बोले पूर्णिया : नई सरकार से विकास की रफ्तार बढ़ने की उम्मीद

बोले पूर्णिया : नई सरकार से विकास की रफ्तार बढ़ने की उम्मीद

संक्षेप:

पूर्णिया जिले में एनडीए के पांच उम्मीदवारों की जीत ने सत्ता में स्थिरता को बढ़ावा दिया है। मतदाता अब नई सरकार से शिक्षा, स्वास्थ्य, और रोजगार के मुद्दों पर ठोस कदम उठाने की अपेक्षा कर रहे हैं। लोग स्थानीय सुविधाओं के लिए आवाज उठा रहे हैं और विकास की प्रक्रिया में तेजी लाने की मांग कर रहे हैं।

Nov 19, 2025 01:21 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, भागलपुर
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बोले पूर्णिया : नई सरकार से विकास की रफ्तार बढ़ने की उम्मीद

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-प्रस्तुति: भूषण

पूर्णिया जिले की सात विधानसभा सीटों में से पांच पर एनडीए प्रत्याशियों की जीत ने जिले में सत्तारूढ़ गठबंधन की स्थिति को मजबूत किया है। बिहार के अधिकांश जिलों की तरह पूर्णिया में भी मतदाताओं ने एनडीए पर भरोसा जताते हुए स्थिर सरकार की उम्मीदों को बल दिया है। लगभग 20 लाख मतदाताओं की नजर अब नई सरकार की नीतियों और वादों के क्रियान्वयन पर टिकी हुई है। जिले के आम नागरिक अब अपनी स्थानीय जरूरतों और विकास की मांगों को लेकर सक्रिय हो उठे हैं। शहर के चौक-चौराहों से लेकर गांवों तक लोग बेहतर सड़क, स्वास्थ्य सुविधा, शिक्षा व्यवस्था और रोजगार अवसरों की मांग खुलकर कर रहे हैं। सोशल मीडिया से लेकर जनसभाओं तक, जनता नव-निर्वाचित विधायकों से अपेक्षा कर रही है कि वे जनता की आवाज को सरकार तक मजबूती से पहुंचाएं। हाल के वर्षों में पूर्णिया ने बाढ़ नियंत्रण, सड़क निर्माण और पेयजल जैसी समस्याओं को लेकर कई बार आंदोलन देखे हैं। अब जब जिले के बहुमत क्षेत्रों से एनडीए विधायक चुने गए हैं, जनता को उम्मीद है कि इस बार उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान होगा। लोग यह भी मान रहे हैं कि सरकार जिले के पिछड़े इलाकों पर विशेष ध्यान देगी और विकास योजनाओं का लाभ निचले स्तर तक पहुंचेगा। नव-निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के लिए यह एक अवसर है कि वे जनता के भरोसे को बनाए रखें और विकास के मुद्दों पर ठोस कदम उठाकर अपने कार्यकाल की पहचान सकारात्मक रूप में बनाएं।

नव-निर्वाचित सरकार के बनने के साथ ही अब पूर्णिया जिले की निगाहें नई सत्ता के फैसलों पर टिकी हैं। विधानसभा चुनाव परिणामों ने जिले के लोगों में यह उम्मीद जगाई है कि इस बार विकास की गाड़ी तेज रफ्तार पकड़ेगी। शहर से लेकर गांव तक, हर वर्ग के लोगों को भरोसा है कि नई सरकार क्षेत्र की उन पुरानी जरूरतों को पूरा करेगी, जिनकी आवाज़ वर्षों से उठती रही है। शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग और सड़क जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े मुद्दे अब जनता की प्राथमिक सूची में हैं। लोगों का कहना है कि अब लंबी चुनावी सरगर्मी समाप्त हो चुकी है और वक्त है ठोस कदम उठाने का। “हिंदुस्तान” की ओर से शहर और ग्रामीण इलाकों के विभिन्न तबकों से बातचीत के दौरान यह बात सामने आई कि मतदाता अब भाषण नहीं, बल्कि कार्रवाई चाहते हैं। हर वर्ग इस उम्मीद में है कि जनप्रतिनिधि वादों पर खरे उतरेंगे और पूर्णिया को विकास की नई राह दिखाएंगे। लोगों की मांगें केवल स्थानीय सुविधाओं तक सीमित नहीं हैं। जिले के लोग लंबे समय से पूर्णिया को उपराजधानी का दर्जा दिए जाने की मांग उठा रहे हैं। उनका तर्क है कि पूर्णिया का भौगोलिक, आर्थिक और जनसांख्यिक महत्व इसे इस दर्जे का हकदार बनाता है। इसके अलावा यहां हाईकोर्ट की बेंच, लॉ यूनिवर्सिटी, बिजनेस मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट, एम्स और आईआईटी जैसी उच्च शैक्षणिक और स्वास्थ्य संस्थाओं की स्थापना की भी उम्मीद की जा रही है। युवाओं का कहना है कि जब तक क्षेत्र में उच्च शिक्षा और रोजगार सृजन का केंद्र नहीं बनेगा, तब तक पलायन की समस्या खत्म नहीं होगी। शहर में अतिक्रमण का मुद्दा भी लोगों के बीच मुख्य चिंता के रूप में उभर रहा है।

