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VIDEO में देखिए बाढ़ पीड़ितों को कितनी मिली सरकारी राहत, एक रिपोर्ट

सुपौल : 18 अगस्त की देर शाम तक न तो प्रशासन पहुंचा था न चुने गये जनप्रतिनिधि
सुपौल : 18 अगस्त की देर शाम तक न तो प्रशासन पहुंचा था न चुने गये जनप्रतिनिधि

बिहार के कोसी और सीमांचल में बाढ़ ने भीषण तबाही मचाई। इस दौरान सुपौल में लगातार बारिश और तिलयुगा, बलान नदियों के उफान का सर्वाधिक दंश जिले के मरौना प्रखंड ने ही झेला। मरौना प्रखंड में आने पर सहसा 2008 की कुसहा त्रासदी की याद ताजा हो जाती है। प्रशासन शुरूआती चरण से ही दावा करता रहा है कि हर बाढ़ पीड़ित को बाहर निकालने के लिए सरकारी नाव की व्यवस्था की जा रही है, उन्हें राहत सामग्री भी पहुंचायी जा रही है।

हिन्दुस्तान टीम शुक्रवार को मरौना प्रखंड के सुदूरवर्ती परसौनी गांव पहुंची जहां 13 अगस्त की रात से लेकर 18 अगस्त की देर शाम तक न तो प्रशासन का कोई अधिकारी या कर्मचारी पहुंचा था और न ही उस पंचायत से चुने गये जनप्रतिनिधि। गनौरा पंचायत का आठ वार्डों वाला परसौनी आज तीन भागों में बंट गया है। इसके सभी वार्ड का सीधा संपर्क प्रखंड मुख्यालय से कट चुका है। 


वार्ड 8 तक कच्ची-पक्की सड़क हुआ करती थी। 13 अगस्त के बाद सड़क तीन जगह कट चुकी है फिलहाल वहां कमर भर पानी बह रहा है। वार्ड 8 सुपौल और मधुबनी जिला के सीमा पर है और इस होकर लोग मधुबनी जिले के हजारों लोग बाजार करने मरौना ही आते हैं। इतने महत्वपूर्ण वार्ड और रास्ते में तिलयुगा नदी की तेज धार बह रही है लेकिन वहां अभी तक सरकारी नाव नहीं दी गयी है। 


यहां एक नौजवान गजेन्द्र यादव अपने बूते निजी नाव का संचालन कर रहे हैं। गनौरा के पूर्व सरपंच देवनंदन यादव बताते हैं कि राहत और सरकारी नाव के लिए कह-कहकर थक गये। मंत्री से भी आग्रह किया तो बताया गया कि अगले दिन नाव मिल जायेगी लेकिन अभी तक यहां सरकारी नाव नहीं मिली है, राहत पहुंचाना तो दूर की बात है। 

एक हफ्ता बीता पर पांच किमी दूर नहीं पहुंच पाए हुक्मरान
एक हफ्ता बीता पर पांच किमी दूर नहीं पहुंच पाए हुक्मरान

ग्वालपाड़ा (मधेपुरा)  में  बाढ़ आए हुए एक हफ्ते से अधिक हो चुका है, पानी भी अब निकलने लगा है पर प्रखंड मुख्यालय से पांच किमी की दूरी पर स्थिति टेमाभेला पंचायत के कई गांवों में फंसे लोगों का हाल जानने अब तक कोई हुक्मरान नहीं पहुंचा है। यहां बाढ़ प्रभावितों को मदद पहुंचाने की रफ्तार सुस्त पड़ी है। टेमाभेला पंचायत के भटोतर, कल्याण टोला पूर्वी, जगतपुर आदि स्थानों के बाढ़ पीड़ितों की स्थिति काफी खराब है। पंचायत का अधिकांश भाग अभी भी बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित है।

पंचायत के मुखिया सुनील कुमार का कहना है कि बार बार मांग करने के बावजूद बाढ़ पीड़ितों को नाव उपलब्ध कराया गया और न ही पर्याप्त राहत शिविर खोले गए। पंचायत की करीब 6000 हजार की आबादी अपने हाल पर जीने को मजबूर है।


पंचायत की भौगोलिक स्थिति बिगड़ गयी है। उत्क्रमित मध्य विद्यालय परसहा सुखासन से कल्याणपट्टी जाने वाली सड़क बाढ़ के तेज बहाव में क्षतिग्रस्त हो चुकी है। जहां सड़क बची भी है वहां कहीं 4 तो कहीं 8 फीट पानी बह रहा। कल्याणपट्टी के घरों में करीब दो से तीन फीट पानी जमा है। टपड़ा तोला, पड़ोकिया, जगतपुर आदि टोला का भी यही हाल है। भटोतर टोला के भूटन ऋषिदेव, सियाराम, रमेश, इंदल ऋषिदेव ने कहा राहत शिविर गांव से करीब दो किलोमीटर दूर है। महिला और बच्चे कभी सत्तू पीकर तो कभी कुछ खाकर समय बिता रहे हैं। 


पंचायत के मुखिया सुनील कुमार कहते हैं कि बाढ़ आने के बाद से ही प्रशासन से पीड़ित परिवारों की मदद के लिए नाव की मांग की जा रही है। अबतक नाव नहीं दिया गया। पंचायत में दो जगह राहत शिविर चल रहे हैं लेकिन सभी बाढ़ पीड़ितों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है। वहीं ग्वालपाड़ा के सीओ विकेश पांडेय का कहना है कि सभी बाढ़ पीड़ितों को शिविर में आकर रहने के लिए कहा गया था, लेकिन वे घर छोड़कर शिविर में रहने को तैयार नहीं हुए। 

 

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  • Web Title:bihar flood: did flood victims of supaul and madhepura get government relief, a report