शतरचंद्र के ननिहाल गांगुलीबाड़ी में 262 वर्षों से हो रही जगद्धात्री पूजा

शतरचंद्र के ननिहाल गांगुलीबाड़ी में 262 वर्षों से हो रही जगद्धात्री पूजा

संक्षेप:

भागलपुर में गुरुवार को महादुर्गा स्वरूप मां जगद्धात्री का पूजन विधि विधान से किया जाएगा। मानिक सरकार स्थित गांगुलीबाड़ी, कालीबाड़ी और मसाकचक में प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी। 262 वर्षों से गांगुलीबाड़ी में पूजा होती आ रही है। 31 अक्टूबर को तीनों प्रतिमाओं का विसर्जन होगा।

Oct 30, 2025 01:31 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, भागलपुर
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भागलपुर, वरीय संवाददाता। देवताओं के अहंकार को नष्ट करने वाली महादुर्गा स्वरूप मां जगद्धात्री का पूजन विधि विधान से गुरुवार को अक्षय या आंवला नवमी के दिन शहर में तीन जगहों पर होगा। इनमें मानिक सरकार स्थित गांगुलीबाड़ी, कालीबाड़ी व मसाकचक स्थित दुर्गाबाड़ी में मां जगद्धात्री की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। बिहार बंगाली समिति बरारी शाखा के अध्यक्ष तरुण घोष ने बताया कि मानिक सरकार स्थित गांगुलीबाड़ी में मां जगद्धात्री पूजा लगभग 262 वर्षो से हो रही है। एक ही दिन में सप्तमी, अष्टमी और नवमी की पूजा होती है। बंगाल के पंडित देवाशीष मुखर्जी व राजा मुखर्जी पूजा कराएंगे। ढाक के थाप के साथ मां को वेदी पर स्थापित किया जाएगा।

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महान उपन्यासकार शतरचंद्र के ननिहाल गांगुलीबाड़ी में भक्तिभाव व श्रद्धा के साथ मां की पूजा-अर्चना होती रही है। इस आयोजन में शतरचंद्र भी बढ़ चढ़कर भागीदारी करते थे। उनकी अगुवाई में जगद्धात्री पूजा के दिन सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित होता था। इस दौरान गीत संगीत, नाटक समेत अन्य कार्यक्रम होते थे। शरतचंद्र के ममेरे भाई स्वर्गीय पूर्णेंदु गांगुली के बेटे उज्ज्वल गांगुली व शांतनु गांगुली समेत परिवार के अन्य सदस्य की देखरेख में इस समय आयोजन हो रहा है। इनमें शतरचंद्र के परिवार के अपर्णा गांगुली, माला गांगुली, स्वर्णाली गांगुली, समुज्ज्वल गांगुली समेत भागलपुर, कोलकाता, कटिहार, दिल्ली के लोग भागीदारी करेंगे। 31 अक्टूबर को तीनों प्रतिमाओं का विसर्जन कालीबाड़ी दुर्गापूजा समिति के महासचिव विलास कुमार बागची ने बताया कि मां जगधात्री देवी दुर्गा का ही स्वरूप है। तीन समय में तीन तरह के फलों की बलि दी जाएगी। वहीं 108 दीप सजाकर 108 कमल के फूल देवी को चढ़ाया जाएगा। इधर, दुर्गाबाड़ी के निरूपम कांतिपाल ने बताया कि मां को विभिन्न तरह के भोग लगाए जाएंगे। इनमें खिचड़ी, पांच किस्म कि भाजी, दो किस्म की सब्जी, खीर, चटनी व मिष्टान्न चढ़ाए जाएंगे। शुक्रवार 31 अक्टूबर को तीनों प्रतिमाओं का विसर्जन होगा।