अधूरी पड़ी योजना शीघ्र हो पूरी

साथ ही अधूरी पड़ी जल नल योजना को शीघ्र पूरा करने की अपेक्षा भी जताई जा रही है ताकि हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंच सके। पूर्णिया और सीमांचल का एक बड़ा तबका कृषि पर निर्भर है। यहां के किसानों की प्रमुख फसल मक्का है, जिसे अब पारंपरिक खाद्यान्न नहीं बल्कि एक कमर्शियल क्रॉप के रूप में देखा जा रहा है। किसानों ने मांग की है कि सरकार मक्का की फसल का समर्थन मूल्य तय करे, ताकि बाजार में उचित दाम मिले और उनकी आय सुरक्षित रह सके। मौसम की अनियमितता और लागत में लगातार वृद्धि के कारण किसानों की कमाई पर असर पड़ा है, इसलिए समर्थन मूल्य का निर्धारण इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को स्थिरता दे सकता है। इसके अलावा औद्योगिक निवेश की भी गुंजाइश पर लोग बात कर रहे हैं।

लोगों को झेलनी पड़ती है असुविधा

नागरिकों का कहना है कि बीते कार्यकाल में एक बार रोड सफाई अभियान चलाया गया था, तब सड़कों पर व्यवस्था महसूस हुई थी, लेकिन समय के साथ फिर से फुटपाथ और सड़कों पर कब्जा बढ़ गया। इससे न सिर्फ ट्रैफिक जाम होता है, बल्कि दुर्घटनाओं की संभावना भी बढ़ जाती है। अब लोग चाहते हैं कि इस बार सरकार स्थायी स्तर पर सड़क अतिक्रमण हटाने की ठोस कार्ययोजना बनाए और उसका पालन सुनिश्चित करे। स्वच्छता को लेकर भी नागरिकों ने चिंता जाहिर की। शहर के कई बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर शौचालय और यूरिनल की व्यवस्था न होने से लोगों को असुविधा झेलनी पड़ती है। महिलाओं के लिए यह समस्या और गंभीर रूप लेती जा रही है। लोगों का कहना है कि जब ‘स्वच्छ भारत मिशन’ जैसी योजना चल रही है तो इन बुनियादी सुविधाओं की कमी पर ध्यान देना आवश्यक है।

हमारी भी सुनें

स्कूलों की तस्वीर पहले से विकसित हो। हर प्रखंडों में जिम स्थापित हो और जितने भी हाई स्कूल हैं उनको अपना खेल का मैदान हो।

- राजकिशोर

जिला अस्पताल को सुपर स्पेशियलिटी के स्तर पर विकसित किया जाए और सदर अस्पताल की व्यवस्था जीएमसीएच से अलग हो। एम्स भी चाहिए।

-शंकर

पूर्णिया में उद्योग लगाने की दिशा में ठोस कदम उठना चाहिए। युवाओं को रोजगार मिलेगा तो पलायन रुकेगा। यह मांग वर्षोंसे हो रही है।

- ध्वजाधर

सड़कें और स्ट्रीट लाइट की स्थिति बेहतर हो। बरसात में शहर की जलजमाव समस्या खत्म होनी चाहिए। इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत हो।

- नीरज कुमार

कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा दिया जाए। किसान मार्केट और प्रोसेसिंग यूनिट नहीं होने से नुकसान झेलते हैं। मक्का प्रोसेसिंग प्लांट जरूरी है।

- वीरेंद्र कुमार

सरकार को शहर में ट्रैफिक व्यवस्था पर ध्यान देना चाहिए। चौक-चौराहों का चौड़ीकरण और ओवरब्रिज की जरूरत है।

- पवन साह

महिलाओं की सुरक्षा और स्वच्छ पेयजल नई सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। कई मोहल्लों में पानी की किल्लत बनी रहती है।

