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यूपीएससी में लुढ़क गया रैंक, संख्या भी घटी

सिविल सर्विसेज भागलपुर के छात्रों को इस बार रास नहीं आया। पिछले कुछ सालों की तुलना में न तो इस बार कंपीट करने वाले छात्रों की संख्या बढ़ी और रैंक में भी कमी हो गई। बीते सात वर्षों में भागलपुर के सफल छात्रों की संख्या एक से तीन के बीच ही रही है। इन वर्षों में भागलपुर के किसी भी छात्र का सबसे अच्छा रैंक 98वां रहा है जो 2014 में नीलोत्पल को मिला था। इस बार भागलपुर के दो ही अभ्यर्थियों मानस वाजपेयी और कुमार संभव को सफलता मिली है। दोनों ही कहलगांव के हैं। इस लिहाज से इस बार भागलपुर शहरी क्षेत्र पिछड़ गया। मानस का रैंक 456वां है जबकि पिछले साल भागलपुर के अभ्यर्थी गोविंद मोहन शुक्ला को 245वां रैंक मिला था। दूसरे अभ्यर्थी कुमार संभव का रैंक 714वां है। 2016 में एनटीपीसी कहलगांव में सहायक प्रबंधक गोविंद मोहन शुक्ला को 245वां और लालूचक अंगारी के राजकिशोर को 825वां रैंक मिला था। 2014 में भी राजकिशोर ने परीक्षा पास की थी। तब उन्हें 902वां रैंक मिला था। 2016 में सुल्तानगंज निवासी मनीष कुमार को 963वां स्थान मिला था। उन्होंने 2014 में भी यूपीएससी कंपीट किया था। तब उन्हें 890वां रैंक मिला था। 2014 में नीलोत्पल के बाद भागलपुर के गौतम कुमार को 116वां रैंक मिला था। इन दोनों की तुलना में इस बार मानस और कुमार संभव का रैंक पीछे है जबकि 2014 में ही सव्यसाची कुमार को मिले 304वें रैंक से भी ये दोनों पीछे रह गए। 2013 में बूढ़ानाथ के प्रशांत ने 175वां रैंक हासिल किया था। उनसे पीछे रामचंद्र रहे थे जिन्हें 271वां रैंक मिला था। 2011 में बरहपुरा के इमरान को 169वां और 2010 में उर्दू बाजार के चंदन कुमार को 292वां रैंक मिला था।

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  • Web Title:bhgalpur lost position in upsc