
बोले पूर्णिया : बीस महीने से मानदेय बंद, नल-जल योजना पर संकट
बिहार सरकार की नल-जल योजना के तहत रौटा पंचायत में शुद्ध पेयजल की आपूर्ति गंभीर संकट में है। पिछले 20 महीनों से पंप संचालकों को मानदेय नहीं मिलने के कारण उन्होंने हड़ताल की चेतावनी दी है। यदि समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो हजारों ग्रामीणों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ सकता है।
प्रस्तुति: सुशांत कुमार रिंकू
सात निश्चय योजना के तहत बिहार सरकार ने शुद्ध पेयजल की सराहनीय पहल की है, लेकिन जमीनी स्तर पर कई पंचायतों में इसका क्रियान्वयन लचर पड़ा है। कहीं टोटियां गायब हैं तो कहीं पंप लंबे समय से बंद पड़े हैं। पूर्णिया जिले के सुदूरवर्ती बैसा प्रखंड के रौटा पंचायत में स्थिति बेहद चिंताजनक है। पंचायत के 14 वार्डों में कई पंप संचालकों को नियमित मानदेय नहीं मिल रहा है। बताया जाता है कि छह वार्डों में पूर्व से कार्यरत नौ संचालकों को पिछले 20 महीने से भुगतान नहीं हुआ है। मानदेय न मिलने से नाराज पंप संचालकों ने 15 दिसंबर से हड़ताल की चेतावनी दी है। यदि ऐसा हुआ तो पंचायत में शुद्ध पेयजल आपूर्ति पूरी तरह ठप पड़ सकती है। स्थानीय लोग पहले से ही इस आशंका से चिंतित हैं कि यदि पंप बंद हुए तो पेयजल की भीषण समस्या पैदा हो जाएगी, जिससे सैकड़ों परिवार प्रभावित होंगे।
पूर्णिया जिले के बैसा प्रखंड अंतर्गत रौटा पंचायत के कुल 14 वार्डों में से छह वार्डों में शुद्ध पेयजल का गंभीर संकट मंडरा रहा है। इन वार्डों में नल-जल योजना के तहत पूर्व से संचालित नौ यूनिटों के माध्यम से लगभग दो हजार से अधिक परिवार लाभान्वित होते रहे हैं। लेकिन अब यह सुविधा बंद होने के कगार पर है, क्योंकि इन नौ यूनिटों में कार्यरत सभी पंप संचालक बीते 20 महीनों से मानदेय न मिलने से नाराज हैं। मानदेय भुगतान में हो रही लगातार देरी से आक्रोशित पंप संचालकों ने रविवार को सामूहिक बैठक कर महत्वपूर्ण निर्णय लिया। बैठक में सभी ने सर्वसम्मति से चेतावनी दी कि यदि 15 दिसंबर तक लंबित मानदेय का भुगतान नहीं किया गया, तो 16 दिसंबर से वे कार्य पूरी तरह ठप कर देंगे और अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे।
पंप संचालकों का कहना है कि नल-जल योजना की शुरुआत के समय उन्हें कई लुभावनी बातें बताई गई थीं - जैसे समय के साथ मानदेय में वृद्धि होगी और सरकार हर संचालक का ध्यान रखेगी। परंतु धरातल पर स्थिति बिल्कुल अलग निकली। शुरुआत में कुछ महीनों तक भुगतान हुआ, लेकिन धीरे-धीरे भुगतान की प्रक्रिया धीमी पड़ने लगी। कभी छह महीने तो कभी दस महीनों के अंतराल पर मानदेय मिला। अब पिछले 20 महीनों से उन्हें एक रुपया भी नहीं मिला है। उन्होंने बताया कि नल-जल योजना के तहत उन्हें प्रतिदिन मात्र 100 रुपये मानदेय निर्धारित है, जो वर्तमान समय में नाममात्र का रह गया है। बावजूद इसके, वे लगातार कार्य करते रहे ताकि ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल की आपूर्ति में