सहरसा: सतुआइन पर ठंडक और परंपरा का संगम
महिषी में मंगलवार को सतुआइन पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। लोग सत्तू का सेवन करते हैं और एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं। यह पर्व गर्मी की शुरुआत का संकेत है और सत्तू पीने से शरीर को ठंडक मिलती है। जलदान और पर्यावरण संरक्षण की परंपरा भी निभाई जाती है।

महिषी से प्रदीप चौधरी की रिपोर्ट मंगलवार को प्रखंड के विभिन्न गांवों में सतुआइन पर्व हर्षोल्लासपूर्ण वातावरण में मनाया गया। इस अवसर पर लोगों ने पारंपरिक रूप से सत्तू का सेवन किया और एक-दूसरे को पर्व की शुभकामनाएं दीं। मान्यता है कि सतुआइन पर्व गर्मी के आगमन का संकेत देता है और इस दिन सत्तू पीने से शरीर को शीतलता मिलती है। ग्रामीणों ने परंपरा के अनुसार जल से भरे घड़े का दान भी किया, जिसे पुण्यदायी माना जाता है। बिहार की लोक संस्कृति में यह पर्व प्रकृति के साथ जुड़ाव और संतुलन का प्रतीक है। भीषण गर्मी से राहत पाने के लिए सत्तू को सबसे उपयोगी आहार माना जाता है।
बुधवार को प्रखंड क्षेत्र में जुड़शीतल पर्व मनाया जाएगा। इस दिन बुजुर्ग अपने बच्चों के सिर पर जल डालकर आशीर्वाद देते हैं। साथ ही ग्रामीण चौराहों और पेड़-पौधों में जल देकर पर्यावरण संरक्षण की परंपरा निभाते हैं। यह परंपरा आज भी पूरे उत्साह से कायम है।
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