- ललिता

शहर में पार्क और खेल मैदान विकसित हों। बच्चों और युवाओं के लिए ऐसे स्थान जरूरी हैं। जिले के सभी प्रखंडों में प्रखंड लेवल पर जिम बने।

-भुवन पांडे

नए उद्योग के साथ-साथ स्किल डेवलपमेंट सेंटर खोले जाएं। इसके अलावा शहर में रोड के किनारे सरकारी वेंडिंग जोन बने।

- तनवीर मुस्तफा

प्रशासन और जनप्रतिनिधि मिलकर भ्रष्टाचार पर नकेल कसें। योजनाओं की राशि समय पर और सही हाथों तक पहुंचे।

- दिनकर

कचरा उठाव के लिए आधुनिक सिस्टम और पर्याप्त वाहन उपलब्ध कराए जाएं। सफाई का अतिरिक्त शुल्क बंद हो।

-रितेश कुमार

व्यापारियों के लिए बेहतर माहौल बने। बाजार में पार्किंग व्यवस्था दुरुस्त की जाए ताकि जाम की समस्या कम हो। सुरक्षा को इंतजाम होना चाहिए।

- मनोज पोद्दार

सीएचसी और पीएचसी का ढांचा बेहतर हो। गांवों में भी गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवा पहुंचनी चाहिए। प्रत्येक पंचायत में हाई स्कूल की भर्ती स्वास्थ्य केंद्र खुले।

-डॉ. विनोद

शहर के युवाओं के लिए लाइब्रेरी और स्टडी सेंटर खोले जाएं, ताकि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी आसानी से कर सकें। इसमें सरकारी अनुदान मिले तो अच्छा होगा।

-चंदन मंडल

खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए खेल परिसर और कोचिंग सुविधाएं विकसित हों। अधिकांश स्कूलों के पास खेल का मैदान नहीं होने के कारण बच्चे कुंठित होकर रह जाते हैं।

-दीपक

ग्रामीण इलाके के किसानों के खेतों में खेती के लिए पानी बिजली की व्यवस्था पहले से सुदृढ़ हो और नहर सिंचाई व्यवस्था को चालू की जाए।

-शिबू

बोले जिम्मेदार

इसके पहले के कार्यकाल में भी हमने मौलिक समस्याओं पर गंभीरता से गौर किया था और सदन में आवाज उठाई थी। पिछले कार्यकाल में जितने भी काम अधूरे रहे हैं उन्हें पूरा करवाया जाएगा और पूर्णिया शहर को आत्याधुनिक शहर का रूप दिया जाएगा।

-विजय खेमका, विधायक, पूर्णिया सदर

पूर्णिया के बस स्टैंड को अब नया लुक दिया जाएगा क्योंकि इसका सारा प्रोजेक्ट तैयार है और मामला राज्य मुख्यालय में है। सरकार से पूरी कोशिश की जाएगी ताकि जल्द से जल्द हाईटेक बस स्टैंड लोगों को मिले और यहां सारी सुविधा उपलब्ध हो जाए। लोगों की आशाएं जल्द पूरी करवाई जाएगी।

-वाहीदा सरवर, अध्यक्ष, जिप, पूर्णिया

शिकायत

1. शहर की सड़कों पर बढ़ता अतिक्रमण और अव्यवस्थित यातायात से लोगों का सफर मुश्किल हो गया है।

2. बाजार और बस पड़ाव जैसे भीड़भाड़ वाले स्थानों पर शौचालय व यूरिनल की व्यवस्था नहीं है।

3. उद्योग और कारखानों की कमी से अर्थव्यवस्था प्रभावित है।

4. नहरों और बोरिंग की स्थिति संतोषजनक नहीं है।

5. जिले के युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार नहीं मिल पा रहा है। युवा बेहतर अवसरों की तलाश में शहर छोड़ने को मजबूर हैं।

सुझाव

1. शहर का अतिक्रमण हटे व वाहनों के अवैध एंट्री पर लगे रोक।

2. पूरे जिले के सार्वजनिक स्थलों पर सुविधा के लिए शौचालय और यूरिनल बने।

3. पर्याप्त संख्या में एग्रीकल्चर बेस्ड उद्योग धंधे लगे तो होगी सुविधा।

4. खेतों तक सरकारी स्तर से सिंचाई के लिए नहर की व्यवस्था हो।

5. सभी मार्केट एरिया में बेरोजगार युवाओं के व्यवसाय के लिए काउंटर खुले। उम्मीद जताई है कि सरकार रोजगार सृजन के इस पहल को प्राथमिकता देगी।