मुंगेर के सैंड आर्टिस्ट मधुरेंद्र एशियन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स से सम्मानित रीय मंच पर रोशन

Dec 14, 2025 06:09 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, भागलपुर
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बिहार के अंतरराष्ट्रीय रेत शिल्पकार मधुरेंद्र कुमार ने सोनपुर मेले में 50 अद्वितीय रेत मूर्तियों के साथ एशियन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज कराया। पौराणिक गज-ग्राह युद्ध की कथा पर आधारित इन मूर्तियों ने उन्हें विश्वस्तरीय कलाकारों की श्रेणी में स्थापित किया है, जो बिहार की कला-संस्कृति के लिए गर्व का विषय है।

मुंगेर के सैंड आर्टिस्ट मधुरेंद्र एशियन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स  से सम्मानित रीय मंच पर रोशन

मुंगेर, एक प्रतिनिधि। एशिया के सबसे बड़े और ऐतिहासिक सोनपुर मेला में इस वर्ष बिहार के अंतरराष्ट्रीय रेत शिल्पकार मधुरेंद्र कुमार ने कला की नई इबारत लिख दी है। पौराणिक गज–ग्राह युद्ध और भगवान विष्णु द्वारा सुदर्शन चक्र से ग्राह वध की कथा को आधार बनाकर मधुरेंद्र ने 50 अद्वितीय रेत मूर्तियां तैयार कर वह रिकॉर्ड स्थापित कर दिया, जिसे एशियन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने आधिकारिक रूप से मान्यता दी है। प्रमाणन संख्या ABWR2405045 के साथ यह सम्मान उन्हें विश्वस्तरीय कलाकारों की श्रेणी में एक बार फिर शीर्ष पर स्थापित करता है। एशियन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के इंटरनेशनल चेयरमैन अविनाश डी. सुकुंदे ने ईमेल के माध्यम से मधुरेंद्र को बधाई देते हुए लिखा कि उनकी मेहनत, समर्पण और रचनात्मकता ने उत्कृष्टता का नया मानक स्थापित किया है।

उपलब्धि प्रमाण पत्र, मेडल और स्मृति चिन्ह उन्हें डाक द्वारा भेजकर संगठन ने कहा कि “सोनपुर मेला के लंबे इतिहास में पहली बार किसी सैंड आर्टिस्ट को ऐसा अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिला है, जो पूरे बिहार के लिए गर्व का विषय है।” एशिया की सबसे विशाल रेत प्रतिमा का गौरव भी उनके नाम: सोनपुर मेला 2022 में मधुरेंद्र ने मुख्य मंच के समीप 150 टन बालू से 20 फीट ऊंची और 50 फीट लंबी विराट रेत प्रतिमा बनाकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया था। पौराणिक ग्राह वध पर आधारित यह भव्य मूर्ति आज भी एशिया की सबसे विशाल प्रदर्शित रेत प्रतिमाओं में गिनी जाती है। इसमें बिहार सरकार का आधिकारिक लोगो भी शामिल था, जो उनकी कला को सरकारी मान्यता का प्रतीक बना रहा। बचपन से शुरू हुई अद्भुत कला यात्रा 05 सितंबर 1994 को जन्मे मधुरेंद्र की कला प्रतिभा बचपन से ही उजागर हो गई थी। केवल 3 वर्ष की आयु में उन्होंने स्लेट पर बतखों की तैरती हुई आकृति बनाकर अपने गुरु बाबा रामचंद्र साह को चकित कर दिया। साल 1999 में 5 साल की उम्र में गांव के नदी तट पर बनाई गई 2 फीट ऊंची मां सरस्वती, भगवान बुद्ध और भगवान विष्णु की रेत प्रतिमाओं ने उन्हें ग्रामीण स्तर पर पहचान दिलाई, जो आगे चलकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंची। बिहार का नाम अंतरराष्ट्रीय मंच पर रोशन भगवान विष्णु के 50 रेत मूर्तियों के इस अद्वितीय रिकॉर्ड ने मधुरेंद्र कुमार को न केवल सोनपुर मेला के इतिहास में अमर बना दिया है, बल्कि बिहार की कला-संस्कृति को भी वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाई है। उनकी कृतियाँ परंपरा, आस्था और आधुनिक सृजनशीलता का ऐसा अद्भुत संगम प्रस्तुत करती हैं, जो नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का संदेश देता है। निस्संदेह, मधुरेंद्र कुमार का यह अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड पूरा बिहार, पूरा देश और कला जगत सभी के लिए गर्व का विषय है। इसके पहले भी मधुरेंद्र ने अपनी बेहतरीन कार्यों के बदौलत अपना नाम लंदन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज कराने वाले दुनियां के पहला भारतीय रेत कलाकार हैं।

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