कोई बाधा न आए। पर अब स्थिति ऐसी है कि आर्थिक संकट के चलते उनका काम जारी रखना मुश्किल हो गया है। इसलिए सभी संचालकों ने मजबूरी में हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया है। रौटा पंचायत अंतर्गत नौ पंपों से न केवल दो हजार से अधिक परिवारों को शुद्ध पेयजल आपूर्ति होती है, बल्कि सरकार की छह संस्थाएं भी इस योजना से सीधा लाभ ले रही हैं। इनमें वार्ड संख्या एक स्थित प्राथमिक विद्यालय कंजरा, वार्ड दो का आंगनबाड़ी केंद्र, वार्ड तीन का मध्य विद्यालय चन्नी, वार्ड चार का प्राथमिक विद्यालय खुट्टा टोली, वार्ड पांच की पुरानी हाट में स्थित हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर, और वार्ड सात में अवस्थित रौटा पंचायत भवन शामिल हैं। इन सरकारी संस्थानों में नल-जल योजना की आपूर्ति का विशेष महत्व है। उदाहरण के तौर पर, मध्य विद्यालय चन्नी परिसर में लगे दो कनेक्शन से विद्यालय परिवार के साथ-साथ गुजरने वाले राहगीर भी लाभान्वित होते हैं। हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में आने वाले मरीजों और स्टाफ के लिए भी यही पेयजल स्रोत है। पंचायत भवन में कार्य करने वाले जनप्रतिनिधि और आम लोग भी इसी सुविधा पर निर्भर हैं।
ग्रामीणों पर पेयजल संकट मंडरा रहा
रौटा पंचायत के वार्ड संख्या एक से सात तक कुल नौ यूनिटों के माध्यम से लगभग दो हजार से अधिक परिवारों को पानी की आपूर्ति होती है, जिनमें सैकड़ों महादलित परिवार शामिल हैं। चन्नी गांव में आयोजित बैठक में सभी नौ पंप संचालकों ने बताया कि उन्हें बीते 20 माह से मानदेय नहीं मिला है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि लंबित मानदेय का भुगतान 15 दिसंबर तक नहीं हुआ तो 16 दिसंबर से सभी यूनिटों का संचालन बंद कर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी। इससे हजारों ग्रामीणों पर पेयजल संकट मंडरा रहा है।
हमारी भी सुनें
पंचायत के नौ प्वाइंट में नल-जल योजना से हर वर्ग के लोग लाभांवित हो रहे हैं। इसके बंद होने से दो हजार से अधिक की आबादी सीधे प्रभावित होगी।
- अतीकुर्रहमान
नल-जल के तहत सभी दिन पुरानी हाट के लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है। पर बीस माह से मानदेय नहीं मिलने से अब हौसला टूटने लगा है।
- रामसेवक साह
जब से पंप ऑपरेटर का काम कर रहे हैं, तब से कभी भी नियमित मानदेय नहीं मिला है। मानदेय रुकने से काम नहीं करने का इरादा बना लिया हूं।
- मिरशाद आलम
यह एजेंसी बेहद लापरवाह है। जब भी अचानक किसी कारणवश रिपेयरिंग या अन्य काम की जरूरत पड़ती है तो ये पूरी तरह चुप्पी साध लेते हैं।
- साकिर
नल-जल योजना के तहत विद्यालय में नियमित पेयजल मिल रहा है। ऐसे में यदि इसकी सेवा बाधित होगी तो विद्यालय पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
- संजय पासवान
20 माह से मानदेय नहीं मिलने के कारण पूरी तरह हिम्मत टूट गया है और अब काम नहीं करने का इरादा हमलोगों ने बनाया है। जब पेट ही नहीं भरेगा तो काम क्या करेंगे?
