17 करोड़ के एमआरएफ सेंटर का टेंडर रद्द, संवेदकों की बेरुखी से फंसा सेग्रिगेशन का काम
इस परियोजना में संवेदकों के दिलचस्पी नहीं दिखाने से रद्द हुआ टेंडर बनने वाले एमआरएफ

भागलपुर, वरीय संवाददाता। जिला के कनकैथी डंपिंग प्वाइंट पर कचरे के पहाड़ को कम करने की महत्वपूर्ण पहल को बड़ा झटका लगा है। 17 करोड़ की अनुमानित लागत से कनकैथी में बनने वाले महत्वाकांक्षी मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ) सेंटर का टेंडर, संवेदकों द्वारा दिलचस्पी नहीं दिखाए जाने के कारण रद्द कर दिया गया है। टेंडर रद्द होने का मुख्य कारण किसी भी योग्य संवेदक (ठेकेदार) का नहीं आना बताया गया है। नगर निगम के टेंडरों में संवेदकों की दिलचस्पी का अभाव स्पष्ट दिख रहा है। यह एमआरएफ सेंटर कचरे के सेग्रीगेशन (पृथक्करण) और रीसाइक्लिंग के लिए बनाया जाना था, जिसकी क्षमता प्रतिदिन 100 टन कचरा स्टोर करने की थी।
यह राज्य में बनने वाले चंद बड़े एमआरएफ सेंटरों में से एक था। इसको लेकर नगर निगम के स्वच्छता प्रभारी शशि भूषण सिंह ने बताया कि एमआरएफ सेंटर की निविदा को किसी भी संवेदक द्वारा नहीं भरे जाने के कारण रद्द कर दिया गया है। जल्द ही री-टेंडर की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। संवेदकों की बेरुखी: निगम की कई परियोजनाओं पर असर - पिछली रद्द योजनाएं: यह पहली बार नहीं है जब नगर निगम की परियोजनाओं का टेंडर रद्द हुआ है। विगत कुछ माह में निगम की कई परियोजनाओं का टेंडर रद्द हो चुका है। दो माह पूर्व ही, 175 योजनाओं में से 71 योजनाएं संवेदकों की बेरुखी के चलते रद्द करनी पड़ी थीं, जिसके बाद उनका री-टेंडर जारी किया गया। - कार्य प्रभावित: इस तकनीकी बाधा के कारण, जिस एमआरएफ सेंटर के निर्माण से शहर के ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को गति मिलनी थी, वह काम अब तक शुरू नहीं हो पाया है। एमआरएफ सेंटर के लिए री-टेंडर और अन्य योजनाएं नगर निगम अब इस परियोजना को गति देने के लिए सक्रिय हो गया है। चुनाव प्रक्रिया समाप्त होने के बाद, निगम ने इस महत्वपूर्ण एमआरएफ सेंटर के निर्माण के लिए री-टेंडर (पुनः निविदा) की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिसके बाद निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है। एमआरएफ सेंटर की स्थापना के अलावा, कनकैथी डंपिंग प्वाइंट के पास ही एक बायोगैस प्लांट का भी निर्माण किया जाना है। एचपीसीएल कंपनी की ओर से बायोगैस प्लांट बनाने पर चर्चा अंतिम चरण में है। निगम अधिकारियों का कहना है कि एमआरएफ सेंटर और बायोगैस प्लांट, इन दोनों परियोजनाओं के पूरा होने पर भागलपुर में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को एक नई और टिकाऊ दिशा मिलेगी।

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