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श्रावणी मेला काउंटडाउन: जैसे-तैसे काम को अंतिम रूप देने में लगे सभी विभाग

shravani mela countdown  all departments engaged in finalization of work

1 / 2सुल्तानगंज में श्रावणी मेले में आने वाले कांवरियों की सुविधा के लिए आधी-अधुरी तैयारी।

shravani mela countdown  all departments engaged in finalization of work

2 / 2कच्चा कांवरिया पथ पर भी जैसे-तैसे बालू गिराकर खानापूर्ति की जा रही है।

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भागलपुर के सुल्तानगंज में विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला का उद्घाटन 16 जुलाई को होने वाला है। तिथि नजदीक देख मेला के नाम पर कार्य करने वाले विभाग आनन-फानन में कार्य को अंतिम रूप देने में लगे हैं। वहीं सुल्तानगंज में सैकड़ों की संख्या में कांवरिये सावन की पहली तिथि को बाबा वैद्यनाथ का जलार्पण करने के लिए जुटने लगे हैं।
 
जैसे-तैसे बालू गिराकर खानापूर्ति की जा रही
कच्चा कांवरिया पथ पर भी जैसे-तैसे बालू गिराकर खानापूर्ति की जा रही है। कांवरिया पथ पर मिले बनारस के कांवरिया राम बचन यादव, समस्तीपुर के बिजली राम, शाहपुर पटोरी के कमलेश ठाकुर, अमरनाथ दास, वैशाली के किशन चौधरी ने बताया कि कांवरिया पथ पर सही से बालू नहीं गिराया गया है। अभी ही कांवरिया पथ पर पानी दिख रहा है जबकि अभी और बारिश होनी बाकी है। उन्होंने कच्ची कांवरिया पथ से सटे  कुआं को खतरनाक बताया और कहा कि से कांवरियों को इससे खतरा हो सकता है। यहां कांवरियों का आना तेजी से शुरू हो गया है। कांवरिया सुविधा और असुविधा की परवाह किए बगैर गंगा स्नान कर अपने कांवर में गंगाजल ले अजगैवीनाथ धाम से बाबाधाम के लिए जा रहे हैं। हालांकि सभी विभाग आनन-फानन में अपने कार्य को पूरा करने में लगे हुए हैं लेकिन अबतक किसी विभाग का कार्य पूर्ण नहीं हो सका है।

जैसे-तैसे जेसीबी लगाकर बनाया जा रहा घाट 
शनिवार को गंगा घाट पर जैसे-तैसे जेसीबी लगाकर घाट बनाने का कार्य आनन-फानन में किया गया। घाट की सड़कों पर आज भी कीचड़ दिखा। गंगा किनारे रोशनी की व्यवस्था हेतु तार खींचे जा रहे थे। नाले का पानी गंगा में ना जाए इसकी रोकथाम के लिए सोख्ता की व्यवस्था तक नहीं की जा सकी है। इतना ही नहीं नाला उड़ाही का काम आज भी जारी रहा। नाले की मरम्मत की जा रहा है लेकिन इस पर ढक्कन अभी जगह-जगह लगाना शेष है। रेल उपरी पुल के नीचे रेलवे फाटक के समीप बने नाले में मजबूत ढक्कन लगा था। उसे भी नगर परिषद कर्मी सफाई के नाम पर जेसीबी से तोड़कर हटा दिया। इससे नाला खुला का खुला रह गया। रेल उपुरी पुल पर रंगाई का कार्य आज प्रारंभ किया गया है लेकिन रेलिंग की मरम्मत अबतक प्रारंभ नहीं की गई है और ना ही इसपर लाइट जलाने की व्यवस्था। मंजूषा कलाकार जगह-जगह दीवार पर मंजूषा पेंटिंग कर सजा रहे हैं। स्टेशन रोड, रेल उपरी पुल के दोनों ओर की सड़कों पर आज भी कई गड्ढे हैं।
 
प्रशासन की ओर से कोई कार्य पूर्ण नहीं 
दुकानदार अपनी दुकान कांवरियों की सेवा के लिए भले ही सजाने में लगे हैं लेकिन प्रशासन किसी भी कार्य को अंतिम रूप अबतक नहीं दे पाई है। बिजली विभाग मेंटेनेंस के नाम पर बिजली काट कर उपभोक्ताओं को परेशानी में डाल रहे हैं लेकिन उनका मेला के दौरान किए जाने वाला कार्य अबतक पूरा नहीं हो सका है। पीएचईडी द्वारा म्यूजिकल फव्वारा अबतक चालू नहीं किया गया है। गंगा किनारे वस्त्र बदलने का स्थान अबतक नहीं बनाया जा सका है। हालांकि विभाग कार्य को गति देने में लगा है। प्रशासन द्वारा जगह-जगह पंडाल एवं तोरण द्वार, वाच टावर बनाए जा रहे हैं। कार्यों को देख वृद्ध कांवरिया किशन चौधरी कहते हैं कि कांवरिया हित में किये जा रहे कार्यों को देख लगता है की यहां व्यवस्था के नाम पर कुछ भी काम नहीं किया गया है।

एक क्विंटल का कांवर ले चला कोलकाता का जत्था
श्रावणी मेला के उद्घाटन के पूर्व यहां कांवरियों का आना एवं गंगाजल लेकर वैद्यनाथधाम जाना प्रारंभ हो गया है। शनिवार को एकादश मानस मंडल कांवरिया संघ फूल बागान, कोलकाता के 150 की जत्था ने एक क्विंटल का बना भारी भरकम कांवर उठा अजगैवीधाम से बाबाधाम के लिए प्रस्थान किए। इनके साथ चल रहे रमेश सरदार ने बताया कि हमारा जत्था आषाढ़ में जल उठाता है और पहली सावन को बाबा के दरबार पहुंच जलाभिषेक करता है। उन्होंने बताया कि 25 वर्ष से अनवरत हमलोगों का जाना जारी है। एक क्विंटल का कांवर उठाने वाले कांवरियों में शिवा, अंकित, विजय, रवि अमित छोटू निलेश रोशन, अंकुर, दीपक, अशोक शामिल हैं। रमेश सरदार ने बताया कि हमें बिहार से अधिक झारखंड में सम्मान मिलता है। वहां हमारे साथ चल रहे कलाकारों को मंच उपलब्ध कराया जाता है। हमारे साथ न केवल कांवरिया बल्कि नाश्ता, खाना, मेडिकल एवं ऑर्केस्ट्रा की टीम चलती है। ऑर्केस्ट्रा टीम के कलाकार राकेश पांडे एवं सोनू सिंह हैं। रास्ते में कांवर दुकानदार अपनी दुकान के आगे रखने नहीं देता है। मैंने पिछले वर्ष इसकी शिकायत बांका डीएम से की थी। इन्होंने मांग की कि जो घाट बन रहा है वह तो व्यवस्थित एवं सुरक्षित नहीं है। यहां सुरक्षित घाट बनना चाहिए। गंगा घाट के किनारे लाइट की व्यवस्था नहीं है। महिलाओं को वस्त्र बदलने के लिए जगह, घाट पर सफाई एवं  सुल्तानगंज-तारापुर के बीच एक सुव्यवस्थित धर्मशाला होना चाहिए।

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