दिल्ली के गणतंत्र दिवस परेड में 14 साल पहले दिखा था भागलपुर
हिन्दुस्तान विशेष 2012 में महिला सशक्तीकरण-पर्यावरण संरक्षण के लिए धरहरा को जाना दुनिया ने दिल्ली के गणतंत्र दिवस परेड में 14 साल पहले दिखा था भागलपुर

भागलपुर, मुख्य संवाददाता। नई दिल्ली में होने वाले राष्ट्रीय गणतंत्र दिवस परेड समारोह में इस बार बिहार की झांकी नहीं दिखेगी। इस बार बिहार के किसी भी थीम को मंजूरी नहीं मिली है। वर्ष 2025 में बिहार से नालंदा विश्वविद्यालय पर आधारित झांकी को राष्ट्रीय झांकी में स्थान मिला था। भागलपुर परेड समारोह में 14 साल पहले दिखा था। नवगछिया अनुमंडल के गोपालपुर प्रखंड की बड़ी मकनपुर पंचायत के धरहरा गांव की परंपरा को दुनिया से परिचय कराया गया। वर्ष 2012 में महिला सशक्तीकरण और पर्यावरण संरक्षण विषय पर धरहरा गांव में बेटियों के जन्म पर 10 फलदार पौधे लगाने की परंपरा दिखाई गई थी।
इसके बाद भागलपुर को कभी भी राष्ट्रीय मंच पर यहां की संस्कृति, कला और प्राकृतिक उपलब्धि को दिखाने का मौका नहीं मिला है। लेकिन अब कोशिश हो रही है कि अगले साल बिहार की झांकियों में भागलपुर की मशहूर तसर सिल्क, कतरनी धान, जर्दालू आम और मंजूषा पेंटिंग पर आधारित विषय को लेकर एंट्री कराया जाए। भागलपुर से जुड़े ये चारों प्रोडक्ट जीआई टैग प्राप्त है। जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी अंकित रंजन ने बताया कि राष्ट्रीय थीम पर एंट्री के क्या मानक हैं, यह नहीं पता है। लेकिन सदियों पहले से चली आ रही भागलपुरी सिल्क, कतरनी धान उत्पादन के तरीके, जर्दालू आम को खास बनाने के नुस्खे और मंजूषा पेंटिंग में रंग की महत्ता को लेकर प्रस्ताव तैयार कराया जा सकता है। संभव है कि प्रस्ताव नेशनल परेड के लिए चयनित हो जाए। धरहरा की परंपरा को सीएम ने भी सराहा था वर्ष 2010 में भागलपुर दौरे पर आए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा था कि यह भ्रूण हत्या का विरोध करने वाला गांव है। भ्रूण हत्या एवं धरती पर धड़ल्ले से काटे जा रहे पेड़ों के कारण यहां की परंपरा पृथ्वी के लिए जरूरी है। इसलिए इस अनूठी परंपरा को दुनिया में स्थापित करना है। इस गांव की परंपरा को बेटियों की घटती संख्या एवं धरती पर कम होते पेड़ों को लेकर चिंता से दुनिया को अवगत कराने के लिए वर्ष 2012 में बिहार सरकार ने केंद्र सरकार को पूरी रिपोर्ट से अवगत कराया था। बता दें कि 6 जून 2010 को धरहरा गांव में प्रियंका देवी और सौरव सिंह की बेटी लवली देवी के नाम पर दशहरी आम का पेड़ लगाया था।

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