
जब धर्मेंद्र ने एक माह तक भागलपुर सेंट्रल जेल में की थी फिल्म बंदिनी की शूटिंग
1963 में रिलीज इस फिल्म में जेल के डॉक्टर की भूमिका निभाई थी, उन्हें महिला
गौतम वेदपाणि भागलपुर। बॉलीवुड के सुपर स्टार और हीमैन कहे जाने वाले धर्मेन्द्र अब इस दुनिया को अलविदा कह चुके हैं। लेकिन उनकी यादें भागलपुर की सड़कों, गंगाघाटों व देश की बड़े जेलों में से एक भागलपुर केन्द्रीय कारा से सदियों तक जुड़ी रहेंगी। दरअसल, सुपर स्टार धर्मेन्द्र 1961 में बंदिनी फिल्म की शूटिंग के लिए भागलपुर आए थे। लगभग एक महीने तक भागलपुर में रहे थे और सेंट्रल जेल में एक डॉक्टर के किरदार में उन्होंने इस फिल्म की शूटिंग पूरी की थी। इस फिल्म के मुख्य कलाकार अशोक कुमार और अभिनेत्री नूतन थीं। बॉलीवुड के जाने-माने अभिनेता धर्मेंद्र के निधन से पूरा देश ही नहीं, बल्कि भागलपुर के सिने प्रेमी भी काफी दु:खी हैं।
पुराने दिनों को याद करते हुए जिले के रंगकर्मी व कलाकार बताते हैं कि 1963 में रिलीज हुई बंदिनी फिल्म की शूटिंग के लिए धर्मेंद्र करीब एक माह तक भागलपुर में रहे थे। महान निर्देशक विमल राय की इस फिल्म की शूटिंग भागलपुर सेंट्रल जेल, बरारी घाट व नवगछिया के महादेवपुर घाट में हुआ था। फिल्म की कास्टिंग में भी भागलपुर सेंट्रल जेल प्रबंधन का धन्यवाद ज्ञापन किया गया है। धर्मेंद्र ने इस फिल्म में जेल के डॉक्टर का किरदान निभायी थी। प्रेम त्रिकोण पर आधारित इस फिल्म की हीरोइन नूतन व हीरो दादामुनि अशोक कुमार थे। अशोक कुमार का ननिहाल भी भागलपुर के मानिक सरकार मुहल्ले में है। शहर के चर्चित स्टूडियो चित्रशाला के संचालक व वरिष्ठ छायाकार रंजन कुमार बताते हैं कि फिल्म के निर्देशक विमल राय उनके स्टूडियो में भी आए थे। वहीं भागलपुर के अन्य लोकेशन पर शूटिंग के लिए उनसे चर्चा की थी। वहीं वरिष्ठ रंगकर्मी शीतांशु अरुण बताते हैं कि इस फिल्म की शूटिंग बरारी घाट पर हुई थी। बरबरा नामक जहाज पर धर्मेंद्र, दादामुनि व नूतन जी ने शूटिंग की थी। इसी जहाज की शूटिंग नवगछिया के महादेवपुर घाट पर भी की गई थी। नदी के दृश्य की कुछ शूटिंग साहिबगंज व मनिहारी घाट के बीच भी हुई थी। शूटिंग को देखने वह अपने दोस्तों के साथ बरारी घाट गए थे। उस समय उनकी उम्र 12 वर्ष थी। धर्मेंद्र समेत अन्य बॉलीवुड कलाकारों को देखने के लिए शहर के कई लोग आए थे। इस फिल्म की अधिकांश शूटिंग भागलपुर के सेंट्रल जेल में हुई थी। सेंट्रल जेल के जेलर ने लिखी थी यह कहानी बंदिनी फिल्म हत्या के जुर्म में आजीवन कारावास की सज़ा काट रही एक महिला कैदी कल्याणी की कहानी है। प्रेम त्रिकोण पर आधारित कल्याणी का रोल नूतन ने किया था। उसे जेल के डॉक्टर देंवेंद्र यानी धर्मेंद्र व विकास यानी अशोक कुमार के प्रेम के बीच एक का चुनाव करना था। यह फिल्म पूर्व जेल अधीक्षक चारु चंद्र चक्रवर्ती के बंगाली उपन्यास तामसी पर आधारित है। नौकरी के क्रम में अधिकांश समय भागलपुर समेत उत्तरी बंगाल में जेलर के रूप में बिताया और अपने अनुभवों के कई संस्करण लिखे। शहर के वरिष्ठ रंगकर्मी मनोज कुमार सिंह बताते हैं कि बंदिनी को उस साल के फिल्मफेयर पुरस्कार भी मिला था। सर्वश्रेष्ठ फिल्म और सर्वश्रेष्ठ निर्देशक के साथ-साथ सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के शीर्ष पुरस्कारों सहित कुल छह पुरस्कार जीते। 60 के दशक की यह एक ऐतिहासिक फिल्म है, यह फिल्म निर्देशक बिमल रॉय की आखिरी फीचर फिल्म थी।

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