- आवेश
रुक-रुक हर बार मानदेय मिला है लेकिन इस बार तो सिर्फ आश्वासन मिला है। यदि 15 दिसम्बर तक मानदेय नहीं मिलता है तो हड़ताल पर चले जाएंगे।
- सरवर आलम
नल-जल योजना का लाभ मिल रहा है। यदि यह बंद हो जाएगा तो सभी इससे प्रभावित होंगे। हम लोगों को सरकार की इस योजना से काफी सुविधा मिली है।
- गुड्डी देवी
नल-जल योजना के तहत मिल रहे शुद्ध पेयजल से उनके परिवार का स्वास्थ्य बहुत अच्छा रहता है। यदि यह बंद हो गया तो सबका स्वास्थ्य प्रभावित होगा।
- गीता देवी
नल-जल योजना के तहत मिल रहा शुद्ध पेयजल से खाना बनाने का काम करती हूं। खाना बेहतर व स्वादिष्ट बनता है। बंद होने से परेशानी बढ़ जाएगी।
- लीला देवी
अभी दो हजार परिवार इससे लाभ के रहा है। इसके बंद होने से ये सभी लोग प्रभावित होंगे। हम लोगों को डर है कि कहीं पूरा पंचायत ही प्रभावित हो ना जाए।
- अर्जुन कुमार चौधरी
जब यह योजना शुरू हुई थी, तब लगा था कि भले ही राशि कम होगी, लेकिन भुगतान नियमित मिलेगा। परंतु वास्तविकता में यह एजेंसी बदतर साबित हुई है।
- दीपक मंडल
नीतीश सरकार पर पूरे गांववासियों, खासकर हम महिलाओं को पूरा विश्वास है कि पंप संचालकों के मानदेय से जुड़ी समस्याओं का समाधान हो जाएगा।
- बेचनी
जिस दिन बिजली या फिर अन्य कारणों से शुद्ध पेयजल नहीं मिलता है तो बहुत दिक्कत होती है। मजबूरन चापाकल का ही जल से घरेलू कार्य आदि करने करना पड़ता है।
- रेणु देवी
प्रशासन के उदासीनता के चलते लगता है कि एक बार फिर लोगों को शुद्ध पेयजल के बजाय आयरन युक्त पानी पीने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।
- लीला देवी
बोले जिम्मेदार
नल-जल योजना सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका लाभ ग्रामीणों को मिल रहा है। बीस माह का मानदेय लंबित होने की सूचना है। संबंधित एजेंसी पर जांचोपरांत कार्रवाई तय है।
- राजकुमार चौधरी, बीडीओ, बैसा
पंप संचालकों को मानदेय नहीं मिलने की जानकारी पर विभाग को कार्रवाई के लिए पत्र लिखा जाएगा। मामले में स्थल निरीक्षण, संबंधित एजेंसी से पूछताछ और विधायक को सूचना देने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी।
- वाहीदा सरवर, अध्यक्ष जिप, पूर्णिया
शिकायत
1. पंचायत क्षेत्रों में जलापूर्ति संभालने वाले पंप संचालकों को महीनों तक मानदेय नहीं मिलता।
2. पंचायत क्षेत्र के वॉटर टावर की समय-समय पर सफाई नहीं की जाती। गंदगी जमा होने से पीने के पानी की गुणवत्ता प्रभावित होती है।
3. जलापूर्ति केंद्रों पर लगी टोटियां समय-समय पर नहीं बदली जातीं। जर्जर टोटियों से पानी रिसने और बर्बादी की समस्या बनी रहती है।
4. अधिकांश जलटोटियों के पास पक्का चबूतरा नहीं बना है। चबूतरा न होने से पानी चारों ओर फैलकर कीचड़ और गंदगी पैदा करता है।
5. लो वोल्टेज के कारण पंप संचालन में परेशानी।
सुझाव
1. पंप संचालकों को प्रत्येक महीने नियमित रूप से मानदेय दिया जाना चाहिए। समय पर भुगतान होने से वे जिम्मेदारी के साथ जलापूर्ति व्यवस्था संभाल सकेंगे।
2. प्रत्येक सप्ताह वॉटर टंकी की नियमित सफाई की जानी चाहिए। इससे पानी स्वच्छ रहेगा और बीमारियों का खतरा कम होगा।
3. प्रत्येक तीन महीने पर जर्जर या खराब टोटियों को बदला जाना चाहिए। इससे जल की बर्बादी रुकेगी और जलापूर्ति सुचारु बनी रहेगी।
4. टोटी के पास बड़ा सा पक्का चबूतरा बने।
5. लो वोल्टेज से पंप को मिले निजात।

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