक्शा चालकों को देना पड़ता है। जबकि रशीद 10 रुपए का ही मिलता है

- राजीव कुमार

बोले जिम्मेदार

ई-रिक्शा चालक के वाहन को चार्ज करने के लिए चार्जिंग पॉइंट बनाने से संबंधित अभी तक कोई भी योजना नहीं ली गई है। जिन स्टैंडों के संचालक और कर्मियों के द्वारा तय से अधिक राशि लेने की सूचना मिली है, उन्हें नोटिस की जा रही है।

प्रियंका गुप्ता, कार्यपालक पदाधिकारी, नगर परिषद, जमुई